Tuesday, June 18, 2013

सोमनाथ - बार-बार लूटने के बाद भी बना रहा वैभव



इतिहास में सोमनाथ मंदिर अपने वैभव और ऐश्वर्य के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता था। सोमनाथ मंदिर को जनवरी 1026 में पहली बार मोहम्मद गजनी ने लूटा। वह करोड़ों के हीरे जवाहरात लेकर अपने देश गया। लेकिन ये धन उसके काम नहीं आया। रास्ते में ही उसकी मृत्य हो गई। इसके बाद राजा भीमदेव ने मंदिर को एक बार फिर बनवाया। सौराष्ट्र के तमाम राजाओं ने मंदिर की श्रीवृद्धि में योगदान किया। इसके बाद 1297 में अल्लाउद्दीन खिलजी ने, 1395 में मुजफ्फरशाह ने 1413 में अहमदशाह ने सोमनाथ मंदिर को लूटा।
अहिलेश्वर महादेव -  1783 में इंदौर की महारानी अहिल्या बाई ने सोमनाथ के भग्नावशेष के पास सोमनाथ का एक मंदिर बनवाया। ये मंदिर सोमनाथ के मुख्यमंदिर के बगल में आज भी मौजूद है। जिसमें नियमित पूजा होती है। दो मंजिल वाले इस मंदिर में दो शिवलिंग हैं। ऊपर अहिलेश्वर महादेव और नीचे गर्भ गृह में सोमनाथ।


वर्तमान सोमनाथ मंदिर में मंदिर परिसर में भव्य दिग्विजय द्वार बनाया गया है। मंदिर परिसर में एक नृत्य मंडप भी है। इसके साथ ही द्वादश ज्योतिर्लिंग की भव्य चित्रावली वाली गैलरी बनाई गई है। इसमें सभी ज्तोतिर्लिंगों को परिचय भी दिया गया है।

सोमनाथ ट्रस्ट- सोमनाथ मंदिर का पूरा इंतजाम सोमानाथ ट्र्स्ट देखता है। इसलिए मंदिर में पूजा पाठ को लेकर कोई ठगी का आलम नहीं है। मंदिर ट्रस्ट ने सोमनाथ आने वाले भक्तों के रहने के लिए कई आवास बनवाए हैं और भोजनालय भी चलाता है। मंदिर के बगल में स्थित सोमनाथ भोजनालय में 35 रुपये में भोजन की थाली उपलब्ध है।


लीलावती कांप्लेक्स -  हाल के दिनों में सोमनाथ मंदिर के पास लीलावती कांप्लेक्स का निर्माण कराया गया है। यहां रहने के लिए एसी, नॉन एसी कमरे और खाने के लिए लीलावती भोजनालय में सुस्वादु भोजन उपलब्ध है। यह कांप्लेक्स मंदिर के ठीक सामने स्थित है। यहां बाहर बैठने के लिए सुंदर बेंच लगी हैं। रात में यहां का वातावरण मनोरम हो जाता है। लीलावती कांप्लेक्स के भोजनालय में 55 रुपये की शाकाहारी थाली उपलब्ध है। सोमनाथ में रहते हमने भोजन और नास्ता लीलावती भोजनालय में लिया। थाली में छाछ मिलती है जो गुजराती थाली का अनिवार्य हिस्सा है।
-    -- माधवी रंजना

 महामृत्युंजय मंत्र
 ओम त्रयंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम।
उर्वारुकमिव बंधनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्। 

  (JYOTIRLINGAM, TEMPLE, SHIVA,GUJRAT )   


No comments:

Post a Comment