Tuesday, August 6, 2013

ये संतरा नहीं कीनू है...

फिरोजपुर के बाद हमारा अगला पड़ाव था फजिल्लका। पंजाब का सीमांत शहर अब जिला बन चुका है। फजिल्लका में हिंदी का प्रभाव ज्यादा है। शहर का बाजार सुरूचिपूर्ण और सुंदर है। पाकिस्तान की सीमा यहां से महज 7 किलोमीटर है। कीनू आसपास की महत्वपूर्ण पैदावार है। हालांकि मैं इस फल को जगह जगह खरीदकर खा रहा था, और मैं इसे संतरा समझने की गलती कर बैठा था। बाहर से यह बिल्कुल संतरे जैसा ही दिखाई देता है। वास्तव में यह संतरा और माल्टा की संकर प्रजाति है। कीनू का राज खोला सुबह-सुबह राजस्थान पत्रिका के संवाददाता ने। कीनू संतरे से ज्यादा नारंगी और आकार में अपेक्षाकृत बड़ा होता है। इस क्षेत्र में माल्टा और कीनू के बड़े-बड़े बाग हैं।


कीनू के फायदे - कीनू संतरे जैसा दिखाई जरूर देता है पर आकार में थोड़ा बड़ा होता है। इसमें विटामिन सी एवं शर्करा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह अत्यंत स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्य वर्धक फल है।
शोध में पाया कि कीनू मस्तिष्क आघात के जोखिम को कम कर सकता हैं। यह ऐसा फल है जो कि बहुत अच्छा एंटीसेप्टिक होता है। इसके तेल के इस्तेमाल करने से भी काफी फायदे होते हैं। यह पेट के लिए काफी अच्छा होता है। यह पाचन तंत्र को सही रखता है। इसके अलावा यह ब्लड  सर्कुलेशन को भी ठीक रखता है।

यहां अमर उजाला के प्रभारी संजय झा ने बताया कि फजिल्लका के आसपास की सीमा तस्करी के लिहाज से काफी संवेदनशील है। इसके बाद हमे जाना था अबोहर। कुहरे में हमारी गाड़ी 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल पा रही थी। हम कुछ घंटे में पहुंचे अबोहर। पंजाब का एक बड़ा व्यापारिक शहर। हमने यहां दिल्ली के मॉल जैसे बड़े बड़े शो रूम देखे। एक बाजार में तो जूतों की अनगिनत दुकानें थीं। अबोहर और फजिल्लका दोनों पाकिस्तान की सीमा से लगे हैं। हरियाणा का जिला सिरसा इनका पड़ोसी है तो राजस्थान का श्रीगंगानगर अबोहर से महज 40 किलोमीटर दूर। अबोहर के बाजार में कुछ बड़ी-बड़ी दुकानें हैं। शहरों के मॉल जैसी।
अबोहर में वायुसेना का केंद्र है जबकि पास में काले हिरणों की सेंचुरी भी है। हमारी टीम ने रात्रि विश्राम अबोहर के होटल में किया। हमारे अबोहर के तत्कालीन प्रभारी श्री विनोद बंधु किसी काम से बाहर गए थे सो मुलाकात नहीं हो सकी।

मुक्तसर गुरुद्वारा। Cor. - www.muktsar.nic.in
मुक्तसर का गुरुद्वारा 

हमारा अगला पड़ाव था मुक्तसर जिला। मुक्तसर में भी सरवोर के बीच में विशाल गुरुद्वारा है। मुक्तसर यानी मुक्त सरोवर यहां 40 सिरों को मुक्ति प्राप्त हुई थी इसलिए सिख पंथ में ये गुरुद्वारा काफी महत्वपूर्ण है। लोहड़ी के समय यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। इस मेले में राजनीतिक दल अपने मंच सजाते हैं। इन मंचों से पंजाब की भावी राजनीति तय होती है। मुक्तसर जिले से पंजाब के कई बड़े राजनेता प्रतिनिधित्व करते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बराड़ और उनके बेटे जगमीत बराड़, प्रकाश सिंह बादल आदि। पर ये जिला अपेक्षाकृत पिछड़ा हुआ है। वैसे मुक्तसर अपने मुक्तसरी कुरता पायजामा के लिए भी प्रसिद्ध है। हमारी वापसी कोटकपुरा के रास्ते हुई। 

कोटकपुरा रेलवे का जंक्शन है। पर यह शहर प्रसिद्ध है अपने ढोडा बर्फी के लिए। कोटकपुरा को ढोडा स्वीट्स पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली तक अपने स्वाद के लिए जाना जाता है। तीन दिनों के सफर के बाद हमारी वापसी भी धुंध के कारण मुश्किलों भरी रही। रात को दस बजे हमलोग मोगा से जालंधर के लिए चले पर शहर के बाहर आए चौराहे पर  हाईवे पर रास्ता नहीं सूझा। ड्राइवर भी कुहरे में घबरा गया था। हमने वापस लौट कर मोगा में ही रात्रि विश्राम का फैसला लिया। फिर सत्येन ओझा को फोन किया गया।  उनके इंतजाम के बाद हमें मोगा में ही होटल में रुकना पड़ा। रात को हमने अपने समाचार संपादक श्री शिव कुमार विवेक जी फोन किया और अपनी समस्या बताई। उन्हें बताया कि हम एक दिन बाद सकुशल वापस जालंधर दफ्तर पहुंच रहे हैं।

इस यात्रा के लिए हमलोग अपने पंजाब के संपादक श्री रामेश्वर पांडे और अमर उजाला के मालिकों में से एक अजय अग्रवाल का खास तौर पर धन्यवाद देना चाहेंगे। उन्होेंने पंजाब को करीब से समझने के लिए हमें इस यात्रा पर दफ्तर के खर्च पर भेजा था। इस यात्रा में सर्वश्री अजय शुक्ला, विश्वजीत भट्टाचार्य, धर्मेंद्र प्रताप सिंह और  नवीन श्रीवास्तव सहयात्री थे। 

(  यात्रा काल  - जनवरी 2000) 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( (ORANGE, KINNOW, MUKTSAR, FAJILLA, FARIDKOT, ABOHAR, KOTKAPURA, PUNJAB, 




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