Friday, August 16, 2013

कैसा हो हमारा सुबह का नास्ता

इडली - बेहतरीन नास्ता 
भारत विविधताओं का देश है। यहां हर प्रांत में सुबह भी अलग अलग तरीके से होती है। अब आप सुबह के नास्ते को ही लिजिए तो पंजाब में कुछ और बात है बिहार में कुछ और तो दक्षिण भारत में कुछ और। हम पंजाब की बात करें तो यहां के लोग नास्ते में दही और पराठां लेते हैं। पंजाबी पराठे की देश भर में धूम है। पंजाब का पराठा आकार में बड़ा होता है। आम आदमी दो पराठे ले ले तो उसका पेट भर जाए। पराठे के साथ पंजाबी लोग इसके उपर से मक्खन डालना नहीं भूलते। हालांकि पराठा पहले से ही घी में बना होता है। पराठे में भी कई प्रकार हैं। आलू पराठा,गोभी पराठा, पनीर पराठा आदि आमतौर पर पंजाबी नास्ता हेवी होता है और दोपहर का मुख्य खाना हल्का फुल्का। यानी सुबह में ही खाकर फिट हो जाते हैं पंजाबी।

बिहार के लिट्टी चोखा का जवाब नहीं। 
अब अगर उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ें तो यहां का नास्ता आमतौर कचौड़ी और जलेबी का होता है। इसके साथ चने की घुघनी भी हो सकती है। लखनऊ शहर की बात ही निराली है। यहां नास्ते में अंकुरित अनाज लेने की परंपरा है। लखनऊ की सुबह आपको रेहड़ी पर अंकुरित मूंग, चना आदि का मिस्रण देखने के मिल जाएगा। अगर गरमी के दिन हों तो सुबह सुबह मट्ठा पीजिए और दिन भर मस्त रहिए।

अब बिहार चलते हैं। यहां भी पूड़ी और जलेबी का प्रभाव है। पर उत्तर बिहार में खासकर मिथिला क्षेत्र में नास्ते में चूड़ा-दही खाने का रिवाज है। यहां घर क्या बाजार में भी आपको चूड़ा दही आसानी से मिल जाएगा। दही तो शुद्ध होता ही ही चूड़ा चूंकि चावल के दाने से बनता है इसलिए इसमें कोई मिलावट की संभावना नहीं रहती। इसके साथ गुड़ और कोई सब्जी भी ली जा सकती है। जिन लोगों का पेट कमजोर होता है उनके लिए भी यह नास्ता वाजिब होता है। 100 ग्राम चूड़ा और 200 ग्राम दही के साथ नास्ता मुफिद माना जाता है।
जलेबी कचौडी के साथ हो तो बात ही क्या....

वैसे उत्तर बिहार में कई किलो तक खाने वाले लोग भी मौजूद हैं। बिहार में गरीब लोग चने का सत्तू भी नास्ते में लेते हैं। यह सत्तू सिर्फ नास्ते में ही नहीं बल्कि कभी भी कहीं भी खाया जा सकता है। इसमें भी किसी तरह के मिलावट की संभवना नहीं रहती है। दक्षिण बिहार में के नास्ते में लिट्टी चोखा का चलन है।

 लिट्टी जिसे राजस्थान में बाटी कहते हैं को कोएले या गोबर की आग पर पकाया जाता है। इसके साथ बैंगन व आलू का भरता होता है। लिट्टी को घी में डुबा कर खाया जाए तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। बिहार की सड़कों पर लिट्टी चोखा महज तीन रूपए में दो पीस उपलब्ध है। यह दक्षिण भारत के सुबह के नास्ते इडली की तरह ही सस्ता है। जैसे दक्षिण भारतीय लोगों का लोकप्रिय नास्ता इडली सांभर भी दक्षिण में दो से तीन रूपए प्रति प्लेट से मिलना आरंभ हो जाता है। हालांकि यही इडली उत्तर भारत के रेस्टोरेंट में महंगी मिलती है। इडली सांभर भी सुपाच्य नास्ता माना जाता है। दक्षिण भारतीय नास्ते में दो या उससे ज्यादा इडली भी सुबह सुबह खा लेते हैं।
पोहा का अपना अलग स्वाद है....

अगर आप  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल या इंदौर में हैं तो नास्ते में पोहा लेना न भूलें। पोहा चूड़ा का ही एक रूप है। इसमें नमक और अन्य थोड़े मसाले मिलाए जाते हैं।मध्यप्रदेश में तो लगभग हर खाने की दूकान पर पोहा जरूर मिल जायेगा. इसकी खूबी है कि यह बहुत ही कम समय में आसानी से बनाया जा सकता है। पोहा को के अलग-अलग तरीकों से बनाया जा सकता है। कुछ लोग एकदम सूखा पोहा पसंद करते हैं तो कुछ और लोग इसे थोड़ा गला कर बनाते है। जहां कुछ लोग नीबू का प्रयोग देते हैं वहीं कुछ और लोग टमाटर का प्रयोग करते हैं। पोहा खाना स्तनपान कराने वाली महिलाओं और गर्भवती महिलांओं के लिए सबसे लाभदायक होता है क्योंकि इस समय उन्हें आयरन की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। 

वहीं जब गुजरात महाराष्ट्र की ओर बढ़ें तो नास्ते में ढोकला मिलता है। ढोकला भी अपना अलग स्वाद है। गुजरात में थेपला भी नास्ते के तौर पर काफी लोकप्रिय है।बेसन ढोकला गुजरात का बहुत ही विख्यात नाश्ता है। यह गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में भी बड़े शौक से खाया जाता है। ढोकला बहुत हल्का रहता है। यह एक फटाफट बनने वाला नाश्ता है और इसको बनाना भी बहुत आसान होता है।इसे भाप में पकाने के कारण तेल तो बहुत ही कम प्रयोग होता है. यदि आप तेल से बनी चीजों से परेहज करते हों तो इसे अवश्य खाएं। सूजी का ढोकला अगर धनिया या फिर पुदीने की चटनी के साथ सर्व किया जाए तो नाश्ते का मजा बढ़ जाता है। 

थोड़ा आगे बांबे की ओर बढे तो बड़ा पाव का मौसम आ जाता है। बड़ा पाव मराठी लोगों की पहचान बन चुकी है। मुंबई और आसपास के हर रेलवे स्टेशन पर बड़ा पाव मिल जाता है। नारियल और गुड़ की चटनी के साथ बड़ा पाव खाने में जो मजा है वह किसी व्यंजन से बेहतर है। कुछ लोग इसके साथ हरी मिर्च भी खाते हैं।  महाराष्ट्र में बड़ा पाव गरीबों का पेट भरता है। पर इसे अमीर भी बड़े चाव से खाते हैं। अब बड़ा महाराष्ट्र की सीमा को पार कर दिल्ली में भी मिलने लगा है।

अगर हम यो कहें कि देश भर में नास्ते का स्वाद भी विविधताओं से भरा है तो गलत नहीं होगा। पंजाबी पराठा कोलेस्ट्राल और हृदय रोग बढ़ाने वाला है पर पोहा, इडली जैसी चीजें पेट के लिए व सेहत के लिए बहुत अच्छी हैं। जब आप देश भ्रमण पर निकलें तो अलग अलग इलाके के खाने पीने का का स्वाद जरूर लें। साथ ही अपनी सेहत का भी ख्याल रखें।
-         माधवी रंजना




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