Tuesday, June 4, 2013

गुजरात की शाही सवारी छकड़ा


पोरबंदर में एक छकड़े पर अनादि। 
भले ही गुजरात ने तमाम क्षेत्रों में उपलब्धियों के झंडे गाड़े हों लेकिन यहां की शाही सवारी तो छकड़ा ही है। छकड़ा एक तरह की जुगाड़ गाड़ी है। कई राज्यों में इस तरह की गाड़ियां प्रतिबंधत हैं।  लेकिन इसका गुजरात में आरटीओ दफ्तरों में छकड़ा का पंजीकरण होता है।

गुजरात में जामनगर की एक कंपनी अतुल दो लाख रुपये में छकड़ा तैयार करके बेचती है। छकड़ा राज्य का बहु उपयोगी वाहन है। यहां गांव व शहरों में माल ढुलाई के लिए आदर्श तो है ही इससे सवारियां भी ढोई जाती हैं। छकड़ा में डीजल इंजन लगा होता है। पोरबंदर में एक छकड़ा के चालक ने बताया कि यह 30 किलोमीटर तक का औसत दे देता है। भले ही आवाज बहुत करता है लेकिन ररखाव में तो सस्ता है। यह एक टन तक वजन उठाने में सक्षम है। सवारी ढोने की बात हो तो इसमें 20 आदमी बैठ जाते हैं। कुछ लोग खड़े रहते हैं तो कुछ लटक भी जाते हैं। गुजरात के गांवों को शहर से जोड़ने में छकड़ा अहम कड़ी है।

तमाम कंपनियों के आटो रिक्शा, टेंपो, टाटा मैजिक, नैनो कार, महिंद्रा के जीओ और मैक्सिमो जैसे माडल के अच्छे पब्लिक ट्रांसपोर्ट बाजार में आ गए हैं लेकिन वे देशी जुगाड़ से बने छकड़े का रिप्लेसमेंट नहीं बन पा रहे हैं। सीट के नाम पर छकड़े में लकड़ी का पटरा रखा होता है। जब आप इसमें चलते हैं तो पर पूरा शरीर हिल उठता है लेकिन गुजरातियों को इस छकड़े से मानो प्यार है। वे इससे दूर नहीं जाना चाहते। बैठने के साथ हवा धूप और आसपास के नजारे देखने का भी आनंद मिलता है।

किसी जमाने में दिल्ली की सड़कों पर छकड़े से मिलती जुलती फटफट गाड़ी चला करती थी। इसमें बुलेट का इंजन लगा होता था। पर प्रदूषण फैलाने के नाम पर दिल्ली के फटफट को शहीद कर दिया गया। हमने सोमनाथ से लेकर दीव तक ऐसा ही छकड़ा चलते हुए देखा। माल, ढुलाई, मेला से लेकर टूरिज्म तक छकड़ा हर जगह मौजूद है। हमने भी दीव में थोड़ी देर तक छकड़े की सवारी का खूब मजा लिया।

 - vidyutp@gmail.com

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