Thursday, September 12, 2013

स्थानेश्वर महादेव - यहां पांडवों ने की थी शिव की पूजा

नरकातारी के दर्शन के बाद हमारे आटो रिक्शा वाले हमें लेकर पहुंचे हैं स्थानेश्वर शिव मंदिर। शिव के इस मंदिर का महाभारत के युद्ध में खास महत्व है।  वैसे तो देश भर में शिव के कई प्रसिद्ध मंदिर है। शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के अलावा भी कई शिव मंदिर हैं जिनका खास महत्व है। इन्हीं मंदिरों में एक है कुरूक्षेत्र स्थित स्थानेश्वर का शिव मंदिर।

स्थानेश्वर महादेव वह मंदिर है जहां पांडवों ने महाभारत के युद्ध से पहले अपने विजय की कामना करते हुए भगवान शिव की पूजा की थी। कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र आने वाले श्रद्धालुओं की इस धार्मिक नगरी में यात्रा का पूरा पुण्य तब तक नहीं मिलता है जब तक कि वे स्थानेश्वर मंदिर में भगवान शिव के दर्शन न कर लें। यहां आने वाले शिव भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए विधिपूर्वक अभिषेक कराते हैं।



 पुराणों के मुताबिक सकाम या फिर निष्काम भाव से स्थाणु मंदिर में प्रवेश करने वाला मनुष्य पापों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है। स्थानेश्वर मंदिर से लगा हुआ एक सुंदर सरोवर भी है। कहा जाता है इस सरोवर के जलार्पण से तमाम रोग दूर हो जाते हैं।

कहा जाता है कि इस सरोवर के जल के स्पर्श से राजा वेन के सारे कष्ट दूर हो गए थे। इस सरोवर में स्नान करने के लिए घाट बने हुए हैं। स्त्रियों के स्नान करने के लिए अलग से घाट बने हुए हैं। कुरुक्षेत्र में शिव का एक और मंदिर दुखभंजन महादेव मंदिर भी है। इस मंदिर से लगा हुआ एक सरोवर भी है। 




कैसे पहुंचे - स्थानेश्वर शिव का ये मंदिर कुरुक्षेत्र शहर में थानेश्वर से तीन किलोमीटर दूर झांसा रोड पर स्थित है। आप कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर या पैनोरमा के आसपास से यहां जाने के लिए आटो रिक्शा करके जा सकते हैं।



शक्तिपीठ है मां भद्रकाली का मंदिर – 

कान्हा और शिव की इस नगरी में शक्ति की देवी का भी मंदिर है। शिव मंदिर के दर्शन के बाद हमलोग पहुंचे हैं मां काली के मंदिर में।
 आस्था की नगरी कुरुक्षेत्र में स्थित है मां भद्रकाली का प्रसिद्ध मंदिर। भद्रकाली मां दुर्गा का ही एक रूप हैं। यह सती के 51 शक्ति पीठ में से एक  माना जाता है। यहां सालों भर हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते रहते हैं। भद्रकाली मंदिर स्थानेश्वर मंदिर से थोड़ी दूर पर ही स्थित है। कहा जाता है कि यहां भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर सती के दाहिने पाव की एड़ी कट कर गिरी थी।

इसे सिद्ध पीठ माना जाता है और यहां दशहरे पर मेला लगता है। मंदिर परिसर में कूप है जिसमें लोगो मनोकामना पूर्ति के लिए मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि यही वह जगह है जहां महाभारत के युद्ध से पूर्व अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण के कहने पर दुर्गा स्तोत्र का पाठ किया था।


गुरुद्वारा छठी पातशाही -  कुरुक्षेत्र मे कई गुरुद्वारे हैं जो अलग अलग गुरुओं से जुडे हुए हैं। यह दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के आने का प्रकरण मिलता है। एक बार वे सूर्य ग्रहण के समय आए थे और ब्रह्म सरोवर के पास निवास किया था। उनकी याद में यहां गुरुद्वारा राजघाट दसवीं पातशाही बना हुआ है।
सिखों के नौंवे गुरु तेगबहादुर जी के  कुरुक्षेत्र में आने का भी प्रकरण मिलता है। स्थानेश्वर  मंदिर से बिल्कुल सटे उनकी याद में गुरुद्वारा नौवीं पातशाही बना हुआ है। यहां बड़ी संख्या में सिख सगंत दर्शन करने आते हैं। कुरूक्षेत्र में इस स्थल पर शिव मंदिर और गुरुद्वारे का आसपास में बिल्कुल अनूठा संयोग दुर्लभ है। दोनों मिलकर यहां अदभुत सुरम्य वातावरण का संचार करते हैं।

कुरुक्षेत्र का गुरुद्वारा छठी पातशाही भी काफी प्रसिद्ध है। यह गुरु हरगोबिंद की याद में बना है। इसके परिसर में विशाल सरोवर है। यहां श्रद्धालुओं के लिए लंगर भी संचालित होता है। 

मां भद्रकाली के दर्शन के बाद हमारा अगला और आखिरी पड़ाव होगा श्री कृष्ण संग्रहालय और पैनोरमा विज्ञान केंद्र। जहां हम काफी समय देने वाले हैं तो चलिए आगे चलते हैं...
  - माधवी रंजना   ( BHADRA KALI TEMPLE, KURUKSHETRA )

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