Thursday, September 5, 2013

आओ चलें महाभारत के शहर - कुरुक्षेत्र

दिल्ली के आसपास एक दिन में कहीं घूमने जाना हो तो कुरुक्षेत्र अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां महाभारत काल से जुड़े कई मंदिर और दूसरे दर्शनीय स्थल हैं। आप सुबह जाकर शाम तक लौटकर भी सकते हैं। दिल्ली से कुरुक्षेत्र की दूरी 156 किलोमीटर है। बसें 24 घंटे मिलती रहती हैं। अंबाला की ओर जाने वाली बसों से पिपली में उतरें। पिपली से आप सीधा पहुंचे ब्रह्म सरोवर।

ब्रह्मसरोवर कुरुक्षेत्र का प्रमुख ऐतिहासिक सरोवर है। इसकी लंबाई 3600 फीट और चौड़ाई 1200 फीट है। सरोवर के चारों ओर यात्रियों के विश्राम के लिए बरामदे बने हैं। कम पानी में स्नान के लिए रेलिंग बनी है। महिलाओं के स्नान के लिए कई घाट हैं। जगह जगह शौचालय भी बने हैं। ब्रह्म सरोवर को सरस्वती फीडर से सदैव पानी मिलता रहता है। सरोवर में 15 फीट गहरा पानी हमेशा रहता है। देश के दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे गुलजारीलाल नंदा का सहयोग से ब्रह्म सरोवर का कायाकल्प किया गया। ब्रह्म सरोवर के बीचों बीच शिव का प्रचीन सर्वेश्वर महादेव मंदिर है। इसे बताते हैं कि 17वीं सदी में बाबा श्रवणनाथ ने बनवाया था। सरोवर के बीच में द्रौपदी कूप मंदिर भी है। कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद द्रौपदी ने यहीं अपने खून से सने बाल धोए थे।
सरोवर के मध्य में 2008 में रथ पर सवार अर्जुन और श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमा है। चांदनी रात में ब्रह्म सरोवर की आभा देखते ही बनती है।

ब्रह्म सरोवर के द्वार के पास ही बिड़ला मंदिर है। यहां श्रीकृष्ण की मनोहारी मूर्तियां हैं। ब्रह्म सरोवर से थोड़ी दूरी पर ही सन्नहित सरोवर है। यहां लोग  ग्रहण काल में स्नान के लिए आते हैं। हर अमावस को भी यहां श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं। कहा जाता है यहां युद्धिष्ठिर ने अपने पितरों का पिंडदान किया था। इसलिए यहां पिंडदान की पंरपरा है। जो लोग फल्गू तट पर पिंडदान के लिए गया नहीं जा पाते वे यहां आते हैं। यह भी कहा जाता है कि इसी  सरोवर के तट पर कर्ण ने अपने कवच कुंडल ब्राह्रमणों को दान किए थे। सन्नहित सरोवर के ठीक सामने प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर और छठी पातशाही गुरुद्वारा है।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य


No comments:

Post a Comment