Wednesday, December 18, 2013

डिमापुर – नागालैंड का प्रवेश द्वार


हमारा सफर शुरू हो रहा था पूर्वोत्तर के अनूठे राज्य नागालैंड के लिए। नागालैंड वह राज्य जिसके बारे में कई तरह की बातें कही जाती हैं। कई तरह की आशंकाएं अभी भी लोग पाले हुए हैं। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से रात 11.35 बजे नागालैंड एक्सप्रेस खुलती है। हमारे सामने वाले बर्थ पर दो नागा महिलाएं जा रही हैं। उनकी कोहिमा में दुकान है खिलौनों की। वे गुवाहाटी से दुकान में बिक्री का सामान लेकर जा रही हैं। उनको देखकर मुझे पूर्वोत्तर में नारी सशक्तिकरण की झलक साफ दिखाई दे रही है। इस  ट्रेन के कोच साफ सुथरे नहीं है। खासकर टायलेट्स काफी गंदे हैं। पर ये ट्रेन ठीक सुबह पांच बजे नागालैंड के एकमात्र रेलवे स्टेशन डिमापुर ( स्टेशन कोड DMV) पहुंच जाती है। वैसे दिन में डिमापुर जाने के लिए कई ट्रेनें हैं जो 4 से 5 घंटे में डिमापुर पहुंचा देती हैं। रास्ते में लंका, लमडिंग जंक्शन, दीफू जैसे रेलवे स्टेशन आते हैं। 

डिमापुर के बाद आगे तिनसुकिया ढिब्रूगढ़ की तरफ जाने वाली ट्रेनें एक बार फिर से असम में प्रवेश कर जाती हैं। सिर्फ डिमापुर रेलवे स्टेशन ही नागालैंड में पड़ता है। अब डिमापुर से राजधानी कोहिमा को रेल से जोड़ने की परियोजना पर विचार चल रहा है। फिलहाल कोहिमा जाना हो तो स्टेशन के बाहर से शेयरिंग टैक्सी या पास में ही स्थित बस स्टैंड से बस मिल जाती है।


लमडिंग-डिमापुर-ढिब्रूगढ़ रेलवे लाइन 1997 में ब्राडगेज में बदला गया। उसके बाद यहां दिल्ली गुवाहाटी और शेष भारत से सीधी रेलगाड़ियां आ जाती हैं। डिमापुर नगालैंड का एकमात्र रेलवे स्टेशन है। इस रेलवे स्टेशन पर तीन प्लेटफार्म हैं। स्टेशन पर रेलवे बुक स्टाल, कैंटीन आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं। स्टेशन का बिल्डिंग अब बाहर से भव्य बन गया है।     

साल 2016 में एक बार फिर डिमापुर में 
सुबह की चाय डिमापुर में - शेष भारत की तुलना में डिमापुर में उजाला थोड़ा पहले हो जाता है। सुबह के पांच बजे उजाला हो चुका है। रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नंबर एक पर कैंटीन की चाय पांच रुपये की है। चाय वाले के पास दूध और पानी अलग अलग केतली में गर्म हैं। चाय मांगने पर वह कप में एक चम्मच चीनी डालता है फिर थोड़ा दूध। छन्नी में ताजी डस्ट चाय पत्ती डालता है। इसके ऊपर और गर्म पानी उड़ेलता और हो जाती है चाय तैयार। तो सुबह सुबह नगालैंड की पहली चाय पीकर स्टेशन से बाहर निकल पड़ता हूं। नगालैंड में प्रवेश के लिए मेरे पास इनर लाइन परमिट दिल्ली से ही बना हुआ है इसलिए कोई चिंता की बात नहीं है। 

वैसे डिमापुर रेलवे स्टेशन पर दक्षिण भारतीय कैंटीन भी है। वहीं स्टेशन के बाहर परिसर में ही एक पंजाबी ढाबा भी है। स्टेशन परिसर में ही दो मंदिर भी हैं। हालांकि नगालैंड में डिमापुर के बाहर कहीं भी कोई मंदिर दिखाई नहीं देता। डिमापुर नागालैंड का एक जिला है। यह राज्य का एकमात्र औद्योगिक और व्यापारिक शहर हैं। यहां बड़ी संख्या में मारवाड़ी व्यापारी हैं जो देश भर से व्यापार करते हैं। हालांकि सुनने में आता है कि उन्हें भी उग्रवादी संगठनों को अंडरग्राउंड टैक्स देना ही पड़ता है।
डिमापुर रेलवे स्टेशन परिसर में मंदिर
यहां से खासतौर सागवान की लकड़ी और उससे बने फर्नीचर की तिजारत होती है। हालांकि बाहरी लोग नागालैंड में घर नहीं बना सकते है। इसलिए यहां व्यापारी लीज पर जमीन लेकर अपने लिए आवास बनाते हैं। अब डिमापुर में कई उद्योग भी लग गए हैं। कुछ कपड़ों के तो कुछ अन्य उत्पादों के भी।
अगर आप यहां रूकना चाहें तो डिमापुर में रहने के लिए होटल भी हैं। यहां पर आप नागालैंड में जाने के लिए इनर लाइन परमिट भी बनवा सकते हैं।

वैसे कभी डिमापुर कछारी राजवंश की राजधानी हुआ करता था। अंग्रेजों के जमाने से ये भारत का बहुत बड़ा रेलवे स्टेशन हुआ करता है। ब्रिटिश काल में यह बड़ा व्यापारिक केंद्र भी बन गया था। डिमापुर से म्यांमार और चीन के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार हुआ करता था। आज भी वह सिलसिला जारी है। 


-    -- विद्युत प्रकाश मौर्य 
( NAGALAND -1, DIMAPUR, KOHIMA, RAILWAY STATION, TAXI, BUS STAND) 


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