Thursday, August 1, 2013

मंदिरों का शहर उज्जैन

मालवा प्रांत का शहर उज्जैन मंदिरों का शहर है। महाकाल के अलावा यहां कई सौ मंदिर हैं। हालांकि मैं एक बार पहले भी उज्जैन जा चुका था, पर मुझे ये याद नहीं था कि उज्जैन में इतने मंदिर हैं कि उनके दर्शन के लिए दिन भर की बस सेवा चलती है। आप उज्जैन दर्शन बस सेवा से आसानी से इन मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। आप उज्जैन में ही रुक कर ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। यहां से ओंकारेश्वर के लिए भी दैनिक बस सेवा संचालित होती है। इन बस सेवाओं के दफ्तर महाकाल मंदिर के पास हैं। वैसे आटोरिक्शा बुक करके भी उज्जैन शहर के मंदिरों के दर्शन किए जा सकते हैं।  

 इतिहास में उज्जैन को अवंतिका, अमरावती, सुवर्णगंगा, कुशस्थली, विशाला, उज्जयनी जैसे नामों से जाना जाता था। प्रचीन काल में यहां संदीपनी ऋषि का आश्रम था जहां श्रीकृष्ण की पाठशाला थी। मौर्य सम्राट के शासक अशोक महान के पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा की जन्मस्थली है उज्जैन। उज्जैन महाराजा विक्रमादित्य की नगरी है।
उज्जैन में क्षिप्रा नदी का तट, रामघाट। 
राजा विक्रमादित्य के दरबार में नौ रत्न थे। महाकवि कालिदास, वैद्य धन्वंतरि, साहित्यकार अमर सिंह, न्याय दर्शन ज्ञाता क्षपणक, कवि वररुचि, नीति शास्त्री वेताल, गणितज्ञ वराहमिहिर, ज्योतिषी शंकु और विद्वान कवि घटकर्पर नौ रत्नों में शुमार थे। उज्जैन शहर को क्षिप्रा नदी तीन तरफ से घेरती है। शहर में क्षिप्रा नदी के तट मनोरम हैं। यहां हर 12 साल बाद सिंहस्थ कुंभ लगता है। चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन सिंहस्थ कुंभ का स्नान आरंभ होता है।
उज्जैन नगर की आबादी 10 लाख को पार कर चुकी है। अगर उज्जैन शहर के तमाम मंदिरों का दर्शन करना चाहते हैं तो महाकाल मंदिर के पास से उज्जैन दर्शन बस सेवा चलती है। इसके अलावा आप आटो रिक्शा बुक करके भी उज्जैन के प्रमुख मंदिरों का दर्शन कर सकते हैं।


महाकाल मंदिर के ठीक बगल में बड़ा गणेश मंदिर हैं। इससे थोड़ा आगे बढ़ें तो हरसिद्धि माता का मंदिर है। देवी का यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। इसके पास ही चार धाम मंदिर बना है। इसे साध्वी ऋतंभरा के गुरु ने बनवाया है। मंदिर में सुंदर बिजली चलित झांकियां भी हैं। इस मंदिर में भक्तों के लिए रहने की व्यवस्था भी है। ये सभी मंदिर क्षिप्रा तट पर हैं। क्षिप्रा तट पर रामघाट का नजारा मनोरम है। यहां एक संतोषी माता का मंदिर भी है। फिल्म जय संतोषी मां की शूटिंग इसी मंदिर में हुई थी। शहर से पांच किलोमीटर बाहर चिंतामणि गणेश का मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण परमार राजाओं ने किया था। दूर दूर से लोग इस मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। कहा जाता है गणेश जी हर तरह की चिंता को हर लेते हैं।
सवाई जय सिंह की वेधशाला 

उज्जैन में सवाई जय सिंह द्वारा बनाई गई वेधशाला भी है। मौसम की जानकारी के लिए उन्होंने दिल्ली, जयपुर, मथुरा वाराणसी और उज्जैन में वेधशालाएं बनवाई थीं। इस वेधशाला में सूर्य घड़ी, सम्राट यंत्र, नाड़ी वलय यंत्र, दीगांश यंत्र, भित्ति यंत्र और शंकु यंत्र है। उज्जैन में काल भैरव समेत आठ भैरव मंदिर हैं। यहां भैरव अष्टमी पर मेला लगता है और काल भैरव की सवारी निकाली जाती है।


-    विद्युत प्रकाश मौर्य 
  
( TEMPLE CITY, UJJAIN, GANESH, KAL BHARAV, KSHIPRA RIVER ) 

  

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