Tuesday, January 14, 2014

मौज मस्ती की शाम - इंफाल का संगाई उत्सव

रंग बिरंगे मणिपुर के कई चेहरे हैं। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसे ज्वेल ऑफ क्राउन कहा था। लेकिन मणिपुर का ज्वेल है संगाई। संगाई मणिपुर का राजकीय जानवर है। यह हिरण से मिलता जुलता होता है। संगाई के सिर पर कई सिंग होते हैं। यह खूबसूरत जानवर अब विलुप्त हो रहा और इसे बचाने की कोशिशें जारी हैं। इंफाल के लोकप्रिय अखबार का भी नाम संगाई एक्सप्रेस है। हर साल इंफाल शहर में रंग बिरंगे उत्सव संगाई फेस्टिवल का आयोजन नवंबर महीने में होता है। यह एक ऐसा मेला है जिसमें  दुनिया के कई देशों से लोग अपनी दुकानें लेकर आते हैं। मुझे साल 2013 में इस संगाई फेस्टिवल में जाने का मौका मिला।

कांगला फोर्ट के पास नव निर्मित कन्वेंसन सेंटर के पास बड़े से मैदान में नवंबर महीने के आखिरी हफ्ते में संगाई फेस्टिवल का आयोजन होता है। इस मेले में व्यापार, हस्तशिल्प, खाना पीना से लेकर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन रोज शाम को होता है।
संयोग से जब मैं इंफाल पहुंचा तो संगाई फेस्टिवल का मौका था। दिन भर शहर में घूमने के बाद शाम को 4 बजे संगाई फेस्टिवल में प्रवेश कर गया। 20 रुपये का प्रवेश टिकट। प्रवेश द्वार पर कई स्तरों में सुरक्षा। 

फेस्टिवल मणिपुर सरकार के अलग अलग विभागों की प्रदर्शनियां लगी थीं जो राज्य के प्रगति की दास्तां बयां कर रही थीं। खास तौर पर कृषि और बागवानी विभाग की प्रदर्शनियां राज्य की प्रगति बयां कर रही थीं।

इस फेस्टिवल में बड़ी संख्या में म्यांमार और थाइलैंड के स्टाल के साथ भी लोग हिस्सा लेने के लिए आए थे। मणिपुर का हस्तशिल्प के दर्जनों स्टाल लगे थे। घूमते घूमते थक जाएं फूड कोर्ट में कई तरह के खाने पीने का इंतजाम। लुत्फ उठाइए मणिपुरी भोजन का। संगाई फेस्टिवल की मस्ती भरी शाम में मणिपुरी स्त्रियों का पहनावा देखकर लगता था मानो आप किसी अंतराष्ट्रीय महानगर में हों।
संगाई फेस्टिवल में तुपुल की शॉल के साथ। 
ओपन एयर थियेटर में सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहा था। इंफाल सरकार के मंत्री और उच्चाधिकारी मौजूद थे। राज्य के सांस्कृतिक जिले चूड़ा चांदपुर के कलाकार मंच पर थे। सुंदर मणिपुरी बाला ने पॉप संगीत संगीत गाना शुरू किया तो सैकड़ो दर्शक थिरकने लगे। इसके बाद कलाकार अपने राज्य के लोक संगीत और नृत्य के कार्यक्रम लेकर आए।

संगाई फेस्टिवल का समय रात के आठ बजे तक था। मेले में हजारों लोग जमा थे। रंग बिरंगी रोशनी से पूरा मैदान नहाया हुआ था। इन्ही तारीखों में दिल्ली में प्रगति मैदान में व्यापार मेला भी चलता है पर यहां जो मौज मस्ती की जवां शाम थी वह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को मात दे रही थी।
संगाई मेले में मणिपुर का सौंदर्य ऊभर कर आता है। पांरपरिक परिधानों के साथ पाश्चात्य परिधानों में मणिपुरी बालाएं दिखाई दे रही हैं। संगाई फेस्टिवल एक अंतरराष्ट्रीय मेला है।
यहां दुनिया के सात देशों के दुकानदार और कंपनियां अपने उत्पाद लेकर आते हैं। यह हर साल होने वाला एक नियमित आयोजन है। पर मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम रात आठ बजे तक ही चलते हैं। मन में ख्याल आता है कि अगर मणिपुर उग्रवाद की गिरफ्त में न होता और ये आयोजन संगीनों के साए में नहीं होता तो उसकी खुशबू और भी दूर तक जाती।    


-    विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com

ज्यादा जानकारी के लिए यहां जाएं - http://tourismmanipur.nic.in/
   

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