Monday, July 22, 2013

नासिक में गोदावरी तीरे लगता है कुंभ

नासिक शहर के बीचों बीच बहती है गोदावरी नदी। गोदावरी को गौतम गंगा भी कहते हैं। महाराष्ट्र में इस नदी का सम्मान गंगा के सदृश ही है। गोदावरी नदी के तट पर ही हर 12 साल बाद विशाल कुंभ का मेला लगता है।

नासिक के अलावा कुंभ उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर, प्रयाग में संगम पर और हरिद्वार में गंगा तट पर लगता है। नासिक में गोदावरी के तट पर खूबसूरत पक्के घाट बने हुए हैं काफी कुछ हरिद्वार के हर की पौड़ी की तरह। इनमें रामकुंड घाट प्रमुख है। 

हर शाम को मां गोदावरी की आरती - रामघाट पर ही सिंहस्थ के शाही स्नान का मुख्य घाट है। इस घाट पर रोज शाम को 7.30 बजे गोदावरी मां की महाआरती होती है। घाट पर कई मंदिर बने हैं। इन मंदिरों में प्रचीन गोदावरी मंदिर और महाकुंभ के मुख्य मंदिर आदि प्रमुख हैं। गोदावरी के मनोरम तट पर सालों पर भर लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं। वहीं कुंभ के समय तो गोदावरी तट पर श्रद्धालुओं का महासमुद्र नजर आता है। 

कपालेश्वर मंदिर - गोदावरी के तट के ठीक ऊपर शिव कपालेश्वर मंदिर है। यह देश का शायद एकमात्र शिव का ऐसा मंदिर है जहां पर मंदिर के बाहर शिव के वाहन नंदी बैल की कोई प्रतिमा नहीं है। यहां शिव अपने वाहन के बिना ही विराजते हैं।

पंचवटी जहां से हुआ सीता का हरण  - कभी नासिक का पूरा इलाका घने जंगल का हुआ करता था। तभी यहां अयोध्या के राजा राम, लक्ष्मण और सीता वनवास के काल में रहे। नासिक का यह इलाका पंचवटी कहलाता है। पर अब पंचवटी शहर के बिल्कुल मध्य में आ चुका है। पंचवटी में सीता मैया का मंदिर भी है।

इस मंदिर को सीता गुफा कहते हैं। हालांकि गुफा बहुत पुरानी नहीं है। इस गुफा के अंदर मां सीता का मंदिर है। सीता गुफा के बाहर एक बड़ा वट वृक्ष है। कहा जाता है यहीं से रावण ने सीता का हरण किया था। यहां सीता मां की पर्णकुटी भी बनी है। हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पर्णकुटी और पंचवटी मंदिर को देखने के लिए आते हैं। यहां दिन भर मेले जैसा माहल बना रहता है। 
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( NASIK, GODAVARI, RIVER, MAHAKHUMBHA, MAHARASTRA  ) 

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