Wednesday, July 23, 2014

जब महाराष्ट्र के लातूर में आया भूकंप ((7))

( पहियों पर जिंदगी-7)
सद्भावना रेल यात्रा की तैयारी के दौरान ही महाराष्ट्र के लातूर जिले में 30 सितंबर को बड़ा भूकंप आ गया। विनाशकारी भूकंप के बाद देश में पांच दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया। इसके बाद सद्भवाना रेल यात्रा के शुभारंभ की तारीख टाल दी गई। पहले यह तय तारीख 2 अक्तूबर थी। कई लोगों को यह भी अंदेशा था की यात्रा भी स्थगित हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब रेलयात्रा के आरंभ की तारीख आठ अक्बतूर को शाम 4.50 बजे तय किया गया। इसी बीच अनूप कुमार भूतड़ा जैसे हमारे कुछ उत्साही साथी लातूर में भूकंप पीड़ितों की सहायता करने चले गए। 

अनूप कुमार भूतड़ा महाराष्ट्र के वर्धा शहर से आए हैं। उनकी किताबों की दुकान है भूतड़ा बुक डिपो। वे भूकंप को सुनकर काफी द्रवित हो गए। वे लातूर चले गए सेवा कार्य करने। हमलोगों ने भी दिल्ली में रहकर भूकंप पीड़ितों के लिए कुछ करने की सोची। शिविर में शाम की सर्वधर्म प्रार्थना के बाद होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए। प्रारंभ में शिविर में मुझे प्रदर्शनी का दायित्व और शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम के मंच संचालन का काम दिया गया था।
चार अक्टूबर को हमलोग भूकंप पीड़ितों के लिए सहायता राशि जुटाने दिल्ली की सड़कों पर निकले। मैं, रेणुका पाटंकर, हरविंदर, हरवंश कौर, गोपाल कपूर और चार और लोग टीम में। पहाड़गंज इलाके के बाजार से 2047 रुपये जुटाए। ये राशि बाकी लोगों द्वारा जुटाई गई राशि के साथ भूकंप राहत फंड में भेज दी गई।
दो अक्टूबर को सुबह 10 बजे राजघाट पर गांधी जी की समाधि के सामने विशेष प्रार्थना सभा हुई। इसके बाद मंडी हाउस में हमदर्द प्रेक्षागृह में झुग्गी झोपड़ी के बीच काम करने वाली संस्था आश्रय के कार्यक्रम में शामिल हुए। झुग्गी के बच्चों ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। यहां कवयित्री सरोजनी प्रीतम भी आई थीं।
साथी अनूप कुमार भूतड़ा ( अब की तस्वीर) 
तीन अक्टूबर को सभी शिविरार्थी राजनेताओं को रेलयात्रा के उदघाटन समारोह का आमंत्रण पत्र बांटने गए। मुझे इस दौरान रणसिंह परमार भाई साहब ने निजामुद्दीन स्टेशन से प्रदर्शनी की सामग्री लाने के लिए भेजा। मैं निजामुद्दीन के माल गोदाम से मिनी ट्रक किराये पर लेकर सामग्री को कैंप स्थल तक लेकर आया। निजामुद्दीन में ही सद्भावना यात्रा के लिए रेल की विशेष रैक का निर्माण किया जा रहा है।

रेलवे अस्पताल में भाई जी-  सुब्बराव जी जिन्हें हम प्यार से भाई जी कहते हैं उनकी तबीयत खराब चल रही है। उनका रेलवे हास्पीटल में इलाज चल रहा है। वे धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं। सद्भावना यात्रा में आने से पहले एनवाईपी की अलीगढ़, उत्तरकाशी, बेंगलुरु, दिल्ली के शिविरों में हिस्सा ले चुका था। सुब्बराव जी मुझे निजी तौर पर पहचानने लगे हैं। रणसिंह परमार मुझे शिविर में बड़ी जिम्मेवारियां देना चाहते हैं। कई बार काम के दौरान मेरी रणसिंह जी से बहस हो जाती है, हालांकि वे इस बुरा नहीं मानते।

विनाशकारी भूकंप - लातूर में भूकंप 30 सितंबर 1993 को आया था। इसमें लगभग 10 हजार लोग मारे गए थे। सुबह सुबह आए भूकंप में 52 गांव पूरी तरह तबाह हो गए थे। इस प्राकृतिक आपदा में तकरीबन 30 हजार लोग घायल हुए थे। 
-       ----- विद्युत प्रकाश मौर्य 




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