Tuesday, September 10, 2013

स्थानेश्वर महादेव - यहां पांडवों ने की थी शिव की पूजा

वैसे तो देश भर में शिव के कई प्रसिद्ध मंदिर है। शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के अलावा भी कई शिव मंदिर हैं जिनका खास महत्व है। इन्हीं मंदिरों में एक है कुरूक्षेत्र स्थित स्थानेश्वर का शिव मंदिर।

स्थानेश्वर महादेव वह मंदिर है जहां पांडवों ने महाभारत के युद्ध से पहले अपने विजय की कामना करते हुए भगवान शिव की पूजा की थी। कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र आने वाले श्रद्धालुओं की इस धार्मिक नगरी में यात्रा का पूरा पुण्य तब तक नहीं मिलता है जब तक कि वे स्थानेश्वर मंदिर में भगवान शिव के दर्शन न कर लें। यहां आने वाले शिव भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए विधिपूर्वक अभिषेक कराते हैं। पुराणों के मुताबिक सकाम या फिर निष्काम भाव से स्थाणु मंदिर में प्रवेश करने वाला मनुष्य पापों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है।

स्थानेश्वर मंदिर से लगा हुआ एक सुंदर सरोवर भी है। कहा जाता है इस सरोवर के जलार्पण से तमाम रोग दूर हो जाते हैं। कहा जाता है कि इस सरोवर के जल के स्पर्श से राजा वेन के सारे कष्ट दूर हो गए थे। इस सरोवर में स्नान करने के लिए घाट बने हुए हैं। स्त्रियों के स्नान करने के लिए अलग से घाट बने हुए हैं।
यहां सिखों के नौंवे गुरु तेगबहादुर के आने का भी प्रकरण मिलता है। इस मंदिर से बिल्कुल सटे उनकी याद में गुरुद्वारा नवीं पातशाही बना हुआ है। कुरूक्षेत्र में इस स्थल पर शिव मंदिर और गुरुद्वारे का अनूठा संयोग दुर्लभ है। दोनों मिलकर यहां अदभुत सुरम्य वातावरण का संचार करते हैं।

कैसे पहुंचे - ये मंदिर कुरुक्षेत्र शहर में थानेश्वर से तीन किलोमीटर दूर झांसा रोड पर स्थित है। आप कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर या पैनोरमा के आसपास से यहां जाने के लिए आटो रिक्शा करके जा सकते हैं।


भद्रकाली मंदिर – 
कुरुक्षेत्र का एक और प्रसिद्ध मंदिर है मां भद्रकाली का मंदिर। यह सती के 51 शक्ति पीठ में से एक है। भद्काली मंदिर स्थानेश्वर मंदिर से थोड़ी दूर पर ही स्थित है। कहा जाता है कि यहां भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर सती के दाहिने पाव की एड़ी कट कर गिरी थी।

 इसे सिद्ध पीठ माना जाता है और यहां दशहरे पर मेला लगता है। मंदिर परिसर में कूप है जिसमें लोगो मनोकामना पूर्ति के लिए मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि यही वह जगह है जहां महाभारत के युद्ध से पूर्व अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण के कहने पर दुर्गा स्तोत्र का पाठ किया था।

-    माधवी रंजना 

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