Tuesday, December 10, 2013

बराक घाटी रेल का सफर - देसवालिया हैं हमलोग

बराक घाटी के रास्ते ट्रेन में सफर करते हुए तीन युवा मजदूर मिले। वे पहले तो असमिया में बातें कर रहे थे। वे अचानक आपस में भोजपुरी में बातें करने लगे। उनकी बातें सुनकर मैं भी उनसे अपनी मातृभाषा में बातें करने लगा।

उन्होंने बताया, देसवालिया हैं हमलोग। देसवालिया मतलब पूर्वोत्तर में रहने वाले यूपी और बिहार के लोग। शायद ये लोग देस से आए हैं इसलिए इनके लिए देसवालिया उपाधि मिली होगी।

ठीक वैसे ही जैसे पंजाब में यूपी बिहार के लोग भैय्या कहलाते हैं उसी तरह ये लोग पूर्वोत्तर में देसवालिया हैं। ये तीनो मजदूर भाई लंबे समय से करीमगंज जिले के एक गांव में रहते हैं। यूपी बिहार में कहां के रहने वाले हैं इन्हें नहीं पता क्योंकि असम में इनकी ये दूसरी पीढ़ी है। सब कुछ बदल गया पर भोजपुरी जबान नहीं बदली। लेकिन अब काम नहीं इसलिए नए काम की तलाश में मुंबई की ओर जा रहे हैं।

खेती करते हैं यूपी से आए लोग - इसी ट्रेन में आगे एक और देसवालिया मिल गए। यूपी के आजमगढ़ जिले के रहने वाले हैं। कार्बी जिले के एक गांव में रहकर कई दशक से खेतीबाड़ी करते हैं। बताने लगे हर साल गांव भी जाता हूं। परिवार रिश्तेदारों से मेल मुलाकात करने। कहते हैं-खेती करना कार्बी लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल है। हम यहां जिन खेतों में काम करते हैं वहां साल में तीन फसल निकालते हैं। पर कार्बी लोग एक फसल ही निकाल पाते हैं। खुरपी और कुदाल चलाना कार्बी लोगों के लिए मुश्किल है। वे झुककर काम नहीं कर सकते। वे सिर्फ झूम खेती करना जानते हैं। जिसमें खेतों की निकाई गुड़ाई में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। 

बताते हैं कि उन्हें कार्बी लोगों से समन्यवय में कोई परेशानी नहीं है। माहौल मस्त है। वे असम में खेतीबाड़ी करके खुश हैं। असम का कोई ऐसा जिला और उन जिलों का कोई गांव नहीं होगा जहां देसवालिया लोग खेती करते हों। असम के चाय के बगान और खेत बिहार यूपी के लोगों से गुलजार हैं। किसी भी इलाके में चले जाइए भोजपुरी जुबान कानो को सुनाई दे जाएगी।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य


( बराक वैली एक्सप्रेस, Barak Valley Express-5, DESWALIA ) 

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