Monday, July 21, 2014

रेल यात्रा का पहला पड़ाव- पानीपत (( 5 ))


(पहियों पर जिंदगी 5 )
शिविर में पांच अक्टूबर को यात्रियों को पैकिंग आदि के लिए आराम का समय दिया गया। लेकिन मेरे पास कुछ न कुछ काम तो था ही। इस दौरान मेरी कभी रवि नारायण जी तो कभी मेरी सुकुमारी (केरल) और के सुकुमारन से बहस हो गई। पर वे बड़े दिल वाले और अनुभवी लोग हैं बाद में इन बातों को भूला देते हैं।

रात को 12 बजे हमें पानीपत शटल ट्रेन से पानीपत चलने को कहा गया। सुबह पांच बजे हमारी ट्रेन पानीपत जंक्शन पहुंच गई। स्टेशन पर ही जागरण गीत हुआ। इसके बाद स्थानीय आयोजक राम मोहन राय सैनी एडवोकेट से मिलना हुआ। वे निर्मला देशपांडे के संगठन के साथ काम करते हैं। सद्भावना मार्च के साथ हमें आर्य सीनियर सेंकेडरी स्कूल ले जाया गया। यहां हमें नास्ता मिला। स्कूल में विशाल जनसभा थी। सभी युवाओं ने अपने अपने राज्य की भाषा में नारे लगातर राष्ट्रीय एकता का परिचय दिया। सबका मतलब होता है हम भारत देश को एक बनाकर रखेंगे। हमारे साथ जर्मनी की दो युवतियां भी हैं सेंड्रा और मारेन। वे जर्मन भाषा में कहती हैं। विए वाला फ्रीडन। ( वी वांट वर्ल्ड पीस)


मंच से सुब्बराव जी बता रहे हैं हिंदुस्तान में चार धर्मों का उदय हुआ। हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख। वहीं नागालैंड, मिजोरम, मेघालय की 90 फीसदी जनता ईसाई है। ऐसे में भारत को किसी एक धर्म का राष्ट्र कैसे कहा जा सकता है। देश को बड़े दिलवाले इंसान चाहिए। हर शहर में एक सद्भावना परिषद का निर्माण होना चाहिए जो हर माह कम से कम एक दिन सर्व धर्म प्रार्थना करे। हर धर्म के लोग एक दूसरे के त्योहारों में शामिल हों। 
कभी कभी मुझे सुब्बराव जी का व्याख्यान राजनैतिक लगने लगता है। लेकिन जल्द ही मेरा भ्रम दूर हो जाता है। उनका व्यक्ति वास्तव में एक सामाजिक कार्यकर्ता है जो सर्वधर्म मम भाव की बात करता है।
विद्यालय से हमलोग बसों से आगे बढ़े। कालाअबं। पानीपत वार मेमोरियल। यहां पानीपत की तीन ऐतिहासिक लड़ाइयां हुईं। ( 1526, 1556) सन 1761 में अंतिम लड़ाई में अंग्रेजों ने मराठाओं को पराजित किया। भारत पर अधिकांश विदेशी आक्रमण उत्तर पश्चिम से हुए। दिल्ली देश की राजधानी थी। पानीपत उसके उत्तर में लड़ाई के लिए उपयुक्त स्थल था। यहां युद्ध के लिए समतल भूमि और यमुना नदी के पानी की उपलब्धता थी। कालाआम में युद्ध स्मारक का निर्माण किया गया है। यहां एक काले आम का पेड़ है जो तीसरी लड़ाई के दौरान मराठों के सैन्य संचालन का केंद्र था।


दोपहर में हमलोग राजाखेड़ी गांव में गए। गांव में भोजन उम्दा मिला। स्कूल में एक सभा हुई। गांव के सरपंच ने सुब्बराव जी को पगड़ी और छड़ी भेंट की। खाने के बाद मैंने और आनंद भाई ने गांव के बच्चों को खेल सीखाए।

शाम को पानीपत के किला मैदान में सभा हुई। ये पानीपत का सबसे ऊंचा स्थल है। नगरपालिका अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार लांबा मौजूद थे। एएल यादव राष्ट्रीय सेवा योजना के सहायक निदेशक, हरियाणा युवा शक्ति के सुरेश राठी, दरियाव सिंह मलिक जैसे लोगों ने आयोजन में भूमिका निभाई। हमारे साथी जयसिंह जादोन ने रेलगाड़ी की धुन में ताली बजाकर सबको आनंदित कर दिया।
- विद्युत प्रकाश मौर्य
(SADBHAWNA RAIL, PANIPAT ) 



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