Monday, June 17, 2013

जय सोमनाथ - स्वयं चंद्रमा ने बनवाया था मंदिर ((01))


सोमनाथ मंदिर यानी द्वादश ज्योतिर्लिंग में पहला स्थान। गुजरात के शहर सोमनाथ में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है सागर की लहरों के किनारे इसका निर्माण स्वयं चंद्रमा ने कराया था। सोमनाथ को सोमेश्वर भी कहते हैं यानी सोम (चंद्र) के नाथ ( ईश्वर)। इतिहास में सोमनाथ मंदिर कई बार बना और टूटा। आजकल जो भव्य सोमनाथ मंदिर है इसे देश आजाद होने के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल और अन्य नेताओं ने जन सहयोग से बनवाया।
11 मई 1951 को देश के पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में सोमनाथ की पुनः प्राण प्रतिष्ठा की। ये मंदिर सिर्फ आस्था केंद्र नहीं बल्कि हमारे राष्ट्र की अस्मिता का भी प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर देश के नए बने मंदिरों वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। मंदिर की इमारत सात मंजिला है। मंदिर का गुंबद 155 फीट ऊंचा है।

 मंदिर खुलने का समय - मंदिर सुबह छह बजे से रात्रि 9.30 बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहता है। सुबह सात बजे दोपहर 12 बारह बजे और शाम 7 बजे मंदिर में आरती होती है। 
अगर आपका सोमवार के दिन ही सोमनाथ के दर्शन का संयोग बने तो कहना ही क्या। हमारे साथ कुछ ऐसा ही हुआ। हम जिस दिन पहुंचे संयोग से सोमवार था। 


सोमनाथ की कथा - सोमनाथ की कथा का वर्णन स्कंदपुराण में आता है। चंद्रमा की 27 पत्नियां थीं। लेकिन वे 26 पत्नियों को सर्वाधिक प्रेम अपनी रुपवती पत्नी रोहिणी पर बरसाते थे। नाराज बाकी पत्नियों ने पिता दक्ष प्रजापति से शिकायत की। चंद्रमा के नहीं मानते पर दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को क्षय होने का शाप दिया।
शाप से मुक्ति के लिए चंद्रमा ने मृत्युंजय भगवान शिव की लंबी आराधना की। तब शिव ने प्रसन्न होकर चंद्रमा से कहा कि शाप से पूरी तरह मुक्ति संभव नहीं है लेकिन शुक्ल पक्ष में तुम्हारी एक कला रोज बढ़ जाता करेगी। वहीं कृष्ण पक्ष में रोज एक काया का क्षय होगा। 

मंदिर के बारे में कहा जाता है सोमनाथ मंदिर के मूल निर्माता स्वयं चंद्रमा हैं। मंदिर के तटपर हिलोरें लेती सागर की लहरें मानो 24 घंटे शिव का जलाभिषेक कर रही होती हैं। मंदिर परिसर में बैठने पर हमेशा सागर की लहरों का दिव्य संगीत सुनाई देता है।

लाइट एंड साउंड शो – सोमनाथ मंदिर के परिसर में रोज शाम 7.45 बजे मंदिर परिसर में एक घंटे का लाइट एंड साउंड शो होता है। इस शो में सागर कथावाचक के रुप में सोमनाथ मंदिर के बार बार बनने और विध्वंस होने की दास्तान बड़े ही रोचक अंदाज में सुनाता है। 

अगर आप सोमनाथ पहुंचे हैं तो लाइट एंड साउंड शो जरूर देखें। लाइट एंड साउंड शो के लिए टिकट लेना पड़ता है।आप समय से पहले पहुंच कर टिकट लेकर अपना स्थान सुनिश्चित कर लें। 

कैसे पहुंचे - सोमनाथ का मंदिर गुजरात के सोमनाथ नामक शहर में समंदर के किनारे स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन सोमनाथ है। पर छह किलोमीटर पहले वेरावल नामक रेलवे स्टेशन है, जहां तक काफी ट्रेनें जाती हैं। धीरे धीरे सोमनाथ विकसित हो रहा है पर वेरावल बड़ा बाजार और रेलवे का जंक्शन है। सोमनाथ के लिए गुजरात के अहमदाबाद से सीधी ट्रेनें हैं। द्वारका से भी सोमनाथ के लिए सीधी ट्रेन है।  

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द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥

एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति।

कर्मक्षयो भवेत्तस्य यस्य तुष्टो महेश्वरा ॥




कहां कहां हैं 12 ज्योतिर्लिंग 

1- सोमनाथ - सोमनाथ पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है।
2- मल्लिकार्जुन  - यह ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है।
3- महाकालेश्वर - यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कही जाने वाली उज्जैन नगरी में स्थित है।
4- ओंकारेश्वर-  ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप नर्मदा तट पर स्थित है।

5- केदारनाथ- केदारनाथ स्थित ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में स्थित है। बाबा केदारनाथ का मंदिर बद्रीनाथ के मार्ग में स्थित है।
सोमनाथ - सागर करता है शिव का नमन। 

6- भीमाशंकर - भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले में मंचर के पास स्थित है।

7- काशी विश्वनाथ -विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के काशी में स्थित है।

8- त्र्यंबकेश्वर - यह ज्योतिर्लिंग गोदावरी नदी के  उदगम के पास महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है।
9- वैद्यनाथ - श्री वैद्यनाथ शिवलिंग झारखण्ड प्रान्त में देवघर में स्थित है।
10-नागेश्वर  - यह ज्योतिर्लिंग गुजरात में द्वारका के बाहरी इलाके में स्थित है।
11- रामेश्वरम  - यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामनाथपुरम नामक स्थान में स्थित है। यह स्थान हिंदुओं के चार धामों में से एक भी है।
12-घृष्णेश्वर मन्दिर - घृष्णेश्वर महादेव का मंदिर महाराष्ट्र औरंगाबाद शहर के पास एलोरा की गुफाओं के पास स्थित है।



- श्रीरुद्राष्टकम -  

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ 1॥

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ 2॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ 3॥

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं
 मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ 4॥

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् ।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ 5॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्द संदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ 6॥

न यावत् उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत् सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ 7॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥ 8॥

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥

-  प्रस्तुति - माधवी रंजना
 

(SOMNATH, GUJRAT, SHIVA, LILAWATI BHAWAN )

 (JYOTIRLINGAM, TEMPLE, SHIVA) 

1 comment:

  1. बहुत गहरी जानकारी पोस्ट की आपने सर,
    https://www.facebook.com/buddhadarshan/

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