Wednesday, July 24, 2013

इस मंदिर में प्रवेश के लिए अंबेदकर ने किया था आंदोलन


 नासिक में गोदावरी तट पर पंचवटी में सीता गुफा के बगल में है कालाराम का प्रसिद्ध मंदिर। मर्यादा पुरूषोत्तम रामचंद्र जी का ये मंदिर कालाराम मंदिर इसलिए कहलता है क्योंकि पूरा मंदिर काले रंग के पत्थरों से बना है। 1790 में बने इस मंदिर की वास्तुकला अद्भुत है। कालाराम मंदिर का शिल्प काफी हद तक त्रयंबकेश्वर मंदिर से मिलता जुलता है। मंदिर के मुख्य गुंबद की ऊंचाई 70 फीट है। मंदिर का निर्माण सरदार ओढेकर पेशवा ने करवाया था। तकरीबन 12 सालों में ये विशाल मंदिर बन कर तैयार हुआ। इसके निर्माण में 2000 शिल्पी लगे थे। मंदिर में कुल 96 स्तंभ हैं। मंदिर के कलश में 32 टन स्वर्ण का इस्तेमाल हुआ है। मंदिर के निर्माण के लिए काला पत्थर रामसेज की पहाड़ी से लाई गई।मंदिर का परिसर 285 फीट लंबा और 105 फीट चौड़ा है। कहा जाता है इसी स्थान पर वनवास के दौरान श्रीराम चंद्र ने पर्णकुटी बनाई थी।
आमतौर पर राम मंदिरों में राम जी की मूर्ति तीर धनुष लिए होती है। लेकिन इस मंदिर में ऐसा नहीं है। यहां राम जी का एक हाथ उनके सीने पर है। मंदिर में राम की मूर्ति भी काले पत्थरों से बनी है। कहा जाता है राम जी का हाथ सीने पर इसलिए है क्योंकि वे अपने शरणागत का दुख हरते हैं। लंबे समय से कालाराम मंदिर की महाराष्ट्र में दूर-दूर तक प्रसिद्धि है। मंदिर का प्रबंधन कालाराम संस्थान देखता है। वैसे कालाराम मंदिर के बगल में एक गोराराम मंदिर भी है। कालाराम मंदिर में रामनवमी दशहरा और गुडीपड़वा के त्योहार विशेष तौर पर मनाए जाते हैं।
काल सर्प दोष निवारण -  गोदावरी तट पर कालाराम मंदिर ( भगवान विष्णु के अवतार राम और कपालेश्वर शिव का मंदिर होने के कारण इस क्षेत्र को हरि हर क्षेत्र भी माना जाता है। कालाराम मंदिर में लोग काल सर्प दोष के निवारण के लिए आते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए यहां जाएं- http://kalsarp.com/

डाक्टर अंबेडकर की अगुवाई में हुई थी रक्त विहीन क्रांति -- किसी जमाने में कालाराम मंदिर में शूद्र वर्ण के लोगों के प्रवेश की मनाही थी। डाक्टर अंबेडकर की अगुवाई में कालाराम मंदिर में प्रवेश के लिए 1930 में ऐतिहासिक आंदोलन किया गया। पांच साल तक चले आंदोलन के बाद मंदिर में सबके लिए प्रवेश संभव हो पाया। 2 मार्च 1930 को डाक्टर अंबेडकर की अगुवाई में दलित समाज के लोगों ने कालाराम मंदिर में प्रवेश की कोशिश की थी। तब मंदिर के पुजारियों ने ये कहकर दलितों का प्रवेश रोकने की कोशिश की थी कि ये मंदिर सार्वजनिक नहीं है। डॉक्टर अंबेडकर के इस रक्तिविहीन क्रांतिकारी आंदोलन की कथा अब इतिहास के पन्नो में दर्ज है। साल 2008 में कालाराम मंदिर के पूर्वी प्रवेश द्वार पर इस ऐतिहासिक घटना का शीलापट्ट लगाकर वर्णन किया गया है।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य
-    Dr. Ambedkar writes ……

I started temple entry Satyagraha only because I felt that was the best way of energizing th Depressed Classes and making them conscious of their position. As I believe I have achieved that purpose I have no more use for temple entry. I want the Depressed Classes to concentrate their energy and resource on politics and education and I hope that they will realise the importance of both. ( Volume-XVII. Dr. Babasaheb Ambedkar Writing and Speeches ) 

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