Friday, June 28, 2013

आईएनएस खुखरी – जरा याद करो कुर्बानी

सुंदर दीव की सुरम्य दर्शनीय स्थलों में एक है चक्रतीर्थ बीच जहां बना है आईएनएस खुखरी (खुकरी) मेमोरियल। यहां यादें हैं एक बड़ी शहादत की। जिन भारतीय  नौ-सैनिकों ने राष्ट्र की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, उनके स्म‍रण में टीले पर भारतीय नौ-सेना  के युद्ध-पोत (FRIGATE) आईएनएस खुखरी का स्मारक बनाया गया है I टीला एवं इसके आसपास के क्षेत्र को बहुत ही खूबसूरत तरीके से विकसित कर इसे प्रकाशमान किया गया है।

पाकिस्तान से युद्ध के दौरान 9 दिसंबर 1971 भारत के लिए बड़े सदमे का दिन था। पाकिस्तान के पीएस हैंगर और भारत के आईएनएस खुखरी के बीच दीव समुद्र तट से 40 नाटिकल मील दूर पर मुकाबला हुआ। पाकिस्तानी सबमरीन की ओर से तीन तारपीडो दागे गए। इसे हमारा आईएनएस खुखरी झेल नहीं पाया। उस समय खुखरी में भारत के 18 अफसर और 176 नौसैनिक को अपनी जान गंवानी पड़ी। 

कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला की शहादत - भारतीय नौ सेना के कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला, उस समय खुखरी के कमांडिंग आफिसर थे। इस हमले के बाद खुखरी जहाज अरब सागर में डूब गया। और इस तरह सभी 18 अफसर और 176 सैनिकों ने अरब सागर में जल समाधि ले ली। वह रात पौने नौ बजे का समय था। खुखरी पर मौजूद सभी नाविक और अधिकारी रोज की तरह रेडियो का समाचार सुनने के लिए जुटे थे। जैसे रेडियो पर पहला वाक्य सुना गया – ये आकाशवाणी है अब आप... से समाचार सुनिए, तभी पहला धमाका हुआ।
कुछ खुशकिस्मत फौजी लोग थे जो खुखरी से बचकर निकलने में कामयाब रहे। पर कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला ने जहाज नहीं छोड़ा। वे चाहते तो अपनी जान बचा सकते थे। पर शायद उन्होंने सोचा कि बचकर गया तो देश को क्या जवाब दूंगा कि मैं अपने खुखरी को बचा नहीं पाया। कुछ लोग कहते हैं कि कैप्टन मुल्ला ने खुखरी पर आखिरी वक्त में आत्महत्या कर ली थी। कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला को बाद में मरणोपरांत महावीर चक्र दिया गया। खुखरी से बचे हुए जवानों में से एक ने बाद में एक पुस्तक भी लिखी।

निश्चय ही भारतीय नौ सैनिकों के लिए 1971 का वर्ष दुखद रहा, भले ही हमें पाकिस्तान से युद्ध में विजयश्री मिली लेकिन इस साल युध्द में खुखरी पर सवार 18 अधिकारियों और 176 नाविकों यानी 194 बहादुर फौजियों को देश ने खो दिया।

आईएनएस खुखरी मेमोरियल - 15 दिसंबर 1999 को उन बहादुर सैनिकों की याद में दीव के चक्रतीर्थ बीच  पर आईएनएस खुखरी का मेमोरियल बनाया गया। यहां पर खुखरी का एक माडल भी बनाया गया है।
हमारी मुलाकात रामअवध प्रजापति से होती है, वे 1965 से 1985 तक नौ सेना में रहे। वे बताते हैं कि 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के समय आईएनएस दीपक पर कराची रीजन में तैनात थे। इसी दौरान हमने रेडियो पर आईएनएस खुखरी के तारपीडो की दुखद खबर सुनी।
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि आईएनएस खुखरी धोखे का शिकार हुआ। हमारे सोनार सिस्टम ने पाकिस्तानी तारपीडो को देख लिया था पर सूचना पहुंचाने का सिस्टम काम नहीं कर सका, और देश के बहुत सारे जवानों को शहादत देनी पड़ी। बहरहाल ये बहुत ही मार्मिक कहानी है। बॉलीवुड चाहे तो कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला और उनके साथियों की शहादत पर शानदार फिल्म बना सकता है।
हमले में नष्ट एकमात्र युद्धपोत-  आईएनएस खुखरी एक ब्रिटिश टाईप 14 क्लास का युद्धपोत था। इसका निर्माण जे सेमुअल ह्वाइट ने किया था। यह 1955 का निर्मित था और 16 जुलाई 1958 को भारतीय नौ सेना में कमिशन हुआ था। इसका पेनेट नंबर एफ 149 था। इसकी लंबाई 300 फीट थी और 27.8 नाटिकल मील (51 किलोमीटर प्रति घंटे ) की अधिकतम गति से समंदर में दौड़ने में सक्षम था। भारतीय नौ सेना के इतिहास में यह एकमात्र जहाज है जो तारपीडो हमले में नष्ट हुआ। 
कृपाण कुठार और खुखरी - खुखरी के साथ नौ सेना के पास आईएनएस कृपाण और आईएनएस कुठार तीन युद्धपोत थे जिन्हें सिस्टर शिप कहा जाता था। आईएनएस खुखरी के हादसे में 61 नौ सैनिक और छह अधिकारी अपनी जान बचा पाए थे। खुखरी से बचने के बाद इन लोगों को संयोग से एक नाव मिल गई थी। 14 घंटे खुले समंदर में गुजारने के बाद उनसे संपर्क हुआ और वे लोग बचाए जा सके थे। 

कैसे पहुंचे - चक्रतीर्थ बीच दीव शहर से चार किलोमीटर की दूरी पर हैIयह बीच स्थानीय पर्यटकों के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करता है। सैलानियों के लिए यह आनन्दायक विश्राम स्थल है I इस बीच के नजदीक ही एक टीला है, जिसे सूर्यास्त दर्शन स्थल (सन सेट प्वाइंट) भी कहा जाता है।

यहां हुआ था जालंधर का वध - इस स्थल से एक रोचक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है I ऐसा माना जाता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से असुरराज जालंधर का वध किया थाI बीच के सामने समुद्र में एक छोटा-सा टीला है, जिसे भांस्लोग के नाम से जाना जाता है I कहा जाता है कि वहां पत्थर पर भगवान श्रीकृष्ण के पदचिन्ह हैं Iजब निम्न ज्वार हो तभी इस स्थान पर पहुंचा जा सकता है।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य
-         (INS KHUKRI, INDIAN NAVY, DIU, INDO PAK WAR 1971, TORPEDO )



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