Wednesday, August 28, 2013

और तिरंगा लिए शहीद हो गए गुलाब सिंह लोधी

लखनऊ शहर का दिल अमीनाबाद और इसके ठीक बीच में स्थित ऐतिहासिक झंडेवाला पार्क। पार्क में शहीद गुलाब सिंह लोधी की की झंडा लिए विशालकाय प्रतिमा लगी है लेकिन इसके आसपास गंदगी का आलम है।

पार्क में हरियाली का नामोनिशान नहीं है। दरवाजे के आसापास गंदगी का आलम है। तमाम ऐतिहासिक सभाओं का साक्षी पार्क नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है।
अगर इस पार्क के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए तो अमीनाबाद में शापिंग करने आने वालों के लिए थोड़ा वक्त गुजारने के लिए और भी अच्छी जगह हो सकती है।लखनऊ को तहजीब, नजाकत और नफासत के लिए जाना जाता है। इसे बागों और स्मारकों का शहर भी कहा जाता है। लेकिन झंडेवाला पार्क अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। उसे सरकार से भी शिकायत है और आसपास के लोगों से भी। लखनऊ शहर में अंबडेकर पार्क जैसे नए स्मारक बने हैं पर जितना धन उन बड़े पार्कों की ओर बहा है उसका थोड़ा सा हिस्सा इस पार्क की ओर आया होता तो हालात सुधर सकते हैं।

और शहीद हो गए गुलाब सिंह लोधी-
अगस्त 1933 को क्रांतिकारी गुलाब सिंह लोधी भी उस जुलूस में शामिल हुए, जो पार्क में झंडा फहराना चाहते थे। जिस समय झंडारोहण कार्यक्रम होने जा रहा था उस समय अंग्रेजी सैनिकों ने पार्क को चारों तरफ से घेर लिया। लेकिन आज़ादी के मतवाले गुलाब सिंह लोधी ने सैनिकों से बिना डरे पार्क में घुस गए और एक पेड़ पर चढ़कर राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया। इसके बाद उन्होंने नारा लगाया महात्मा गांधी की जय। तिरंगा झंडा अमर रहे। उसी समय एक सैनिक ने लोधी को गोलियों से भून दिया और वह शहीद हो गए। उन्नाव जिले के फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के ग्राम चंद्रिका खेड़ा के युवक गुलाब सिंह लोधी साहसी युवक थे। उनका जन्म 1903 में राम रतन सिंह लोधी के घर में हुआ था। 

लखनऊ के अमीनाबाद स्थित अमीरुद्दौला पार्क जिसे अब झंडे वाला पार्क के नाम से जानते हैंदरअसल जनवरी 1928 में क्रांतिकारियों ने पहली बार राष्ट्रीय ध्वज अमीनुद्दौला पार्क में ही फहराकर अंग्रेजी हुकूमत को ललकारा था उसी दिन से यह अमीनुद्दौला पार्क झंडे वाला पार्क के नाम से जाना जाने लगा। अवध के चतुर्थ बादशाह अमजद अली शाह के समय में उनके वजीर इमदाद हुसैन खां अमीनुद्दौला को पार्क वाला क्षेत्र भी मिला था, तब इसे इमदाद बाग कहा जाता था।

इससे पहले ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1914 में अमीनाबाद का पुनर्निर्माण कराया गया चारों तरफ सड़कें निकाली गई बीच में जो जगह बची उसमें एक पार्क का निर्माण कराया गयाजिसका नाम अमीनुद्दौला पार्क का नाम दिया गया। पर आजादी के मतवालों ने यहां पहली बार झंडा फहराया तब से यह पार्क झंडेवाला पार्क कहलाया जाने लगा।

1925 में बापू आए थे यहां - 1925 में 17 अक्टूबर को महात्मा ने लखनऊ में दो सभाएं की थीं। इसमें से एक सभा नगर निगम के अहाते में भाषा पर और दूसरी सभा झंडेवाले पार्क में सांप्रदायिक सौहार्द पर थी। 23 अगस्त 2004 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव में शहीद गुलाब सिंह लोधी की विशाल प्रतिमा का अनावरण अमीरुद्दौला पार्क में किया। साल 2017 के जुलाई माह में जब मैं दुबारा इस पार्क में पहुंचा तो पार्क थोड़ा बदला हुआ नजर आया। पार्क में कुछ इलाके में मार्बल स्टोन लगा दिया गया है। पर पार्क के चारों तरफ पार्किंग और दुकानें सजी हैं। पर इस भीड़ भाड़ में पार्क लोगों को राहत देने का काम करता है, थोड़ी सी हवा और थोड़ी सी खुली जगह। भले ही लखनऊ में नए नए पार्क बन रहें हो पर पार्क को बचाए रखना होगा। 


चिकन के कपड़ों का विशाल बाजार है अमीनाबाद 


लखनऊ की चिकेनकारी का एक नमूना। 
आप जानते होंगे कि लखनऊ चिकन के कपड़ों के लिए खासतौर पर प्रसिद्ध है। झंडेवाला पार्क के पास स्थित अमीनाबाद लखनऊ शहर के केंद्र में स्थित काफी पुराना बाजार है। वही अमीनाबाद जिस पर फिल्मों में गाने लिखे गए हैं... एक दिन मजनू मिला मुझे अमीनाबाद में... इस बाजार में चिकन के कपड़ों की बड़ी संख्या में दुकाने हैं। कुछ फिक्स्ड प्राइस वाली दुकानें हैं तो कुछ हल्की फुल्की मोलभाव वाली। तो अब यहां मजनू मिले या न मिलें पर लखनऊकी लैलाएं यहां शापिंग के लिए जरूर पहुंचती हैं। 

अगर आप लखनऊ जाएं तो अमीनाबाद से खरीददारी कर सकते हैं। चिकन के कपड़े और तैयार सूट, कुरता आदि महिलाएं बच्चें और पुरुषों हर किसी के लिए आते हैं।देश में सबसे सस्ता चिकन का कपड़े आप यहां से खरीद सकते हैं।झंडे वाला पार्क के एक और बड़े बड़े ज्वेलर्स की दुकानें हैं तो दूसरी और अमीनाबाद का प्रसिद्ध बुक मार्केट तो एक ओर कपड़ों का घना बाजार। यहां मोहन मार्केट में और उसके आसपास लखनवी चिकनकारी की तमाम दुकाने हैं।
कैसे पहुंचे - अमीनाबाद कैसरबाग चौराहा से पहुंचा जा सकता है। आपको लखनऊ के चारबाग ( लखनऊ जंक्शन ) रेलवे स्टेशन से कैसरबाग के लिए शेयरिंग आटो रिक्शा और बैटरी रिक्शा मिल जाएंगे। ये आटो गौतम बुद्ध रोड (लाटूश रोड) होकर आते हैं। कैशरबाद में लखनऊ रोडवेज का एक बस डिपो भी है। बगल में नजीराबाद मुहल्ला है। यह लखनऊ के स्थानीय निवासियों के लिेए भी शापिंग की प्रमुख जगह है।  

-    ------ विद्युत प्रकाश मौर्य  -vidyutp@gmail.com

)   (LUCKNOW, JHANDEWALA PARK, AMINABAD, MOHAN MARKET, NAJIRABAD, KAISHARBAG CIRCLE, LAKHNAWI CHIKEN CLOTH, GULAB SINGH LODHI, UNNAO, FATEHPUR CHARASI )  ) 

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