Wednesday, June 26, 2013

सपनों सा सुंदर है दीव

गोवा से अलग होने के बाद दमन दीव केंद्र शासित राज्य हैं। हालांकि दमन और दीव के बीच 700 किलोमीटर की दूरी है। पर दीव गुजरात के ज्यादा करीब है।

छुट्टियां बीताने के लिए दीव सिर्फ गुजरातियों को ही नहीं बल्कि देश भर के लोगों को आकर्षित करता है। पूरा दीव आप 25 किलोमीटर में घूम सकते हैं। पर दीव के बस स्टैंड से फोर्ट रोड पर आगे बढ़ने पर दीव का मुख्य बाजार है। यहीं रहने व खाने के लिए प्रमुख होटल हैं। फोर्ट रोड के एक तरफ मद्धम मद्धम हिलोरें लेता समंदर है तो दूसरी तरफ दीव का बाजार।
आप इतिहास की गाथाओं के साथ कुदरत का मधुर संगीत भी सुन सकते हैं दीव में।

दीव 52 हजार की आबादी वाला एक छोटा सा द्वीप है । 30 मई, 1987 को गोवा को राज्यों का दर्जा दिए जाने के बाद दमन और दीव अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। दीव जिले में साक्षरता दर वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 83.36% है। दीव में 12वीं के बाद कोई स्कूल नहीं है। दीव के छात्रों 12 वीं कक्षा के बाद उच्चतर अभ्यास के लिए 17 किलो मीटर की दूरी पर स्थित ऊना में आर्ट्स और कॉमर्स कॉलेज में जाना पड़ता है । 

दीव में समंदर के किनारे हर जगह सड़क पर बैठने के लिए सुंदर बेंच और बच्चों के लिए झूले लगाए गए हैं। साफ सफाई इतनी है कि देखकर ऐसा नहीं लगता कि हम भारत के ही किसी शहर में हैं। 
फोर्ट रोड पर आगे जाकर दीव का प्रसिद्ध किला है। दीव 1961 तक पुर्तगाल के कब्जे में था। इसलिए किले में पुर्तगालियों से जुड़ी स्मृतियां हैं। पुर्तगाली चर्च के अलावा यहां युद्ध के हथियारों की स्मृतियां हैं। किले के अंदर ही दीव की जेल भी है। दीव में अपराध बहुत कम है इसलिए जेल में कैदी दो चार ही रहते हैं। किले को देखकर लगता है कि इसकी सुरक्षा को अभेद्द बनाने के लिए खूब पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

किले को देखकर लगता है कि इसकी सुरक्षा को अभेद्द बनाने के लिए खूब पुख्ता इंतजाम किए गए थे। किले के अंदर भागने के लिए कई सुरंगों का भी निर्माण किया गया है। ये किला पुर्तगालियों का है, लेकिन पुर्तगालियों से पहले भी दीव का इतिहास है।
किला तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है। किले के अंदर संत लुसिया बुर्ज और टावर हाउस है। यहां समंदर का नजारा अदभुत दिखाई देता है। किले में प्रवेश का कोई टिकट नहीं है, लेकिन किले में प्रवेश शाम को पांच बजे के बाद बंद हो जाता है।

दीव किले के पास ही दीव का प्रसिद्ध निर्मल माता चर्च है। इसके अलावा दीव में समर हाउस पर बैठकर आप समंदर का नजारा कर सकते हैं। आईएनएस खुखरी की स्मृति में एक माडल दीव में बनाया गया है।
इसके पास ही गंगेश्वर महादेव का मंदिर है। ये दीव का एकमात्र मंदिर है जहां सैलानी जाते हैं। इस मंदिर में सागर की लहरें लगातार शिव लिंग को छूती रहती हैं।
-    ---- विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com

  

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