Saturday, June 8, 2013

विष से बचाव करते हैं नागेश्वर ( 10वां ज्योतिर्लिंग)


नागेश्वर मंदिर भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है। द्वारका के पास दारुका वन इलाके में स्थित ये मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंग में 10वें स्थान पर आता है। नागेश्वर यानी नागों के ईश्वर। कहा जाता है कि इस मंदिर में पूजा से सर्प के विष से बचाव होता है। रुद्र संहिता में भगवान शिव को दारुकावनें नागेश कहा गया है। किसी जमाने में इस मंदिर के आसपास घने जंगल थे। आज भी मंदिर के आसपास कोई आबादी नहीं है। इसलिए यहां दिन में ही दर्शन के लिए जा जा सकता है।
कहा जाता है इस इलाके में दारुका नामक राक्षसी का आतंक था। सुप्रिय नामक शिवभक्त वैश्य ने शिव का लगातार ध्यान किया। तब शिव ने उसे ज्तोतिर्लिंग रुप में दर्शन दिया और राक्षसी का मारने के लिए अमोघ अस्त्र प्रदान किया। समस्त राक्षसों का संहार करने के बाद सुप्रिय शिवधाम को चला गया। भगवान शंकर अपने भक्तों की रक्षा के लिए दारुका वन में ज्योतिर्लिंग नागेश्वर के रूप में निवास करने लगे। कहा जाता है कि जो इस मंदिर में शिव की उत्पत्ति का महात्मय सुनेगा वह परमपद को प्राप्त करेगा।



नागेश्वर मंदिर में मुख्य शिवलिंग मूर्ति आंतरिक छोटे से गर्भ गृह में पृथ्वी की सतह से नीचे है। वर्तमान में इस शिव मंदिर का विस्तार और जीर्णोद्धार गुलशन कुमार के ट्र्स्ट ने करावाया है। मंदिर के समीप ही शिव जी की 85 फीट ऊंचाई की प्रतिमा भी बनवाई गई है। ये प्रतिमा कई किलोमीटर दूर से ही दिखाई देती है।


कैसे पहुंचे - गुजरात के द्वारका शहर से 17 किलोमीटर दूर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है। मंदिर द्वारका ओखा मार्ग पर है। इसलिए ये ओखा और भेंट द्वारका से भी नजदीक है। आप द्वारका दर्शन बस पैकेज में भी नागेश्वर जा सकते हैं। बस वाले यहां सीमित समय देते हैं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आप द्वारका से आरक्षित आटो रिक्शा करके जा और आ सकते हैं। इसमें आप मंदिर में अपनी इच्छानुसार पूजा अभिषेक के लिए पूरा समय दे सकते हैं।

-    -       माधवी रंजना


 (JYOTIRLINGAM, TEMPLE, SHIVA, GUJRAT, DWARKA) 

2 comments:

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    महादेव महादेव की जय हो ��������������

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