Thursday, December 26, 2013

कोहिमा के वे दो यादगार भोज

भले कोहिमा में शाकाहारियों को खाने पीने में दिक्कत हो पर मुझे अपनी यात्रा के दौरान के कोहिमा के दो भोज हमेशा याद रहेंगे। हमारे स्थानीय मित्र अमित गुप्ता ने मुलाकात के साथ ही बताया कि आज शनिवार है और कोहिमा के हाई स्कूल जंक्शन इलाके के सभी बिहार यूपी के दुकानदारों की ओर से एक वनभोज यानी पिकनिक का आयोजन किया गया है। शनिवार को दुकान बाजार बंद रहते हैं। तो दुकानदार भाइयों का ये पिकनिक हाई स्कूल के पीछे के जंगलों में आयोजित था। मैं अपने दोस्तों के साथ इस पिकनिक में पहुंचा। इसमें बिहार यूपी दुकानदारों के साथ नागा साथी भी शामिल थे।

भैंसे का मांस चिकेन और चावल - पिकनिक के मीनू में भैंसे का मांसचिकेन और चावल प्रमुख था। हां अल्पसंख्यक शाकाहारियों के लिए दाल और सलाद भी बनाई गई थी। सलाद का मतलब हरी पत्तेदार सब्जियों को उबाल दिया गया था। हालांकि ये सेहत के लिए काफी अच्छी हैं भले ही बेस्वाद लगती हों। पिकनिक के मुख्य द्वार पर शहीद हुए भैंसे के सिर को पेड़ से लटका दिया गया था। नागा महिलाएं भोज की सूत्रधार थीं। अस्थायी चूल्हों में जंगल की लकड़ी से आंच दी जा रही थी। बड़े बडे़ भगोने में मांस पक रहा था। इस चलाने के लिए बांस के बने बेलचों का इस्तेमाल किया जा रहा था। लेकिन महिलाएं उसी बेलचे से भैंसे का मांस और उसी चिकेन भी चला रही थीं।

हालांकि मैं चिकेन कभी कभी खा लेता हूं लेकिन यहां खाने को दिल नहीं माना। फिर भी दोस्त साथ देने के लिए कुछ कौर खा लिया। कई बिहार यूपी के भाई लोग पिकनिक में आए जरूर थे पर उन्हें भी खाने से गुरेज था। वे लोग घर में चिकेन और मछली खाते हैं पर बाजार और भोज में खाने से बचते हैं। अमित के घर पहुंचने पर भाभी जी ने राजफाश किया - यहां पर आकर न कई ठो बिहारी लोग अनजाने में गड़बड़-सड़बड़ खाकर अपना धर्म भ्रष्ट कर लिया है।  तो भाभी जी बातें सुनने के बाद ..मुझे लगा अच्छा हुआ मैं अपना धर्म भ्रष्ट करने से बच गया। 

अब बात दूसरे भोज की। मुझे दूसरे दिन दोपहर में एक और भोज में जाने का मौका मिला। यहां बीआरटीएफ ( बार्डर रोड टास्क फोर्स) के शिविर में गुरुनानक जयंती मनाई जा रही थी। इस मौके पर कैंप के गुरुद्वारे में विशेष रुप से गुरू के लंगर का आयोजन किया गया था।

जब कैंप के प्रशासनिक अधिकारी को मेरे आने की सूचना मिली तो उन्होंने बड़ी आत्मीयता से मुझे भी आमंत्रित किया। इस लंगर के भोज में खाना दिव्य था। मीनू में बासमती चावल का शानदार पुलाव, दाल, सब्जी, रायता, खीर, सलाद, रसगुल्ले सब कुछ थे। खाना इतना स्वादु था और लोग इतने आत्मीयता से परोस रहे थे कि अपना पंजाब याद आ गया। बीआरटीएफ के भाई लोग हर सिविलियन को पूछ पूछ कर बड़ी आत्मीयता से खिला रहे थे। मैंने तो कोहिमा में ऐसे किसी भोज की उम्मीद नहीं की थी।
लंगर के बाद बीआरटीएफ के अधिकारी यादव जी ने जो वाराणसी के पास के शिवपुर के रहने वाले थे ने पूर्वोत्तर में बीआरटीएफ के काम काज के बारे में बताया। दुरुह इलाकों के नेशनल हाईवे के निर्माण और रखरखाव और सुरक्षा की जिम्मेवारी इधर बीआरटीएफ के हवाले है। सीमांत क्षेत्र में जंगलों में बीआरटीआफ मुश्किल हालात में सड़के बनाता है और उनका रखरखाव करता है। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य  ( NAGALAND, KOHIMA, BHOJ, BRTF ) 

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