Friday, December 20, 2013

नागालैंड में जरूरी है इनर लाइन परमिट


अपने ही देश में जाने के लिए इजाजत की जरुरत। सुनकर थोड़ा अजीब लगता होलेकिन  पूर्वोत्तर के तीन राज्यों और लक्षद्वीप के लिए ऐसी औपचारिकता जरूरी है। आपको अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम में प्रवेश करने के लिए इनर लाइन परमिट ( आईएलपी) लेना जरूरी है। पूर्वोत्तर के राज्य असम, त्रिपुरा और मणिपुर जाने के लिए कोई परमिट नहीं चाहिए। मेघालय में भी प्रवेश के लिए आईएलपी जरूरी नहीं है। हालांकि इन दिनों मेघालय के संगठन वहां भी आईएलपी अनिवार्य करने की मांग को लेकर आंदोलन पर उतरे हुए हैं।

 अगर आप पूर्वोत्तर में इन तीन राज्यों में जाने की कोई योजना बना रहे हों तो आपको पहले आईएलपी हासिल कर लेना चाहिए। अगर विदेशी नागरिक हों तो उन्हें वीजा के अलावा रिस्ट्रिक्टेड एरिया का खास परमिट लेना पड़ता है। आईएलपी हासिल करने के दौरान आपको ये जानकारी देनी होती है कि आपको कितने दिन और किन किन जिलों में जाना है। संबंधित राज्यों में जाने के लिए आईएलपी दिल्ली स्थित नागालैंड, अरुणाचल या मिजोरम के रेसिडेंट कमिश्नर के दफ्तर से ये परमिट हासिल किया जा सकता है। इसके अलावा परमिट बनवाने के दफ्तर कोलकाता और गुवाहाटी में भी हैं। नागालैंड का परमिट डिमापुर स्थित दफ्तर से भी बनवाया जा सकता है। अगर आप बिना परिमट के नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल में घुस गए हैं तो आपको कहीं से भी वापस भेजा जा सकता है। इसलिए ऐसी गलती नहीं करें। 

मैंने नागालैंड की यात्रा से पहले दिल्ली स्थित नागालैंड हाउस जाकर परमिट हासिल कर लिया था। वहां परमिट बनवाने की प्रक्रिया बहुत सरल है। महज 15 मिनट में परमिट बनकर मिल गया। अगर आप गुवाहाटी और डिमापुर में परमिट बनवाने जाएं तो थोड़ा ज्यादा वक्त भी लग सकता है। इसलिए समय बचाने के लिए आईएलपी पहले ही बनवा लें तो अच्छा।


प्रवेश के लिए दो तरह के हैं आईएलपी - आईएलपी दो तरह के हैं एक टूरिस्ट के लिए और दूसरा बिजनेस के लिए। किसी भी तरह के बिजनेस के सिलसिले में इन राज्यों में जाने वालों को अपने उस राज्य में संपर्क व्यक्ति ( कांटेक्ट पर्सन) का नाम पता फोन नंबर आदि देना पड़ता है। अगर भारत सरकार की नौकरी में आपकी पोस्टिंग इन राज्यों में है तो परमिट की जरूरत नहीं है। डिमापुर से कोहिमा जाते समय रास्ते में पड़ने वाले चेक पोस्ट पर परमिट की चेकिंग होती है। अगर आप डिमापुर से इंफाल बस या टैक्सी से जा रहे हैं तो रास्ता हांलाकि नागालैंड होकर जाता है लेकिन इस रास्ते जाने के लिए परमिट जरूरी नहीं है। 
TOUPHEMA TOURIST VILLAGE, NAGALAND 

देश का 16वां राज्य है नागालैंड  -  नागालैंड राज्य का गठन एक दिसंबर 1963 में हुआ। यह भारत का 16वां राज्य है। यह आबादी में देश के छोटे राज्यों में शुमार है। 2011 की जनगणना में इसकी आबादी 20 लाख से भी कम रही है। आबादी के लिहाज से 25वें नंबर पर आता है नागालैंड। आजादी के समय नागालैंड असम का ही हिस्सा हुआ करता था। पर नागा आंदोलन के बाद 1957 में अलग यूनियन टेरीटरी बना। बाद में 1963 में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। पर नागा लोगों का आंदोलन और समस्याएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। नागा संगठनों और भारत सरकार के बीच युद्ध विराम समझौता के कारण 1997 के बाद यहां ज्यादा हिंसा की घटनाएं नहीं देखी जाती हैं।
कोहिमा में नागालैंड की विधान सभा 
तो यह मान लें कई सालों से नागालैंड में शांति का आलम है। आप राज्य के कई इलाकों में घूम सकते हैं।

नागालैंड राज्य में 17 प्रमुख जनजातियां निवास करती हैं। हर ट्राईब की अपनी अलग वेश भूषा और भाषा है। राज्य की तकरीबन पूरी आबादी ईसाई है और भाषा पर अंग्रेजी का प्रभाव है। कुल 11 जिलों में विभाजित राज्य का आबादी में सबसे बड़ा शहर डिमापुर है। राज्य की सीमा असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और अंतरराष्ट्रीय सीमा म्यांमार से लगती है। इस नाते यह एक संवेदनशील राज्य है। 

नागालैंड में पर्यटन - अगर पर्यटन की बात करें तो नागालैंड में हर साल सैलानी कम जाते हैं। पर वहां टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। कोहिमा शहर में आप सालों भर जा सकते हैं। दिसंबर में होने वाले हार्नबिल फेस्टिवल में काफी लोग पहुंचते हैं। पर नागालैंड में इको टूरिज्म की संभावनाएं हर जिले में हो सकती हैं। प्रकृति ने नागालैंड को ऐसा मौसम प्रदान किया है कि यहां आप सालों भर घूमने के लिए आ सकते हैं। ट्रैकिंग, जंगल कैंप, रॉक क्लाइंबिंग आदि के लिए यह आदर्श राज्य है। डिमापुर, कोहिमा के अलावा आप यहां मोकोचुंग जा सकते हैं। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य
( NAGALAND 3, INNER LINE PERMIT, MIZORAM AND ARUNACHAL ) 

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