Sunday, June 2, 2013

पोरबंदर की चौपाटी पर मौज मस्ती

चौपाटी मतलब समंदर का किनारा। शाम गुजारने के लिए भला समंदर के किनारे से अच्छी जगह क्या हो सकती है। बापू के शहर पोरबंदर में भी चौपाटी है। काफी भव्य नहीं पर सुंदर है। बस स्टैंड के बगल में पारसी समाज का अंतिम स्थल और चौपाटी है। आप एमजी रोड से टहलते हुए चौपाटी तक पहुंच सकते हैं। 

यहां अरब सागर गर्जना करता हुआ सुनाई देता है। समुद्र का किनारा बहुत साफ नहीं है। लिहाजा यहां स्नान करने योग्य स्थान नहीं है। पर चौपाटी के किनारे रौनक है। एक जगह पक्का घाट बनाया गया है। समंदर के किनारे एक मनोरंजन पार्क भी बना है। यहां बच्चों के लिए ढेर सारे झूले खिलौने आदि हैं। निजी वाहन से आने वालों के लिए पार्किंग का भी इंतजाम है। थक गए हैं तो पेट पूजा भी कर सकते हैं।

बड़े से हाथी पर चढ़कर फिसलने में अनादि को खूब आनंद आया। हाथी एक सीमेंट कंपनी का विज्ञापन है जो मजबूती का प्रतीक है। पोरबंदर के समुद्र तट पर सबसे यादगार रहा ऊंट की सवारी। वैसे तो ऊंट की सवारी कई जगह की जा सकती है। लेकिन यहां मजह 10 रुपये में ऊंट की सवारी। बच्चों के लिए 10 तो बड़ों के लिए 20 रुपये। सो मैंने भी ऊंट की सवारी का आनंद लिया। हर चक्कर के बाद नए लोगों को उतारने और बिठाने के लिए ऊंच महाराज को बैठना और फिर उठना पड़ता है। लेकिन ऊंट की सवारी का रोमांच अद्भुत है।

ऊंट पर बैठते ही आप एक मंजिले मकान के बराबर ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं। वहीं ऊंट जब चलता है तो उसकी चाल में अजब सी मस्ती होती है। ऊंट की सवारी दूसरे पर्यटक स्थलों पर भी की जा सकती है लेकिन द्वारका और पोरबंदर में जितने सस्ते में आप ऊंट की सवारी का आनंद ले सकते हैं और कहीं भी मुश्किल है।

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विद्युत प्रकाश मौर्य  

( (PORBANDAR, CHAUPATI, SEA, CAMEL RIDE ) 

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