Monday, July 15, 2013

चप्पे चप्पे में फैली है खूबसूरती - पंचगनी

महाबलेश्वर से 17 किलोमीटर पहले सतारा मार्ग पर है पंचगनी। ये जगह अपनी सदाबहार जलवायु के लिए प्रसिद्ध है। अंग्रेजों का पंसदीदा शहर रहा। वे यहां स्वास्थ्य लाभ के लिए लंबा वक्त गुजारते थे। पंचगनी मतलब है पांच पहाड़। पंचगनी 1300 मीटर की ऊंचाई पर है। महाबलेश्वर से थोड़ी कम ऊंचाई पर जरूर है पर मौसम सालों भर मनोरम रहता है।
महाबलेश्वर में हमारे होटल प्रीति संगम के मालिक आनंद भांगड़िया ने होटल छोड़ते समय यह सलाह दी थी कि आप पंचगनी और वाई का गणेश मंदिर घूमते हुए वापस जाएं। हम महाबलेश्वर से बस से पंचगनी पहुंचे। यहां हमने मोलभाव करके एक टैक्सी बुक की। टैक्सी ड्राइवर चंद्रकांत मोबाइल – 98606-16488 ) ने हमे अपने अंदाज में बड़ी शालीनता से पंचगनी शहर के बारे में बताना शुरू किया।
पंचगनी का बस स्टैंड 


पंचगनी के स्कूल - मनभावन मौसम के कारण अंग्रेजों ने पंचगनी में कई स्कूल बनवाए। यहां आजकल कुल 38 आवासीय विद्यालय हैं। इनमें आठ स्कूल ब्रिटिश काल के हैं। इन स्कूलों में सालाना फीस ढाई लाख से आरंभ होती है। ज्यादातर मुंबई के सेठों के बच्चे यहां पढ़ने आते हैं। ज्यादातर बोर्डिंग स्कूलों में बच्चे छुट्टी में घर आते हैं पर पंचगनी में उल्टा होता है। यहां छुट्टियों में अभिभावक ही बच्चों से मिलने आते हैं। इन स्कूलों में से कई में अभिभावकों के रहने के लिए गेस्ट हाउस भी बनाए गए हैं। यानी आप अपने बच्चों से मिलने भी आएं और साथ में पहाड़ों की सैर भी जाए। 

पारसी प्वाइंट - पंचगनी में हमने सबसे पहले देखने पहुंचे पारसी प्वाइंट। कुछ पारसी समुदाय के लोगों के नाम पर इसका नाम पारसी प्वाइंट पड़ा है। यहां से कृष्णा नदी का नजारा दिखाई देता है। इस प्वाइंट निर्माण मुंबई के पारसी समाज के अमीरों ने कराया। पारसी समाज के लोग यहां छुट्टियां बीताने आते हैं।

सबसे बड़ा टेबल लैंड - पंचगनी का टेबल लैंड देश का सबसे बड़ा और दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा टेबल लैंड है। पहाड़ आम तौर पर उबड़ खाबड़ होते हैं। लेकिन यहां बहुत बड़ी समतल सतह है जिसे टेबल लैंड कहते हैं। ऐसा लगता है भगवान जी का डायनिंग टेबल हो। पंचगनी का ये टेबल लैंड 99 एकड़ में फैला है। यह पंचगनी का बड़ा टूरिस्ट स्पॉट है। यहां पर टेबल लैंड घूमाने के लिए यहां बग्घियां चलती हैं। वैसे आप की मर्जी आप पैदल भी घूम सकते हैं। पर घूमते घूमते थक जाएंगे।
पंचगनी - टेबल लैंड के पास पांडव गुफा में 

टेबल लैंड के पास एक गुफा और इसके अंदर एक मंदिर है। इसे पांडव गुफा भी कहते हैं। कहा जाता है पांडवों ने अज्ञात वास के दौरान इस गुफा में भी कुछ समय तक अपना वक्त बीताया था। दोपहर की गरमी पर गुफा के अंदर शीतलता है। 

सिडनी प्वाइंट में हुई थी सरगम की शूटिंग - सिडनी प्वाइंट पंचगनी का प्रसिद्ध प्वाइंट है। यह पंचगनी शहर से थोड़ा बाहर है। यहां ऋषि कपूर जया प्रदा की प्रसिद्ध फिल्म सरगम की शूटिंग हुई थी। फिल्म के प्रसिद्ध गीत डफली वाले डफली बजा... यहीं फिल्माया गया था। फिल्म का क्लाइमेक्स भी यहीं पर फिल्माया गया था। हालांकि तब यहां सीढ़ियां चढ़ने पर एक मंदिर हुआ करता था जो अब यहां नहीं है। सिडनी प्वाइंट पर दोपहर में भी ठंडी ठंडी हवा आती रहती है। इतनी तेज हवा की गोरी का दुपट्टा लहराने लगता है। और ये गीत बरबस याद आता है... हवा में उड़ता जाए मोरा लाल दुपट्टा मलमल.... सिडनी प्वाइंट से कृष्णा नदी पर बने धूम बांध का सुंदर नजारा दिखाई देता है। 
यहां हुई थी डफली वाले की शूटिंग। 

पंचगनी मुंबई के फिल्मी सितारों की पसंदीदा जगह रही है। यहां आमिर खान और आशा भोंसले ने तो अपना बंग्ला बनवा रखा है। वे लोग अक्सर छुट्टियां बीताने के लिए चुपके से यहां पहुंचते हैं। आमिर खान की फिल्म तारे जमीं पर की शूटिंग पंचगनी के स्कूल में ही हुई थी।

पचंगनी को और सुंदर बनाने का श्रेय 1860 में पदस्थापित ब्रिटिश अधिकारी जॉन चेसन को जाता है। उसे बागवानी का बहुत शौक था। उसने यहां पर कई तरह के नए नए पौधे लगवाए। इससे वातावरण और हरा भरा हो गया। ब्रिटिश अधिकारियों के लिए यह रिटायरमेंट स्थल की तरह था। पर कालांतर में पंचगनी देश का लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट बनता चला गया। 

कैसे पहुंचे - पंचगनी पुणे या सतारा से बस से पहुंचा जा सकता है। आप सीधे मुंबई से टैक्सी से भी आ सकते हैं। नजदीकी सुविधा जनक रेलवे स्टेशन पुणे या सतारा हैं। पुणे से पंचगनी कुल 100 किलोमीटर है। मुंबई से सीधी दूरी 285 किलोमीटर है।  

-    --- विद्युत प्रकाश मौर्य  
( (PANCHGANI, SATARA, MAHARASTRA, SARGAM, FILM, TABLE LAND, PANDAV GUFA ) 
पंचगनी - सिडनी प्वाइंट - अब यहां से जाने का दिल नहीं करता.....


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