Thursday, August 2, 2012

दार्जिलिंग में शर्मीले रेड पांडा से मुलाकात

अगले दिन हमने तय किया कि दार्जलिंग साथ साथ घूमेंगे। रजनीशभाई उनकी पत्नी, मैं माधवी और अनादि सभी एक मारूति वैन में सवार हुए। इस साझेदारी से हमें टैक्सी बुकिंग सस्ती पड़ गई और दिन भर बातचीत के लिए एक कंपनी भी मिल गई। हमारे टैक्सी वाले भाई एक नेपाली हैं जो स्वभाव से काफी मजेदार हैं। आमतौर पर दार्जलिंग शहर का टूर पैकेज आधे दिन का है। इसमें बौद्ध शांति स्तूप, तेनजिंग नोर्गे का घर, हिमालयन जूलोजिकल पार्क, तेनजिंग नोर्गे रॉक क्लाइंबिग प्वाइंट, टी गार्डन आदि शामिल होता है। चौरस्ता से हमारा घूमने का सफर आरंभ हुआ। दिन में हल्की बारिश ने मौसम सुहाना बना दिया।



दार्जिलिंग जाएं और रेड पांडा से मुलाकाता न हो ऐसा कैसे हो सकता है। दार्जिलिंग के पद्मजा नायडुहिमालयन जूलोजिकल पार्क में आप देख सकते हैं ढेर सारे रेड पांडा। ये एक शाकाहारी, सुंदर शर्मीला जीव है। दार्जिंलिंग के हिमालयन जू में रेड पांडा का पैदाइश भी होती है। यहां रेड पांडा का बड़ा ब्रिडिंग सेंटर है। बच्चे खासतौर पर रेड पांडा को देखकर खुश होते हैं। वैसे ये इंसानों को देखकर भागने की कोशिश करता है। लेकिन दार्जिलिंग जू के रेड पांडा लोगों को देखकर ज्यादा नहीं शरमाते। रेड पांडा को लोग कैट बीयर के नाम से भी जानते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम एल्युरस फालगेनस (AILURUS FULGENS)  है। आकार में यह बिल्ली जैसा होता है। अधिकतम वजन 4 किलो तक हो सकता है। विश्व में अब रेडपांडा को संरक्षित जीव का दर्जा दिया गया है। क्योंकि लगातार कम होती ठंड, घटते जंगल और शिकार के कारण इसकी संख्या घटती जा रही है। यह माना जाता है कि पूरी दुनिया में 10 हजार से भी कम रेड पांडा बचे हैं।


रेड पांडा भारत के सिक्किम में स्वाभाविक तौर पर भी पाया जाता है। यह पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय और अरुणाचल प्रदेश और बंगाल के कुछ हिस्सों में भी पाया जाता है। (स्रोत -डब्लूडब्लूएफ इंडिया) यह अक्सर बांस को पेड़ के खाली तने के बीच अपना घर बनाना पसंद करता है। आपको बता दें कि रेड पांडा सिक्किम राज्य का स्टेट एनीमल यानी राज्य पशु घोषित किया गया है।

दार्जिलिंग का चिड़िया घर राजभवन की इमारत से लगता हुआ है। सरोजनी नायडु की बेटी पद्मजा नायडु पश्चिम बंगाल की लंबे समय तक राज्यपाल रहीं। उनके विशेष प्रयास से बना ये चिड़ियाघर। जू की स्थापना 1958 में हुई। पर1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने इस वनस्पति उद्यान के साथ पद्मजा नायडू का नाम जुड़वाया। यह 67 एकड़ में फैला हुआ है। कुछ खास तरह के जानवर और हिमालय से जुड़े वनस्पतियों का उद्यान है यहां।
दार्जिलिंग आने वाले सैलानी इस जू में जरूर घूमने आते हैं। यहां आप रेड पांडा के अलावा स्नो लेपर्ड ( हिम तेंदुआ) भी देख सकते हैं। इसके अलावा काला तेंदुआ, तिब्बती भेड़िया जैसे जानवर भी देखे जा सकते हैं। प्रवेश द्वार के पास ही हिम म्युजियम है जहां हिमालय से जुड़ी दास्तां रोचक ढंग से देखी जा सकती है।  
यहां आने वाले सैलानियों का प्रिय शगल है नेपाली पोशाक में तस्वीरें खिंचवाना। तो हमने भी ये मौका हाथ से जाने नहीं दिया। नेपाली फौजी की पोशाक पहन ली और खुखरी (हथियार) भी ले लिया।

जूलोजिकल पार्क से निकलने के बाद हमलोग टी गार्डन पहुंचे। वहां चाय की चुस्की के बाद होटल वापस। दार्जलिंग में खाने की बात करें तो हमें सबसे अच्छा खाना अपने होटल के किचेन से ही मिला। और दरें भी वाजिब रहीं। आगे के सफर में हम बोटानिकल गार्डन, घूम बौद्ध मठ गए, टॉय ट्रेन पर जॉय राइड का मजा लिया। और पूरे दार्जिलिंग शहर को एक दिन तो पैदल ही नाप डाला। 
-vidyutp@gmail.com

( RED PANDA, DARJEELING, BENGAL, ZOO, PADMJA NAIDU HIMALAYAN ZOOLOGICAL PARK ) 

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