Sunday, November 24, 2013

मंदिरों की नगरी राजगीर

पांच पहाडियों से घिरे राजगीर में असंख्य मंदिर हैं। राजगीर न सिर्फ हिंदू बल्कि बौद्ध और जैन मतावलंबियों के लिए समान रूप से आस्था का केंद्र है।

देश के कोने कोने से आने वाले जैन श्रद्धालुओं की सूची में राजगीर जरूर होता है तो दुनिया के हर देश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालु भी राजगीर जरूर आते हैं।


वेणुवन महाविहार – गर्म जल कुंड के पास ही वेणुवन महाविहार स्थित है। ये बांस का जंगल कभी राजकीय उद्यान था। कहा जाता है गौतम बुद्ध बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद पहली बरसात के चार महीने यहीं रूके थे।


राजगृह के महाराज अजातशत्रु ने ये विहार खास तौर पर भगवान बुद्ध को उपहार में दिया था ताकि श्रद्धालु उनके आसानी से दर्शन लाभ प्राप्त कर सकें। इसलिए वेणुवन को विश्व का पहला बौद्ध विहार होने का गौरव प्राप्त है। अब वेणुवन के ही परिसर में एक नव वेणुवन विहार का निर्माण कराया गया है। यहां एक विशाल बुद्ध प्रतिमा भी लगी है। नव वेणुवन विहार के वास्तुकार उपेंद्र महारथी हैं। 24 अक्तूबर 1981 को इस विहार का उदघाटन तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने किया था।

विरायतन जैन आश्रम वेणुवन विहार से थोड़ी दूर आगे वैभवगिरी पहाड़ी के निचले हिस्से में विरायतन जैन आश्रम और संग्रहालय है। विरायतन की स्थापना 1973 में की गई थी। 40 एकड़ क्षेत्र में फैले इस आश्रम में गरीबों का मुफ्त उपचार किया जाता है। विरायतन तीन दशक में लाखों लोगों का उपचार कर चुका है। यहां एक विशाल जैन संग्रहालय और अतिथि गृह भी है।
इसके अलावा राजगीर और आसपास में 26 जैन मंदिर हैं। इनमें से कई मंदिर पहाड़ों पर हैं जहां ट्रैकिंग करेक पहुंचा जा सकता है। चलने में असमर्थ जैन श्रद्धालुओं के लिए पालकी मिल जाती है। 
हालांकि इसका किराया हजारों में है। राजगीर में जापानी मंदिर, नौलखा मंदिर, बर्मी बौद्ध मंदिर जैसे मंदिर भी हैं। पास में कुंडलपुर गांव और पावापुरी जैन आस्था से जुडे दूसरे महत्वपूर्ण स्थल हैं।
-   ----- विद्युत प्रकाश मौर्य  

((BIHAR, RAJGIR, BUDDHA, JAIN, NALANDA )


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