Monday, December 16, 2013

ठंडा ठंडा कूल कूल - करीमगंज की शीतलपाटी

करीमगंज रेलवे प्लेटफार्म पर शीतलपाटी बेचने आया एक कारीगर 
 शीतलपाटी का मतलब ही जिसपर बैठने और सोने से शीतलता मिले। शहर के लोग शायद अब शीतलपाटी को भूल गए होंगे। पर असम का जिला करीमगंज जिसकी सीमाएं बांग्लादेश से लगती हैं वहां की बनी हुई शीतलपाटी दूर दूर तक प्रसिद्ध है। एक शीतलपाटी 1200 से लेकर दो हजार रुपये तक की आती है।

मोड़ने पर टूटती नहीं - इस शीतलपाटी की खास बात है कि इसे चाहे जैसे भी मोडो ये टूटती नहीं है। सबसे बड़ी खासियत ये है कि इस पर सोने से गर्मियों में भी ठंडक का एहसास होता है इसलिए ये खासतौर पर गर्मियों के लिए मुफीद है। इसे यू हीं जमीन पर बिछा दिजिए या फिर अपने बिस्तर पर गद्दे के नीचे। चाहें तो अपने साथ मोडकर कर सफर में कहीं ले जाएं या फिर धूप में या पार्क में बिछाकर बैठे।

करीमगंज के पास कालीगंज में अभी भी बड़ी संख्या में लोग शीतलपाटी बनाने में लगे हैं। करीमगंज की बनी इस शीतलपाटी का बाजार दूर दूर तक है। अगरतला शहर में इसका शोरूम है तो आप गुवाहाटी में भी इसे खरीद सकते हैं। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भी इसकी मांग है। शीतलपाटी के कद्रदान से खरीदकर अपने साथ दूर-दूर तक ले जाते हैं। आपको कोलकाता में सियालदह रेलवे स्टेशन के आसपास की दुकानों में भी ऐसी शीतलपाटी मिल जाएगी। वहीं यह दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेेले में भी पहुंचती है। 
अगरतला शहर में शीतलपाटी की दुकान। 

वैसे तो पूर्वोत्तर में शीतलपाटी कई शहरों में बनती है पर करीमगंज जैसी बात कहीं भी नहीं पाती। एक शीतलपाटी को बनाने में महीने लग जाते हैं। बुनाई से पहले शीतलपाटी के रेसों का खास तरीके से वाटर और केमिकल ट्रीटमेंट किया जाता है जो इसे सालों तक टिकाउ बनाते हैं। इस तरह करीमगंज की शीतलपाटी बनती है खास।  वैसे पास के शहर काटाखाल में भी शीतलपाटी बनाई जाती है। हमारे साथ चल रहे दिल्ली के शमीम साहब ने अपने करीमगंज के व्यापारी को दो शीतलपाटी का आर्डर दे डाला।

जिन लोगों ने फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी ठेस पढ़ी होगी उन्हें शीतलपाटी और उसके कारीगर स्वाभिमानी सिरचन की याद होगी। अब भला शहर के मैट्रेस के जमाने के लोगों को शीतलपाटी के बारे में क्या पता।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य  
(SHEETALPATI, KARIMGANAJ, ASSAM, COLD )  

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