Thursday, July 18, 2013

महात्मा फूले की धरती सतारा

वाई से हमारा अगला पड़ाव था सतारा। वैसे तो महाबलेश्वर, पंचगनी और वाई सभी सतारा जिले में ही आते हैं। पर हमारी आगे की ट्रेन सतारा रेलवे स्टेशन से थी। हमने वाई से सतारा के लिए बस ली। बस स्टैंड में महिलाएं टिकट काउंटर पर थीं। बस का समय होने पर बस के अंदर आकर टिकट चेक कर गईं। बस का दरवाजा बंद किया और ड्राईवर को चलने का आदेश दिया। इतना बेहतरीन अनुशासन कहीं नहीं देखा। 

महाराष्ट्र का जिला सतारा। महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फूले की जन्म स्थली है तो डाक्टर भीमराव अंबेडकर की स्कूली शिक्षा सतारा में हुई।सतारा पुणे से तकरीबन 90 किलोमीटर आगे महाराष्ट्र का बड़ा जिला है। 
संसद में महात्मा फूले की प्रतिमा 
इसी जिले में 11 अप्रैल 1827 को महात्मा फूले जन्म हुआ। फूले का परिवार सतारा जिले के खाटव तालुका के काटगुन गांव का रहने वाला था। बाद में उनका परिवार पुणे जाकर फूलों की माला गजरे आदि बनाने का काम करने लगा था। महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फूले की गिनती 19वीं सदी के महान समाज सुधारकों में होती है।
महात्मा फूले का स्त्री शिक्षा में बड़ा योगदान है। उनकी पुस्तक गुलामगिरी आंखे खोल देती है। कई लोग तो उन्हें सच्चे मायने में राष्ट्रपिता मानते हैं। सतारा की धरती पर बैठे हुए मैं इस महान व्यक्तित्व को नमन करता हूं। महात्मा फूले का निधन 28 नबंबर 1890 को पुणे मे हुआ। पर 63 साल के जीवन में फूले दंपत्ति दलित, पिछड़े और अछूतों के उद्धार के लिए महान काम करके गए जिसके लिए उन्हें पीढ़ियां याद करती हैं। महाबलेश्वर, पंचगनी, वाई जैसे पर्यटक स्थल सतारा जिले में ही आते हैं। हमलोग वाई से दोपहर में सतारा बस स्टैंड पहुंचे। महाराष्ट्र का लोकप्रिय खाना झुणका भाकरी यहां आपको खाने को मिल सकता है। इसमें ज्वार की रोटी और दाल होती है। 20 रुपये में रोटी और दाल।

बस स्टैंड विशाल पर रेलवे स्टेशन बिल्कुल छोटा 

सतारा का बस स्टैंड काफी बड़ा हैं। यहां से महाराष्ट्र के तमाम शहरों के लिए बसें मिलती हैं। बस स्टैंड में वेटिंग हॉल और बड़ी संख्या में बसों के लिए प्लेटफार्म भी बने हैं। अलग अलग दिशाओं की बसों के लिए अलग अलग खंड बने हैं। अंदर खाने पीने के रेस्टोरेंट्स भी हैं। प्रचार के लिए टीवी स्क्रीन भी लगी हैं। 
सतारा शहर की आबादी चार से पांच लाख के बीच है। कभी यहां बजाज के स्कूटर का कारखाना हुआ करता था जो अब बंद हो गया है। पहाड़ की तलहटी में बसा सतारा शहर रात की रोशनी में खूबसूरत दिखाई देता है।

सतारा रेलवे स्टेशन यहां के बस स्टैंड से सात किलोमीटर आगे शहर के बाहर है। स्टेशन से बस स्टैंड के बीच सिटी बस सेवा चलती है। या फिर आरक्षित आटो रिक्शा से स्टेशन जाया जा सकता है। रेलवे स्टेशन के आसपास एक भी दुकान नहीं है। हालांकि सतारा रेलवे स्टेशन से होकर कई महत्वपूर्ण रेलगाड़ियां गुजरती हैं। लेकिन यह स्टेशन किसी गांव के छोटे से स्टेशन सा लगता है। कई बार हो सकता है यहां रात को आप ट्रेन से उतरें तो आपके अलावा कोई भी यात्री स्टेशन पर न हो। लेकिन आपको स्टेशन से शहर जाने के लिए आटो रिक्शा मिल जाएंगे। 

माउली में संगम है कृष्णा और वेणा का -  वास्तव में सतारा रेलवे स्टेशन माउली में है। माउली में कृष्णा और वेणा नदियों का संगम भी है। संगम पर एक मंदिर और घाटों का निर्माण कराया गया है। सतारा रेलवे स्टेशन का कोड है STR रेलवे स्टेशन पर एक छोटी सी कैंटीन है, जहां से हमने समोसे खरीद कर खाए। स्टेशन पर कुल दो ही प्लेटफार्म हैं। एक अप ट्रेनों के लिए दूसरी डाउन के लिए। 


सतारा रेलवे स्टेशन से हमारी ट्रेन रात में थी पर अंधेरा होने से पहले ही हमलोग सतारा रेलवे स्टेशन पहुंच जाते हैं। फिर अगले कुछ घंटे ट्रेन का इंतजार....हमलोग महाराष्ट्र एक्सप्रेस से कोपरगांव जाने वाले हैं। ट्रेन 7.27 बजे आती है। दो मिनट का ठहराव है। महाराष्ट्र एक्सप्रेस (11039) कोल्हापुर से चलती है। यह मिराज, सांगली होती हुई सतारा के आगे पुणे, दौंद होकर जाती है। अहमदनगर के बाद हमलोग कोपरगांव में उतर गए। पर यह ट्रेन शेगांव, अकोला, भंडारा होते हुए गोंदिया तक जाती है। हालांकि इस ट्रेन में केटरिंग नहीं है। पर रास्ते एक सहयात्री की सलाह पर नीरा नामक एक छोटे से स्टेशन पर हमने खाना खरीदा। आईआरसीटीसी के वेंडर सौजन्य से ही महज 35 रुपये में शानदार खाना था।
इस ट्रेन का नाम यूं ही महाराष्ट्र एक्सप्रेस नहीं है। यह महाराष्ट्र का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा घूमते हुए जाती है। 1346 किलोमीटर के सफर में इसके कुल 62 ठहराव हैं। सुबह के साढ़े चार बजे अभी अंधेरा पर हमलोग कोपरगांव रेलवे स्टेशन पर उतर चुके हैं। बाहर टाटा मैजिक शिरडी के लिए आवाज लगा रहे हैं। 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य- 
((WAI, SATARA, MAHARASTRA, KRISHNA RIVER ) 

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