Thursday, July 17, 2014

सद्भावना रेल यात्रा यानी पहिए पर जिंदगी (( 1))


( पहियों पर जिंदगी-01)

सालों भर 24 घंटे रेल गाड़ी में। खाना-पीना, सोना सब कुछ पटरी पर दौड़ते छुक-छुक के सफर के साथ। साथ ही देश के अलग अलग हिस्सों में लोगों को राष्ट्रीय एकता और सद्भावना का संदेश देना। सोच कर ही रोमांच भर आता है। लेकिन सचमुच एक ऐसे सफर की शुरुआत हुई थी 1993 में। दो अक्टूबर 1993 से प्रस्तावित सद्भवाना रेल यात्रा का सफर दिल्ली से शुरु होकर देश भर में घूमते हुए 31 मई 1994 को दिल्ली में ही समाप्त हुआ।

इस अनूठी रेलयात्रा के निदेशक थे महान गांधीवादी एस एन सुब्बराव। सुब्बराव इससे पहले 1969 में गांधी की जन्मशती वर्ष पर चलाई गई प्रदर्शनी ट्रेन के भी प्रभारी थे। तब पूरे देश में बड़ी लाइन नहीं थी। इसलिए गांधी प्रदर्शनी ट्रेन छोटी लाइन और बड़ी लाइन पर अलग अलग चलाई गई थी। साल 1993 का भी खास महत्व था। सौ साल पहले 1893 में शिकागो में हुए सर्व धर्म सम्मेलन में हिंदुस्तान के नौजवान संन्यासी स्वामी विवेकानंद ने व्याख्यान देकर भारत के नाम का डंका पूरी दुनिया में बजाया था।


स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण से समग्र विश्व में एक नई आध्यात्मिक क्रांति का सूत्रपात किया था। साल 1994 भूदान आंदोलन के प्रणेता विनोबा भावे का जन्मशती वर्ष है। विवेकानंद शताब्दी समारोह की मुख्य समिति जिसके 12 सदस्य हैं और मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह उसके अध्यक्ष हैं ने अपनी बैठक में विवेकानंद और गांधी के संदेशों का प्रसार करने वाली एक विशेष रेलगाड़ी चलाने का दायित्व राष्ट्रीय युवा योजना के निदेशक एस एन सुब्बराव को सौंपा।

एस एन सुब्बराव 16 सितंबर 1993 को शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन से वापस लौटे हैं। ये सम्मेलन विश्व धर्म सम्मेलन के सौ साल होने की याद में आयोजित किया गया था। गांधी, विवेकानंद, विनोबा के संदेशों का प्रसार करने के लिए साल भर एक विशेष ट्रेन चलेगी इसकी चर्चा कुछ महीने पहले से शुरू हो गई थी।

तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह किसी जमाने में कांग्रेस सेवा दल में सुब्बराव जी के शिष्य रह चुके हैं। इसलिए वे सुब्बराव जी का काफी सम्मान करते थे। वहीं रेल मंत्री सीके जाफरशरीफ भी सुब्बराव जी को अपने गुरु समान मानते थे। पर रेल यात्रा के संचालन के लिए सुब्बराव जी और उनकी संस्था को यह जिम्मेवारी इसलिए दी गई क्योंकि संस्था के पास युवा शिविरों के संचालन का बहुत बड़ा अनुभव था। सुब्बराव जी 1989 में केवड़िया, गुजरात में 25 हजार युवाओं के शिविर का संचालन कर चुके हैं। वहीं 1992 के जनवरी में बेंगलुरु में 1200 युवाओं के शिविर का संचालन कर चुके हैं। 
रेल यात्रा की जरूरत 
दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराए जाने के बाद देश में बने माहौल के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार चाहती थी कि देशव्यापी ऐसा आयोजन हो जिसमें सर्व धर्म समभाव और सदभावना की बातें की जाए। देश के बहुलतावादी संस्कृति, सर्वधर्म समभाव के विचारों का देशव्यापी प्रचार प्रसार करने के लिए सद्भावना रेल यात्रा इस सिलसिले में एक अच्छा प्रयोग हो सकता था। रेल मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय युवा योजना के सहयोग से यह संभव हो सका। सुब्बराव जी के नेतृत्व में राष्ट्रीय युवा योजना ने मई 1991 में वाराणसी,  सितंबर 1991 में अलीगढ़ और मार्च 1993 में कानपुर में सांप्रदायिक सौहार्द शिविरों का आयोजन किया था। ये तीनों शहर दंगा प्रभावित थे। इन शिविरों के आयोजन से इन शहरों में अच्छा संदेश गया था। 
इसलिए देश भर में सदभावना रेल यात्रा संचालित करने का दायित्व दिया गया महान गांधीवादी एसएन सुब्बराव को।
देश भर में राष्ट्रीय युवा योजना यानी नेशनल यूथ प्रोजेक्ट ( एनवाईपी) के नेटवर्क के साथियों को रेल यात्रा में शामिल होने के लिए पत्र लिखे जा चुके थे। लेकिन दो अक्टूबर से आरंभ होने वाली यात्रा के लिए महज 15 दिनों में युवाओं को दिल्ली के आधार शिविर में 28 सितंबर तक पहुंचने को लिखा गया। युवाओं में जोश था एक नई किस्म की यात्रा के लिए लोग पहुंचने लगे दिल्ली पूरे देश से। 
ज्यादातर ऐसे युवाओं का चयन किया गया था जो एनवाईपी के पुराने कार्यकर्ता हों। उनकी सेहत अच्छी हो और साइकिल चला पाने में सक्षम हों। उनकी उम्र 16 से 35 साल के बीच हो। हालांकि कुछ अनुभवी बुजुर्ग लोग भी यात्रा में आ गए हैं। एक युवा के लिए कम से कम 20 दिनों तक रेल यात्रा में रहना आवश्यक है। 

सदभावना रेल यात्रा के प्रारंभिक ठहराव ( पहला चरण ) - सितंबर 1993 से- 
1. नई दिल्ली   2. पानीपत
3. कुरुक्षेत्र    4.अंबाला 
5. चंडीगढ़   6. नंगल 
7. मंडी गोबिंदगढ़ 8. लुधियाना
9. जालंधर 10. अमृतसर
11. पठानकोट 12. जम्मू 
13. सहारनपुर 14. देहरादून
15.हरिद्वार 16. शाहजहांपुर 
17. बरेली 
नवंबर 1993 - 18. मुरादाबाद 19. कानपुर  20. लखनऊ  21. फैजाबाद 
22. इलाहाबाद 23. वाराणसी 24. बस्ती 25. गोरखपुर 26. छपरा 27 हाजीपुर
28. मुजफ्फरपुर  29. समस्तीपुर। 
दिसंबर 1993 - 30. बरौनी 31. पटना 32. भागलपुर 33 न्यू  जलपाईगुड़ी 34 अलीपुर दुआर 35 रंगिया 36 गुवाहाटी 37 बोलपुर (शांतिनिकेतन) 38 हावड़ा (कोलकाता)

जनवरी 1994 - 39. टाटानगर 40. बालेश्वर 41 कटक 42. भुवनेश्वर 43 पुरी 44. बेरहामपुर 45. विजयनगरम 46. विशाखापत्तनम 47. काकीनाडा 48 राजामुंदरी 49 विजयवाड़ा 50 नेल्लोर 51 तिरुपति 52 चेन्नई 

फरवरी 1994 - 53. काटपाडी  54 जोलारपेट 55 बंगारपेट 56 सेलम 57 इरोड
58. त्रिचुरापल्ली  59 डिंडिगुल  60. मदुरै 61 कन्य़ाकुमारी 62 त्रिवेंद्रम 63  क्विलोन 
64 कोट्टायम 65 कोच्चि 66 त्रिचूर 67 कालीकट 68 कन्नूर 69 मंगलोर 70 पालघाट

मार्च 1994 -  71 कोयंबटूर 72. बंगलुरू 73 अनंतपुर 74. रायचूर 75. हैदराबाद
76 वारंगल 77. गुलबर्गा  78. शोलापुर 79. पुणे 80. मुंबई 81 मनमाड 82 जलगांव
83. भुसावल 
अप्रैल 1994 - 84. अमरावती 85. वर्धा 86. नागपुर 87. सूरत 88. वडोदरा 
89. अहमदाबाद 90. गांधीनगर 91. गोधरा 92. रतलाम 93.उज्जैन 94 इंदौर
95. भोपाल
मई 1994 - 96 बीना 97 झांसी 98 ग्वालियर 99 आगरा 100  भरतपुर 101 जयपुर 
102 मथुरा 103 अलीगढ़ 104 मेरठ 105. दिल्ली ( 24 मई 1994 को पहुंची ) 24 से 31 मई तक दिल्ली में समापन शिविर का आयोजन हुआ।  

-विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 

(SADBHAWNA RAIL YATRA, DELHI, NYP, SN SUBBARAO, ARJUN SINGH, CK JAFARSHARIF) 

( आगे 58 कड़ियों में पढ़िए इस अनूठी रेल यात्रा की से जुड़ी कहानियां और संस्मरण....) 
   

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