Tuesday, May 28, 2013

सराय रोहिला रेलवे स्टेशन से गुजरात की ओर

बापू की धरती पर ( 17 मई 2013) 

नई दिल्ली का सराय रोहिला रेलवे स्टेशन। गुजरात और राजस्थान जाने वाली ज्यादातर रेलगाडियां यहीं से खुलती हैं। लेकिन सराय रोहिला दिल्ली के बाकी चार रेलवे स्टेशनों की तुलना में यात्री सुविधाओं के नाम पर काफी पिछड़ा हुआ है। यहां पहुंचकर लगता ही नहीं है कि आप देश राजधानी दिल्ली के किसी स्टेशन पर हैं। दिल्ली के शास्त्री नगर मेट्रो स्टेशन से एक किलोमीटर दूर स्टेशन का सड़क से पहुंच मार्ग अत्यंत संकरा है। करोलबाग की तरफ से रोहतक रोड से स्टेशन पहुंचने का रास्ता गलियों से होकर है। इस गली में गाड़िया अक्सर जाम में फंस जाती हैं।
सराय रोहिला स्टेशन भवन काफी पुराना है। प्लेटफार्म और फुटओवर ब्रिज टूटे फूटे हैं। प्लेटफार्म पर शेड्स की कमी है। कैंटीन, वेटिंग हॉल के नाम पर भी खानापूर्ति है।


दिल्ली के बाकी स्टेशनों को वर्ल्ड क्लास बनाने की कवायद चल रही है। पर सराय रोहिला स्टेशन पर रेलवे की नजरें इनायत क्यों नहीं हैं। जबकि यहां से रेलवे को बड़ा राजस्व मिलता है। यहां से गुजरात की कई ट्रेनें, मुंबई गरीब रथ, जयपुर के लिए डबल डेकर जैसी रेलगाड़ियां रोज खुलती हैं। पर स्टेशन पर इंतजाम के नाम पर कुछ भी नहीं। सराय रोहिला किसी जमाने में मीटर गेज का स्टेशन हुआ करता था। पर राजस्थान और गुजरात की ज्यादातर लाइनें ब्राडगेज हो जाने के बाद अब स्टेशन से मीटर गेज खत्म हो चुका है। 


रेलवे केटरिंग का घटिया खाना

जामनगर के बाद एक स्टेशन पर खड़ी पोरबंदर एक्सप्रेस 
अब बात दिल्ली पोरबंदर एक्सप्रेस की। 19264 पोरबंदर एक्सप्रेस सोमवार और गुरुवार को यहां से चलती है। हमारी यात्रा 16 मई गुरुवार के दिन आरंभ हुई। ट्रेन दिल्ली से समय पर यानी सुबह 8.20 बजे खुल गई। माउंट आबू के रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म पर मिलने वाली रबड़ी की खूब तारीफ सुनी थी। पर खाया तो उसका स्वाद औसत निकला।
हमने इस सफर में पाया कि गुजरात जाने वाली इस महत्वपूर्ण ट्रेन की रखरखाव के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। सबसे बुरा हाल ट्रेन की केटरिंग व्यवस्था का है। हमने रात का खाना आर्डर किया। 85 रुपये की थाली। इस थाली में मटर बिल्कुल कच्चे थे। दाल अधपकी थी। पराठे भी पके हुए नहीं थे। चावल घटिया क्वालिटी का था। ये समझ में नहीं आया कि 85 रुपये किस बात के लिए जा रहे हैं। वहीं जब हमने महाराष्ट्र में सतारा कोपरगांव के बीच महाराष्ट्र एक्सप्रेस में खाना आर्डर किया तो महज 50 रुपये में इससे काफी बेहतर खाना मिला। कई ट्रेनों में आईआरसीटीसी के ठेकेदार खाने के नाम पर रेल यात्रियों को लूट रहे हैं। खासतौर पर दिल्ली पोरबंदर एक्सप्रेस की केटरिंग ठीक किए जाने की जरूरत है। इससे तो अच्छा हो कि गुजरात के लोकप्रिय रेस्टोरेंट्स को ट्रेन में गुजराती थाली परोसने की व्यवस्था की जाए। इससे गुजरात जाने वाली ट्रेन में खूशबू गुजरात की महसूस की जा सकेगी।

17 मई की सुबह हुई तो हम गुजरात में थे। अहमदाबाद पीछे छूट गया था। हमने सुबह का नास्ता राजकोट जंक्शन में लिया। यहां ट्रेन का ठहराव 15 मिनट का था। नास्ते में अगर गुजरात में हैं तो भला ढोकला के अलावा और क्या हो सकता है। हमारा आरक्षण जामनगर तक का ही था। पहले हम जामनगर से द्वारका जाने वाले थे। पर अब हमने योजना में थोड़ा बदलाव किया था। हम पहले पोरबंदर जाना चाहते थे। चलती ट्रेन में टिकट का विस्तार कराया।



ट्रेन जामनगर से आगे भाग रही थी। हरियाली कम होती जा रही है। आसपास में पवन ऊर्जा से बिजली बनाने वाली इकाइयां दिखाई दे रही हैं। ट्रेन दोपहर एक बजे द्वारका पहुंच गई। ट्रेन से उतरते ही हमने बापू की जन्मभूमि की मिट्टी को नमन किया। हमने होटल नटराज में ऑनलाइन बुकिंग करा रखी थी। पर रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही भूख लग रही थी, सो होटल पहुंचे से पहले जो शाकाहारी भोजनालय दिखा वहां खाने के लिए बैठ गए। खाने के बाद होटल नटराज पहुंचकर यात्रा की सारी थकान जाती रही। होटल का कमरा और साफ सफाई और बाकी इंतजाम काफी बेहतर था। कमरे का किराया महज 500 रुपये। होटल एमजी रोड पर मु्ख्य बाजार में स्थित है। रेलवे स्टेशन से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है।  
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- -  विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
 ( यात्रा का मार्ग - दिल्ली- माउंट आबू- अहमदाबाद - पोरबंदर - द्वारका - ओखा-भेट द्वारका - सोमनाथ- वेरावल- दीव- वेरावल- अहमदाबाद - गांधीनगर - वडोदरा -मुंबई - पूणे - पंचगनी- महाबलेश्वर- वाई- सतारा- कोपरगांव- शिरडी - नासिक - खंडवा- ओंकारेश्वर -उज्जैन - दिल्ली ) 


( PORBANDAR, RAIL , GANDHI, SRAI ROHILLA, PANTRY CAR FOOD  )

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