Saturday, July 27, 2013

ओंकारेश्वर– प्रणव रूप में हैं यहां हैं शिव (04)

मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित शिव का ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथे स्थान पर आता है। यहां सुरम्य वादियों के बीच नर्मदा नदी के तटपर स्थित है शिव का मंदिर ओंकारेश्रर

 ओंकारेश्वर में नर्मदा और कुबेर नदियों के बीच एक विशाल टापू बन गया। इसी टापू पर बना है ओंकारेश्वर मंदिर। इस टापू का मान्धाता पर्वत या शिवपुरी भी कहते हैं। यह पर्वत ओम के आकार का है, इसलिए इसे ओंकारेश्वर कहा गया है। यहां नदी के किनारे पक्के घाट बने हुए हैं। ओंकारेश्वर मंदिर जाने के लिए एक झूले का पुल है तो दूसरा स्थायी पुल। कई श्रद्धालु नर्मदा में स्नान के बाद नाव में बैठकर मंदिर जाते हैं। 
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन। 
शिवपुराण में ओंकारेश्वर के दर्शन और उसका महात्मय वर्णित है। ओंकारेश्वर का मंदिर सफेद रंग का है। मंदिर पांच मंजिला है। मंदिर में मौजूद शिवलिंग गढ़ा नहीं गया है, बल्कि ये प्राकृतिक है। यहां प्रणव लिंग के दर्शन और अभिषेक का बड़ा महत्व है। मंदिर में शिवलिंग के पास ही माता पार्वती की भी प्रतिमा है।
 ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के इस पार ममलेश्वर मंदिर है। दोनों मंदिरों की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग के तौर पर की गई है। ओंकारेश्वर में शिव प्रणव रूप में विराजते हैं तो दूसरे मंदिर में पार्थिव शिव लिंग है जो अमरेश्वर के रूप में है।
नर्मदा के किनारे ओंकारेश्वर मंदिर। 
कहा जाता है कि पुराण काल में इच्छवाकु वंश के राजा युवनाक्ष के प्रतापी पुत्र मान्धाता ने इस स्थान पर घोर तपस्या कर शिव को प्रसन्न किया था। सिक्खों के प्रथम गुरू गुरूनानक देव जी ने भी ओंकार पर्वत की परिक्रमा की थी। उनकी स्मृति में शिवपुरी में गुरूद्वारा है। जगतगुरु शंकराचार्यजी ने अपने गुरु भगवतपादाचार्य जी से यहीं शिक्षा ली थी। ओंकार पर्वत का परिक्रमा मार्ग लगभग 8 किलोमीटर का है।

ओंकारेश्वर पर्वत की पैदल परिक्रमा 
यहां आने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में ओंकारेश्वर पर्वत की परिक्रमा करते हैं। पर्वत की पैदल परिक्रमा में लगभग 4 घंटे लगते हैं। इस परिक्रमा मार्ग पर लगभग 108 मंदिर हैं। कई लोग नदी में नाव आरक्षित करके भी परिक्रमा करते हैं। ओंकारेश्वर मंदिर केंद्रीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।
---- माधवी रंजना   

 (JYOTIRLINGAM, TEMPLE, SHIVA) 

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