Monday, June 3, 2013

गुजराती थाली - मतलब छककर खाओ

गुजराती थाली मतलब छक कर खाओ पर पचाने के लिए जमकर पीओ छाछ। गुजरात शाकाहारी भोजन खास तौर पर गुजराती थाली के लिए जाना जाता है। हमने पोरबंदर स्टेशन पर उतरते ही स्टेशन गेट के बाहर दाहिनी तरफ एक एसी रेस्टोरेंट में गुजराती थाली का आनंद लिया था। यहां 60 रुपये की फिक्स थाली थी। घी लगी चपाती, सब्जियां और छाछ आदि।

नीलेश भोजनालय - शाम खाना हमने जांच पड़ताल कर एसटी रोड पर नीलेश भोजनालय में करने को तय किया। यहां 70 रुपये की अनलिमिटेड थाली थी। शुरुआत गेहूं की एक घी चुपड़ी मोटी रोटी के साथ हुई। उसके बाद चाहे जितनी मर्जी चपाती और चावल खाएं आप। छाछ तो उन्होंने एक जग में लाकर रख दिया। आपकी मर्जी चाहे जितने ग्लास गटक जाओ। आनंद आ गया। वैसे पोरबंदर में मून पैलेस समेत कई और जगह गुजराती थाली खाई जा सकती है। सुबह हमने बापू के शहर में जलेबियों का भी स्वाद लिया।

केसर आम - सौराष्ट्र में इन दिनों आम का मौसम है। गुजरात का प्रसिद्ध केसर आम इसी इलाके में होता है। केसर को शौकीन इसे अपने साथ मुंबई तक ले जाते हैं। ट्रेन में हमें लोग केसर आम की पेटी अहमदाबाद और मुंबई ले जाते हुए मिले। आम को लेकर हर इलाके लोग अपने स्थानीय स्वाद को लेकर खासे शौकीन दिखते हैं। गुजरात का केसर रत्नागिरी के हापुस को चुनौती देता है।

और ये रहा सफेद जामुन - पोरबंदर के बाजार में हमें जामुन भी खूब देखने को मिला। पर सफेद जामुन तो हमने पहली बार देखा। हालांकि ये काले जामुन की तरह मीठा नहीं होता। इसका स्वाद इसके सफेदी के मुताबिक फीका भी है।


-    विद्युत प्रकाश मौर्य 

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