Monday, August 5, 2013

हुसैनीवाला - यहां घड़ी अपना समय बदल लेती है...

हुसैनीवाला में भारत पाकिस्तान सीमा पर दो बड़े द्वार बने हैं, एक भारत का दूसरा पाकिस्तान का। भारत की सीमा की तरफ गांधी जी की तस्वीर लगी है। सीमा पर लगी पाकिस्तान की घड़ी हमारी घड़ी से आधे घंटे आगे का समय बताती है। 

वहीं पाकिस्तान के द्वार पर कायदे आजम अली मुहम्मद जिन्ना की तस्वीर लगी है। एक बड़े तोरण द्वार पर बड़े अक्षरों में लिखा है अल्लाह। उसके नीचे कुछ अच्छी बातें लिखी हैं जिनका पाकिस्तान कभी पालन नहीं करता।  सीमा पर आकर लोगों में मन में तरह-तरह के भाव आते हैं। कुछ अच्छे कुछ बुरे। मुझे हमेशा सीमा पर आकर लगता है ये सीमाएं नहीं होतीं तो कितना अच्छा होता

पाकिस्तान की सीमा हुसैनी वाला फिरोजपुर शहर से महज सात किलोमीटर है। हुसैनीवाला में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की समाधि है। यहां शुक्रवार और रविवार को खास तौर पर सैलानियों की भीड़ होती है। हमलोग तीनों शहीदों की समाधि पर मत्था टेकने पहुंचे। यहां हर साल मार्च में शहीदी दिवस के मौके पर बड़ा जलसा होता है। मेला लगता है। दूर दूर से लोग पहुंचते हैं।
वाघा बार्डर की तरह यहां भी रोज शाम को दोनों देशों के सेनाओं की रीट्रीट होती है। इसके बाद झंडा उतारने की रस्म होती है। हालांकि वाघा बार्डर से पाकिस्तान के साथ व्यापार होता है। पर हुसैनीवाला सीमा लंबे समय से बंद है। कहा जाता है कि शहीदों समाधि भारत विभाजन के समय पाकिस्तान में पड़ती थी। पर सरदार स्वर्ण सिंह के प्रयास से फजिल्ला क्षेत्र की कुछ जमीन पाकिस्तान को देकर हुसैनीवाला इलाके को पाकिस्तान से वापस लिया गया। 


द एंड ऑफ नार्दर्न रेलवे - यहां खत्म हो जाती है भारतीय रेल 

हुसैनीवाला से होकर एक समय में रेल लाइन लाहौर तक जाती थी। पर पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के दौरान ये रेल मार्ग बंद कर दियागया। कभी यहां सतलुज दरिया पर बने रेल पुल को भी तोड़ दिया गया है। अब फिरोजपुर से हुसैनीवाला में ही आकर रेल लाइन खत्म हो जाती है। रेलवे ट्रैक को ब्लॉक कर यहां लिखा गया है- द एंड ऑफ नार्दर्न रेलवे। वैसे यहां से पाकिस्तान का निकटतम बाजार गंडसिंह वाला है।


दिन रात मुस्तैद रहते हैं जवान  ---- हम अपनी एसयूवी से जा रहे हैं। सीमा पर पहुंचने के रास्ते में कई चेक पोस्ट आते हैं। बीएसएफ की एक गाड़ी हमे मार्ग दिखाती हुई सीमा तक ले गई। बीएसएफ के इंस्पेक्टर अनूप सिंह हमें दिन रात सेना की चौकसी के बारे में बताते रहे। यहां भारत पाक सीमा पर तीन लाइनों में तार की बाड़ लगाई गई है। इसमें रात में बिजली का करंट प्रवाहित किया जाता है। कोई अगर घुसपैठ की कोशिश भी करेगा तो जिंदा नहीं बचेगा।

जनवरी 2000 की सुबह हुसैनीवाला सीमा पर मैं । 
भारत पाक सीमा का काम करती है सतुलज दरिया। नदी की धारा के बीच से भी तार के बाड़ लगाए गए हैं ताकि कोई नदी के मार्ग से भी घुसपैठ नहीं कर सके। सीमा पर रात भर जवान हर थोड़ी दूर पर पहरा दे रहे होते हैं। जमीन के नीचे बंकर बनाकर यहां बीएसएफ के जवान रहते हैं।
जिंदगी बड़ी चुनौतीपूर्ण है यहां। सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ बैठकर हमने चाय की चुस्की ली। उन्होंने बताया कि हर साल मार्च में शहीदी दिवस पर हुसैनीवाला में बड़ा मेला लगता है। हमने मन ही मन उनकी देश की सेवा को सलाम किया और अगले सफर की ओर चल पड़े।
-      ----- विद्युत प्रकाश मौर्य, लिखें - vidyutp@gmail.com पर

 ( HUSAINWALA, FIROZPUR, PUNJAB, BHAGAT SINGH, SUKHDEV, RAJGURU, BSF ) 


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