Wednesday, June 12, 2013

भड़केश्वर महादेव मंदिर और द्वारका की चौपाटी


द्वारका के कई मंदिरों में से प्रमुख है भड़केश्वर महादेव का मंदिर। वैसे तो देश में शिव के कई मंदिर हैं लेकिन ये मंदिर अनूठा है। द्वारका के तीन बत्ती चौक से दो किलोमीटर दूर समंदर के किनारे ये मंदिर समंदर के अंदर शिला पर बना है।

 कहा जाता है यहां समंदर के जल के बीच से शिव अपने आप भड़क कर प्रकट हो गए थे। इसलिए इन्हें भड़केश्वर महादेव कहा जाता है। मुख्य धरती से मंदिरतक पहुंचने के लिए रास्ता बनाया गया है। मंदिर के पुजारी के मुताबिक भड़केश्वर महादेव का वर्तमान मंदिर दो सौ साल से ज्यादा पुराना है। महादेव के मंदिर में आकर अद्भुत शांति मिलती है। मंदिर के प्राचीर से अटखेलियां करता समंदर बड़ा ही मनोरम लगता है। जब समंदर में तेज ज्वार भाटा आता है तब मंदिर में पहुंचने का रास्ता बंद हो जाता है। मंदिर के आसपास हवा इतनी अच्छी चलती है कि दोपहर में भी ठंडक का एहसास होता है।

भड़केश्वर महादेव के मंदिर के पास गुजरात सरकार की ओर से चौपाटी का निर्माण कराया गया है। यहां सैलानियों के लिए तीन विश्रामालय बनाए गए हैं। जहां बैठकर आप दोपहर में आराम कर सकते हैं।


शाम होते ही यहां रौनक बढ़ जाती है। नारियल पानी, भेलपुरी, चाट, जूस, भुट्टा और पानी पूरी का लिजिए मजा। साथ में कीजिए ऊंट की सवारी। बिल्कुल सस्ते में। इस चौपाटी पास द्वारका का सनराइज प्वाइंट और सनसेट प्वाइंट भी है। यहां से डूबते हुए सूर्य का नयनाभिराम दृश्य देखा देखा जा सकता है। यहां बिरला परिवार द्वारा बनवाया गया एक सुंदर गीता मंदिर और बिरला अतिथि गृह भी है। द्वारका की इस चौपाटी से थोड़ी देर पर ही लाइट हाउस भी है।

हालांकि टूरिस्ट पैकेज वाली गाड़ियां भड़केश्वर महादेव और चौपाटी पर नहीं आती हैं, लेकिन अगर आप द्वारका में हैं तो एक यादगार शाम गुजारने के लिए यहां जरूर आएं। 


भरी दोपहरी में क्रिकेट मैच -  हमलोग दोपहरी में भड़केश्वर महादेव के पास पहुंचे तो वहां बगल में स्थित खेल के मैदान में आईपीएल की तर्ज पर जीपीएल का 20-20 चल रहा था।
 जीपीएल यानी गुगली प्रिमियर लीग। द्वारका मंदिर की व्यवस्था देखने वाले गुगली ब्राह्मणों की टीम क्रिकेट मैच खेल रही थी। आपस में ही दो टीम बनाकर 20-20 का मैच खेला जा रहा था। मैच की रनिंग कमेंटरी भी रही थी। मंदिर की व्यवस्था के जु़ड़े गुगली ब्राह्मण लोग बड़े अमीर हैं। ये लोग पढ़े लिखे भी हैं। पर मंदिर में पंडों का के काम के अलावा कोई और पेशा नहीं अपनाते, क्योंकि इसी में भारी कमाई है। कान्हा जी इनपर काफी कृपालु हैं। बिना मेहनत के सालों पर कृपा बरसती है। जय हो नटवर नागर....

-    विद्युत प्रकाश मौर्य 

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