Thursday, July 25, 2013

त्रयंबकेश्वर में समाहित हैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश (08)

भगवान शंकर के बारह ज्योतिर्लिंग में आठवें स्थान पर आता है त्रयंबकेश्वर। त्रयंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र में नासिक शहर से 36 किलोमीटर दूर है। त्रि- अंबक यानी तीन नेत्रों वाले शिव। शिव का ये मंदिर समुद्र तल से ढाई हजार फीट की ऊंचाई पर पहाड़ों की तलहटी में बना है। गौतम और गंगा जी की प्रार्थना पर शिव यहां संसार के उपकार के लिए त्रयंबक रूप में विराजते हैं।
नाना साहब पेशवा ने बनवाया मंदिर - त्रयंबकेश्वर का मंदिर नाना साहब पेशवा ने बनवाया था। ये मंदिर काले पत्थरों से बना हुआ है। मंदिर के चारों ओर काले पत्थरों पर सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है। मंदिर का निर्माण 1755 में आरंभ हुआ था। निर्माण कार्य 1786 में जाकर पूरा हुआ। तब मंदिर के निर्माण में 16 लाख रुपये खर्च किए गए थे।  मुख्य मंदिर के चार द्वार हैं जिनमें उत्तर व पूर्व का द्वार विशाल है। यहां मंदिर के गर्भ गृह में बाकी मंदिरों की तरह शिवलिंग नहीं है। बल्कि यहां एक छोटे से गड्ढे में अंगूठे जैसे तीन लिंग दिखाई देते हैं। ये ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं।
 शिव के तीन प्रतीक यानी त्रयंबकेश्वर। इस शिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से निरंतर गोदावरी नदी के जल से अभिषेक होता रहता है। तीन लिंग चूंकि गड्ढे मे हैं इसलिए श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर के गर्भगृह में एक विशाल शीशा लगाया गया है जिसमें आप त्रयंबकेश्वर के दर्शन कर सकते हैं। हर सोमवार को मंदिर में भगवान शिव की पालकी निकाली जाती है। त्रयंबकेश्वर मंदिर में दूर दूर से लोग कालसर्प दोष के निवारण के लिए भी आते हैं।

गोदावरी यहां से निकलती है -  त्रयंबक मंदिर के निकट ब्रह्मगिरी पर्वत से पुण्य सलीला गोदावरी नदी निकलती है। स्कंद पुराण मेंगोदावरी महात्मय की कथा आती है। कहा जाता है एक समय में सालों इस क्षेत्र में घोर अनावृष्टि के कारण गौतम ऋषि घोर तप किया। तब भगवान वरुण ने प्रसन्न होकर वर दियाकि यहां तुम्हारे नाम से अक्षय जल वाला कुंड होगा। इसके बाद से ये इलाका हरा भरा हो गया। ब्रह्मगिरी पर्वत पर जहां गौतम ऋषि ने लंबा तप किया दो जल कुंड हैं जिन्हें राम कुंड और लक्ष्मण कुंड कहते हैं।

यहां से गोदावरी के उदगम तक पहुंचने के लिए पर्वत माला पर 700 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।



कैसे पहुंचे - त्रयंबकेश्वर मंदिर पहुंचने के लिए आपको नासिक से बसें मिल जाती हैं। या आप टैक्सी बुक करके भी पहुंच सकते हैं। आप नासिक शहर में ही रुक कर त्रंयबकेश्वर जाने का कार्यक्रम बना सकते हैं। वैसे मंदिर के आसपास भी आवासीय सुविधाएं उपलब्ध है। अगर आप त्रयंबकेश्वर में ही ठहरना चाहते हैं तो मंदिर से कुछ किलोमीटर पहले गजानन संस्थान अच्छा विकल्प हो सकता है।

महामृत्युंजय मंत्र
ओम त्र्यंबकम यजामहे ,सुगन्धिम पुष्टीवर्धनम।

ऊर्वारुकमीव बंधनात मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।

ज्यादा जानकारी के लिए यहां जाएं - http://trambakeshwar.com/

-    ---- माधवी रंजना




 (JYOTIRLINGAM, TEMPLE, SHIVA, NASIK, MAHARASTRA) 


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