Wednesday, August 14, 2013

कितने की आती है खाने की थाली

पेट की भूख मिटाने के लिए थाली का गणित क्या है। एक मध्यमवर्गीय इन्सान का पेट कितने रूपये में भर सकता है। इस पर इन दिनों खूब चर्चा हुई। लेकिन क्या जनता के नुमाइंदे इन नेताओं को सच्चाई पता है।
कोई 1980 का साल रहा होगा। तब हम वैशाली जिले के कन्हौली नामक गांव में रहते थे। हमारे घर जलवान की लकड़ी काटने के लिए एक मजदूर बुलाया गया। दिन भर की मजदूरी के अलावे दोपहर का खाना उसे दिया जाना था। तय था कि वह खाने में चने का सत्तू खाएगा। शारीरिक श्रम करने वाला वह मजदूर एक किलो चने का सत्तू खा गया। तब सत्तू 8 रुपये किलो था। आज 80 रुपये किलो है। कहने का मतलब है कि जो लोग शारीरिक श्रम करते हैं उनको मानसिक श्रम करने वालों की तुलना में ज्यादा भोजन की जरूरत होती है।
आज साल 2013 में हमारे देश के तीन अलग अलग नेताओं ने ये फरमाया है कि दिल्ली में 5 रुपये में और मुंबई में 12 रुपये में तो कश्मीर में 1 रुपये में पेट भरा जा सकता है। ये तीनों जानकारियां सच्चाई से परे है। ये इस ओर भी संकेत करती हैं कि हमारे ये राजनेता आम आदमी के रोटी के लिए रोज के संघर्ष और दर्द से कितने दूर हैं।

अगर हम दिल्ली के बात करें फुटपाथ पर चलने वालों ढाबों या ठेले पर लगने वाले भोजनालयों में भी अब 15 रुपये में भी पेट नहीं भरा जा सकता। दिल्ली सरकार ने कुछ एनजीओ की सहायता से ठेले पर भोजनालय शुरू कराए हैं वहां भी 15 रुपये में लिमिटेड भोजन मिलता है। आज की तारीख में आप फुटपाथ पर चलने वाले भोजनालयों में 30 रुपये में लिमिटेड थाली खा सकते हैं। भरपेट खाने के लिए 60 से 70 रुपये चाहिए।

मैं 2012-13 में कुछ राज्यों में भ्रमण के दौरान के अपने अनुभवों के आधार पर कह सकता हूं कि भरपेट खाना 50 रुपये या उसके ऊपर में ही कहीं मिल सकता है। आप कोच्चि (केरल) में 50 रुपये, तिरुवनंतपुरम में 70 रुपये,  कन्याकुमारी में 70 रुपये, मदुराई में 60 रुपये, रामेश्वरम में 60 रुपये में भरपेट खा सकते हैं। मैसूर में 50 से 70 रुपये में भरपेट खाया जा सकता है। इसी तरह गुजरात के शहरों पोरबंदर, द्वारका में 70 रुपये में तो अहमदाबाद में 100 रुपये में भरपेट खा सकते हैं। ये सारी दरें मध्यमवर्गीय रेस्टोरेंट्स की हैं। मुंबई में आपको 40 से 70 रुपये में मिनी मील ही नसीब हो सकता है। भरपेट खाने के लिए 100 से ज्यादा रुपये मुंबई के किसी भी कोने में खर्च करने पड़ेंगे।

मैं 1995 में जब दिल्ली आया था तब 12 से 15 रुपये में ढाबे में भोजन किया जा सकता था, पर आज 2013 में 40 से 60 रुपये देने पड़ते हैं। दिल्ली में आप आंध्र भवन की कैंटीन में 100 रुपये में भरपेट खा सकते हैं। शायद दिल्ली में भरपेट खाने की इससे कोई सस्ती जगह नहीं है। अलग अलग संस्थाओं द्वारा चलाए जाने वाले सब्सिडी युक्त कैंटीनों में भी अब आपको 40 से 50 रुपये के आसपास लिमिटेड थाली ही मिल सकती है। हमारे सम्मानित नेतागण अब आम आदमी की तरह सड़कों और गलियों में नहीं घूमते इसलिए शायद उन्हें थाली का गणित नहीं पता।

-    विद्युत प्रकाश vidyutp@gmail.com  
 ( THALI FOOD, CANTEEN, RICE AND DAL ROTI ) 

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