Thursday, June 13, 2013

46 साल से चल रही है अखंड रामधुन


 प्रभु प्रेम की नगरी द्वारा में भक्ति के अलग अलग रंग देखने को मिलते हैं। द्वारकाधीश मंदिर के बगल में देवी भुवन मार्ग से गुजरते हुए आपके कान में श्री राम जयराम जयजय राम की धुन सुनाई देगी। ये धुन यहां पिछले 46 साल से अनवरत जारी है। 24 घंटे सातों दिन, साल भर ये सिलसिला लगातार जारी रहता है। हरिनाम संकीर्तन मंदिर में एक माइक के पास कुछ लोग हारमोनियम, ढोल और झाल के साथ रामधुन गाते रहते हैं। चेहरे बदल जाते हैं पर रामधुन जारी रहता है। कीर्तन ही वास्तविक प्रभु प्रेम है। कीर्तन मन को निर्मल करता है। शांत करता है। पापों को हर लेता है। ये राम नाम की खुमारी है जो दिन रात चढ़ी रहती है।
रामधुन का ये सिलसिला 1967 में आरंभ हुआ। स्वामी प्रेम भिक्षु महाराज की प्रेरणा से राम धुन का आरंभ हुआ। स्वामी प्रेम भिक्षु महाराज मूल रूप से बिहार में चंपारण के छितौनी के रहने वाले थे लेकिन वे ईश्वर की प्रेरणा से गुजरात पहुंचे। इस प्रदेश को उन्होंने अपनी भक्ति का केंद्र बनाया। द्वारका में रामधुन का जाप तो सोमनाथ के भालुका तीर्थ के पास कान्हा की भक्ति में हरे राम हरे कृष्णा और जामनगर में जय बजंरग बली के पाठ का अनवरत सिलसिला दशकों से जारी है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी इच्छा से कीर्तन में समय देते हैं। मंदिर अपनी स्वेच्छा से कीर्तन में लंबा समय देने वालों के लिए भोजन आवास आदि के भी इंतजाम करता है।
 स्वामी प्रेम भिक्षु महाराज का गुजरात में काफी सम्मान था। जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद जी भी उनका काफी सम्मान करते थे। स्वामी प्रेम भिक्षु महाराज ब्रह्मलीन हो चुके हैं लेकिन उनकी प्रेरणा से अंखड और अनवरत भक्ति का सिलसिला जारी है। तमाम लोग अपनी श्रद्धा से इस हरिनाम संकीर्तन में हिस्सा लेते हैं। कुछ लोग घंटों तक तो कुछ लोग कई दिन या महीनों तक भी।
-  -------  माधवी रंजना  

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