Saturday, December 14, 2013

असम का सिलचर शहर में पहुंच कर राहत मिली


संकट टल चुका था। हमलोग सिलचर शहर में प्रवेश कर चुके थे। रात नौ बजे जिरीबाम से आने वाले टैक्सी ने हमें क्लब रोड टैक्सी स्टैंड पर छोड़ा। अब हमारी चिंता एक सस्ते और अच्छे होटल में तुरंत पहुंचने की थी। अनजान शहर में रात को पहुंचना कैसा होता है आप समझ सकते हैं। मैं रास्ते में मन ही मन सोच रहा था कि टैक्सी स्टैंड के आसपास ही कोई होटल मिल जाए। इससे पहले कोहिमा और इंफाल में देख चुका था कि दोनों शहर जल्दी सो जाते हैं। ऐसे में सिलचर पहुंच कर रात नौ बजे के बाद होटल ढूंढना थो़ड़ा डराने वाला अनुभव लग रहा था। इससे पहले फुलेर टाल में हादसा झेल कर आगे बढ़ा था सो मन में एक डर कायम था। पर ईश्वर को धन्यवाद सिलचर में ऐसा कुछ नहीं हुआ। 

सिलचर में टैक्सी स्टैंड के पास पहले एक होटल में गया। वह थोड़ा महंगा था, फिर पास के दूसरे होटल में पहुंचा। क्लब रोड ईंटखोला रोड तिराहे पर होटल नटराज में हमें अच्छा सा कमरा मिल गया। वाजिब दाम पर, 350 रुपये में डबल बेड और रोड फेसिंग बालकोनी के साथ। बिस्तर के साथ ऑ आउट और मच्छरदानी का भी इंतजाम है। होटल के मैनेजर का व्यवहार काफी अपनत्व भरा है। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशन यहां से महज आधे किलोमीटर है आप टहलते हुए जा सकते हैं। मेरी सुबह पौने सात बजे की ट्रेन थी। ये सुनकर हमने राहत महसूस की।

रात को उन्होंने गर्म पानी भी उपलब्ध करा दिया। यात्रा की थकान थी सो  नहाकर आनंद आ गया 27 नवंबर की रात है लेकिन अभी यहां ठंड मामूली सी है। रात का खाना होटल के कमरे में भी मंगाया। पर खाना आर्डर करने के बाद आने में काफी देर हुई तो सर्विस ब्याय ने कहा कि हमारे होटल के किचेन में खाना तो खत्म हो गया था, यह आपके आर्डर के बाद दुबारा बनाया है।


सिलचर में सुबह की चाय। 
उनका आतिथ्य भाव सुनकर गुस्सा दूर हो गया। होटल चाहे तो ये भी जवाब दे सकता था कि खाना खत्म हो गया। मिक्स वेज और चपाती, बिल्कुल घर जैसा खाना। वह भी महज 40-45 रुपये में। तो दुबारा कभी सिलचर जाना हो तो इसी होटल में ठहरा चाहूंगा। 

सुबह सुबह उठकर बाहर क्लब रोड के चौराहे पर आता हूं। सिलचर शहर की सुबह सुहानी है। इस सर्द सुबह में चाय पीने का अपना मजा है। हालांकि मैं आमतौर पर चाय नहीं पीता। चाय बनाने का यहां का अपना अलग अंदाज है। पांच रुपये में एक प्याली चाय पीकर काफी राहत मिली। 

अब थोड़ा सिलचर शहर के बारे में। गुवाहाटी के बाद सिलचर को अगर असम की दूसरी राजधानी कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह असम में गुवाहाटी के बाद दूसरा महत्वपूर्ण शहर है।  

सिलचर के क्लब रोड चौराहा से रेलवे स्टेशन भी यहां से आधे किलोमीटर की दूरी पर है। सिलचर असम का महत्वपूर्ण व्यापारिक और शहर है और शिक्षा का बड़ा केंद्र है। यहां असम का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) है तो असम यूनीवर्सिटी भी है।क्लब रोड या स्टेशन रोड पर स्थित कछार कालेज शहर का पुराना और प्रतिष्ठित कालेज है। इसके साइन बोर्ड पर लिखा नजर आता है स्थापित 1960, मैं इस कालेज के आगे एक तस्वीर खिंचवाता हूं।  

सिलचर शहर में बड़ी संख्या में हिंदू आबादी है। असम के चार संसदीय क्षेत्र हैं जहां से 2009 के चुनाव में भाजपा के सांसद हैं। आजकल भारतीय जनता पार्टी के कविंद्र पुरकायस्थ सिलचर लोकसभा सीट का नेतृत्व करते हैं। वैसे ये लोकप्रिय कांग्रेसी नेता और मंत्री रहे संतोष मोहन देव का इलाका रहा है।

मेैं सुबह सिलचर शहर की सड़क पर टहलने के लिए निकल पड़ता हूं। आसपास में कुछ और होटल और प्रमुख बैंकों की शाखाएं नजर आती हैं। मुझे ईंट खोला रोड पर हिंदुस्तानी समाज की गतिविधियां दिखाई देती हैं। अखंड रामायण पाठ का बोर्ड नजर आता है जो दो दिनों तक चलने वाला है। हिंदी में लगे साइनबोर्ड नजर आते हैं। सड़क पर दुर्गा पूजा के पंडाल बने हैं। यहां रामकृष्ण परमहंस का आश्रम भी नजर आता है। देखकर प्रतीत होता है कि आसपास में बंगाली हिंदू आबादी की अधिकता है। शहर में भी कई घरों के साथ पोखर भी बने हुए नजर आते हैं। जैसा असम के गांवों में भी दिखाई देता है। सिलचर मीडिया का भी बड़ा सेंटर है। यहां से कई समाचार पत्रों का प्रकाशन भी होता है। 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( HOTEL NATRAJ, SILCHAR, ASSAM, TAXI SERVICE )

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