Tuesday, November 19, 2013

राजगीर में तांगे की सवारी

अगर आप राजगीर घूमने निकले हैं तो यहां तांगे से नजारा करना श्रेष्ठ विकल्प है। देश भर के शहरों से तांगे विलुप्त होते जा रहे हैं पर राजगीर में तांगे अभी भी खूब चलते हैं। चाहे एक प्वाइंट से दूसरे प्वाइंट जाना हो या फिर दिन भर घूमना हो तांगे की सवारी का मजा लें। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी जब राजगीर आते हैं तो तांगे की सवारी ही करते हैं।
छोटे से राजगीर शहर में 700 से ज्यादा तांगे चलते हैं। इन तांगों के नाम रोचक हैं।

 क्रांतिवीर, मुकद्दर का सिकंदर, शहंशाह, लाल बादशाह जैसे नाम हैं तांगों के। राजगीर रेलवे स्टेशन पर उतरते है आप शहर घूमने के लिए तांगा मोल भाव कर सकते हैं। वैसे सरकार ने रेट तय कर रखा है। सभी प्रमुख स्थलों पर घुमाने के लिए 420 रुपये। लेकिन आप इससे कम में भी सौदा पटा सकते हैं।

हमने भी राजगीर रेलवे स्टेशन पर उतरते ही एक तांगा बुक किया। तांगे वाला 300 रुपये में प्रमुख स्थलों के दर्शन कराने को तैयार हो गया। यहां तांगे वाला आपका मिनी गाइड का भी काम करता है। हमारे तांगे वाले सिकंदर की घोड़ी अभी नई थी। वे उसे हाल में मेले से खरीद कर लाए थे, इसलिए उसे रास्ते का ज्यादा पता नहीं था। बार बार चलते हुए रूक जाती थी। काफी पुचकारने के बाद चलती थी। बचपन का तांगे पर गांव का सफर याद आ गया जब कई बार घोड़ा भड़क जाता था। तब घोड़े को चाबुक से गरम करना पड़ता था। सिकंदर भी अपनी घोड़ी रानी ( मुखर्जी नहीं) को मनाने में लग जाते थे। कभी दुलार कभी पुचकार। खैर सफर मजेदार रहा। अनादि के लिए तो ये सब कुछ नया-नया सा था।

राजगीर के कई तांगों पर राजगीर पर्यटन लिखा है। बिहार सरकार का पर्यटन विभाग तांगों को पेंट कर राजगीर पर्यटन लिखवाता है। पर हमारे तांगे वाले सिकंदर का भोलापन देखिए। वे इस डर के मारे अपने तांगों को मुफ्त के सरकारी पेंट से रंगवाना नहीं चाहते कि उन्हें डर है कि सरकार कहीं उनके तांगे पर कब्जा न कर बैठे। वाह भाई वाह।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य
(BIHAR, RAJGIR, NALANDA, TANGA RIDE )

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