Sunday, December 29, 2013

नागालैंड - अंडरग्राउंड टैक्स के बिना कारोबार नहीं

नागालैंड में अंडरग्राउंड टैक्स दिए बिना किसी भी तरह का कारोबार संभव नहीं है। कोहिमा या डिमापुर शहर में दुकानदारों को सरकार को दिए जाने वाले कर के अलावा अंडरग्राउंड संगठनों को भी टैक्स देना पड़ता है। जिस इलाके में जिस संगठन का वर्चस्व है वहां वे टैक्स की वसूली करते हैं। कोई दुकानदार इस टैक्स का विरोध नहीं कर सकता। 
विरोध करने पर हत्या - अगर विरोध किया तो जान से हाथ धोना पड़ सकता है। इन संगठनों से जुडे़ हुए लोग दुकानदारों के पास आकर एक पर्ची थमा जाते हैं, जिसमें दी जाने वाली राशि लिखी होती है साथ ही कब किसे देना है इसका भी जिक्र होता है। टैक्स आमतौर पर साल भर के लिए होता है। टैक्स की राशि संगठन के लोग दुकानदार का व्यापारी की हैसियत देखकर तय करते हैं। आप इस राशि में कोई रियायत नहीं करा सकते हैं। ऐसी कई घटनाएं हुई हैं कि टैक्स देने से आनाकानी करने पर दुकानदार की हत्या हो गई। हां टैक्स अदा कर देने के बाद आप बेधड़क होकर व्यापार कर सकते हैं। आमतौर पर नागा दुकानदार या व्यापारियों से ये टैक्स नहीं वसूला जाता। पर बिहार या यूपी के व्यापारी या मारवाड़ियों को ये टैक्स देना ही पड़ता है। इस टैक्स के अलावा कई बार छात्र संगठन के लोग भी चंदा मांगने आ धमकते हैं। 
जाहिर है इस तरह के टैक्स के कारण दुकानदारों को अपने कारोबार में मार्जिन भी ज्यादा रखना पड़ता है। इस कारण से नागालैंड में दुकान उपभोक्ता वस्तुओं को महंगा बेचने पर मजबूर हैं। इसलिए नागालैंड की दुकानों में अन्य राज्यों की अपेक्षा महंगाई ज्यादा है। चाहे आपकी दुकान फुटपाथ पर हो या फिर कोई बड़ा बिजनेस बिना अंडरग्राउंड टैक्स के यहां गुजारा नहीं है। इन हालातों के बीच भी यहां व्यापार करने में यूपी बिहार के लोग या फिर मारवाड़ी लोग ही सफल हैं। 


कहीं कहीं दक्षिण भारत के लोग भी व्यापार कर रहे हैं। नागा लोगों की प्रवृति दुकानदार बनने के लायक नहीं हैं। वे वीर बहादुर और लड़ाके लोग हैं। तिजारत के लिए वांक्षित व्यवहार कौशल और सहज माधुर्य उनकी व्यक्तित्व का हिस्सा नहीं है। इसलिए वे अगर व्यापार करें भी तो उन्हें उतनी सफलता नहीं मिल पाती। वे बिहार यूपी के दुकानदारों की तरह मोलभाव करने की शैली में निपुण नहीं होते। अक्सर नागा लोग जब किसी बिहार यूपी के दुकानदार के यहां खरीदारी करने पहुंचते हैं तो मोल भाव करते हैं। खरीददारी के साथ वे दुकानदार से बख्शिश भी मांगते हैं। इन 
सारी परिस्थितियों के बीच देसवालिया लोग यहां सफलतापूर्वक व्यापार कर रहे हैं।  क्या उम्मीद की जा सकती है कभी नागालैंड जैसे राज्य में अंडरग्राउंड टैक्स का वातावरण खत्म हो सकेगा। आशा की किरण दिखाई दे रही है। 
नागालैंड पोस्ट के 17 दिसंबर 2013 के अंक में एक खबर प्रकाशित है। राज्य के सबसे बड़े त्यूनसांग जिले के शामाटोर शहर के लोगों ने रैली निकालकर अंडरग्राउंड संगठनों को शहर से बाहर जाने के कहा। हो सकता है आने वाले दिनों में बाकी शहरों में भी इस तरह का बेहतर वातावरण बने। 

राज्य में सक्रिय नागा अंडरग्राउंड संगठन
- नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैण्ड (इसाक-मुईवा ) - एनएससीएन आईएम। इसके प्रमुख टी. मुइवा हैं। 
- एनएससीएन खापलौंग 
- नागा स्टूडेन्ट्स फेडरेशन (एन.एस.एफ.) नागालैंड
- यूनाइटेड नागा काउंसिल (यू.एन.सी.) मणिपुर
- आल नागा स्टूडेन्ट्स एसोसिएशन, मणिपुर (ए.एन.एस.ए.-एम.)


नागालैंड के प्रमुख क्षेत्रीय अखबार - 
मोरूंग एक्सप्रेस www.morungexpress.com/ 
नागालैंड पोस्ट www.nagalandpost.com/
इस्टर्न मिरर - www.easternmirrornagaland.com/
-    विद्युत प्रकाश मौर्य

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