Saturday, July 6, 2013

अहमदाबाद से मुंबई की ओर वाया बड़ौदा

अहमदाबाद से चलने वाली गुजरात क्वीन एक्सप्रेस। आनंद, बड़ौदा, सूरत होते हुए मुंबई की ओर गुजरात के आखिरी स्टेशन वलसाड तक जाती है। गुजरातियों की लोकप्रिय ट्रेन। इसमें हमने चेयरकार में बड़ौदा तक सफर किया। अहमदाबाद के बाद अमूल का शहर आनंद आया। शायद आपको पता हो अमूल यानी AMUL शब्द बना है आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड के संक्षीप्तिकरण से। गुजरात में श्वेत क्रांति की शुरूआत इसी आनंद शहर से हुई थी। रेलवे स्टेशन पर अमूल का स्टाल दिखाई दिया। ट्रेन कई स्टेशनों पर रुकती है लेकिन कब स्टेशन आ गया पता भी नहीं चला। लगभग दो घंटे के सफर में हमलोग बडौदा पहुंच गए। गुजरात का एक ऐतिहासिक शहर। बड़ौदा को वडोदरा भी कहते हैं। गायकवाड राजघराने की राजधानी।

बडौदा जंक्शन गुजरात का बड़ा स्टेशन है। दिल्ली से आने वाली ट्रेने और अहमदाबाद से आने वाली ट्रेनें बड़ौदा जंक्शन में एक पटरी पर आ जाती हैं। हमारी अगली ट्रेन में बड़ौदा मुंबई एक्सप्रेस दो घंटे बाद थी। इसलिए हमें डिनर बड़ौदा में ही करना था। 
प्लेटफार्म नंबर एक पर भी दो रेस्टोरेंट थे। लेकिन हमारे पास समय था इसलिए हम स्टेशन के बाहर पाठक कांप्लेक्स में गायत्री भवन में खाने के लिए पहुंचे। गायत्री भवन के बगल में न्यू गायत्री भवन, इंद्रा भवन, न्यू इंद्रा भवन समेत कई अच्छे भोजनालय हैं। यहां 65 या 70 रुपये की थाली है। इस थाली में तवा चपाती, चावल, दाल, तीन सब्जियां, पापड़ सब कुछ। तेज सर्विस और खाने का स्वाद बिल्कुल घर जैसा।( 2015 में दुबारा बड़ौदा पहुंचा तो गायत्री भवन के थाली की दरें बढ़कर 90 रुपये हो गई थीं।) 

 भले ही बड़ौदा हम दो घंटे के लिए रुके लेकिन बड़ौदा शहर का खाना याद रहेगा। दिल्ली की तरह स्टेशन के बाहर होटलों की तरह कोई ठगी का माहौल नहीं। होटल वालों का व्यवहार भी अच्छा था। हमें नास्ते में गुजरात का थेपला काफी पसंद आया था। इसलिए हमने यहां से आगे के नास्ते के लिए थेपला फिर खरीदा।


-   -- विद्युत प्रकाश मौर्य
((VADODRA, BRC, RAIL, GUJRAT ) 

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