Saturday, September 7, 2013

ज्योतिसर – यहां श्रीकृष्ण ने दिया गीता का उपदेश

कुरुक्षेत्र शहर से आठ किलोमीटर आगे पेहवा रोड पर स्थित है ज्योतिसर। ज्योतिसर वही जगह है जहां पर महाभारत के युद्ध से पहले  श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का संदेश दिया था। उन्होने अर्जुन को गीता के 18 अध्याय सुनाने के बाद युद्ध के लिए तैयार किया था। ब्रह्म सरोवर से ज्योतिसर आटो रिक्शा या फिर पेहवा जाने वाली लोकल बस से जाया जा सकता है। रास्ते में कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय का परिसर और कल्पना चावला तारामंडल आता है।

ज्योतिसर में पुराना वट वृक्ष है। कहा जाता है इसी पेड़ के नीचे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के 18 अध्याय सुनाए थे, जब अर्जुन ने अपने ही बंधु बांधवों के खिलाफ शस्त्र उठाने से इनकार कर दिया था। वट वृक्ष ही गीता की घटना का एक मात्र साक्षी है। यहां आने वाले श्रद्धालु इसी वृक्ष के आगे सिर नवाते हैं। ज्योतिसर नाम इसलिए कि यहां एक बड़ा सरोवर है जिसे ज्योति सर कहते हैं। ज्योति सर यानी ज्ञान का सरोवर। भला गीता के ज्ञान से बड़ा ज्ञान क्या हो सकता है। हालांकि कुछ लोग इसे ज्योतिश्वर महादेव भी कहते हैं। कहा जाता हैं यहां कभी एक प्रचीन शिव मंदिर हुआ करता था। 

आदि शंकराचार्य भी यहां गीता के बारे में चिंतन मनन के लिए पधारे थे। ज्योतिसर के परिसर में एक प्राचीन दिखाई देता शिवमंदिर कहा जाता है कि ये मंदिर कश्मीर के राजा ने बनवाया था। परिसर में कई और छोटे छोटे मंदिर हैं। ज्योतिसर में लंबे समय से लाइट एंड साउंड शो चलाया जा रहा था जिसे अब वट वृक्ष को संरक्षित रखने के लिए बंद कर दिया गया है।

कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य के प्रयासों से वर्ष 1967 में अक्षय वृक्ष के निकट एक सुंदर कृष्ण-अर्जुन रथ का निर्माण किया गया तथा साथ ही शंकराचार्य मंदिर का भी निर्माण हुआ।   इस तीर्थ की व्यवस्था कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के हाथों में है। मार्गशीर्ष मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात् श्री गीता जयन्ती के दिन कुरुक्षेत्र उत्सव का आयोजन किया जाता है। 


ज्योतिसर का पवित्र तीर्थ स्थान सरस्वती नदी के किनारे है। पर ये नदी अब लुप्त प्राय है। कुरुक्षेत्र  के धार्मिक महत्त्व को देखते हुए यहां पर श्री अक्षरधाम और तिरुपति बाला जी का मंदिर बनाया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ धार्मिक पर्यटक भी कुरुक्षेत्र आएंगे। 


1960 में दरभंगा महाराज ने इस वटवृक्ष के आसपास पक्का चबूतरा बनवा दिया। हांलाकि अब इस पक्के चबूतरे के कारण पेड़ पर संकट आ गया है। पेड़ की जड़ों को आगे फैलने की जगह नहीं मिल पा रही है।
 पर्यावरणविद अब इस चबूतरे को हटाने की बात कर रहे हैं ताकि इस वृक्ष को जिंदा रखा जा सके। यहां एक छोटा सा कृष्ण मंदिर भी बना हुआ है। यहां का सरवोर अति पवित्र माना जाता है। यहां भी स्नान करने के लिए पक्के घाट बने हुए हैं।
ज्योतिसर का वातावरण समग्र में बहुत ही रमणीक है। यहां हरियाली विराजती है। कमल पुष्पों को निहारते हुए बड़ा भला लगता है। ज्योतिसर के इस सरवोर में आजकल खिलते हैं कमल के बड़े बड़े फूल। यहां से आप फूल खरीद कर ले जा भी सकते हैं।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य


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