Monday, December 17, 2012

ऊटी में डिनर होटल ऊटी सरवना में

ऊटी के बस स्टैंड पहुंच कर हमें यहां पता चला कि हमारे टैक्सी वाले ने हमें धोखा दिया है। हमारा होटल विनायगा इन चेरिंग क्रास के पास था। हालांकि टैक्सी वाला चेरिंग क्रास से होकर आया था पर उसने हमें रास्ते में नहीं उतारा। वहां से हम होटल पैदल टहलते हुए पहुंच सकते थे। अब बस स्टैंड आकर बोलता है कि 60 रुपये और दो तो होटल छोड़ दूंगा। 

हमें भी गुस्सा आया कि हम अब तुम्हारे साथ आगे का सफऱ नहीं कर सकते क्योंकि तुमने हमें बरगलाया है। हालांकि टैक्सी में बैठे सहयात्री रास्ते में कह रहे थे कि आप चेरिंग क्रास उतर जाएं पर टैक्सी ड्राईवर ने इसकी पुष्टि नहीं की और हम गफलत में रह गए। अच्छा होता है कि आप अपने बुक किए हुए होटल से फोन करके पहुंचने का रास्ता पूछ लें। अब हमने होटल तक जाने के लिए दूसरा स्थानीय आटो रिक्शा लिया। 
  

ऊटी के बस स्टैंड से हमारा होटल थोड़ा दूर था। हमें दोपहर के बाद अच्छी भूख लग चुकी थी। लिहाजा सोचा पेट पूजा करके आगे बढ़ा जाए। बस स्टैंड के पास एक होटल में चावल की थाली खाई। यह समान्य किस्म का होटल था। यहां दिखाई दिया कि बस स्टैंड के पास रहने के लिए कई सस्ते लाज भी हैं।

बोटानिकल गार्डन से निकलने के बाद अंधेरा छा गया था। हल्की हल्की बारिश में हमने छाता खोल लिया और ऊटी की सड़कों पर चहलकदमी करने लगे। आगे एक चौराहे पर बाजार आया। वहां से टी शर्ट और बारमुडा पसंद आ गया तो खरीददारी कर ली। हल्की बारिश में शहर का दौरा करना भला लग रहा था। क्योंकि इस बारिश ने ठंड बढ़ा दी थी। अब डिनर करने की इच्छा हुई। तो तय ये हुआ कि बजाय होटल मेंजाकर डिनर करने के इधर से पेट पूजा करके चलें। 


खाने के बाद होटल जाने तक थोड़ा टहलना भी जाएगा। तो चलते चलते हमें साइन बोर्ड नजर आया। होटल ऊटी सरवना प्योर वेज। फिर क्या था हम दाखिल हो गए अंदर। होटल का डेकोरेशन अच्छा था। मतलब आंतरिक सज्जा अनादि को पसंद आ गई। हमेशा की तरह माधवी और वंश का आर्डर था मसाला डोसा और प्लेन डोसा। मैंने मंगाई फ्राईड राइस। खाना अच्छा था सो जमकर खाया। तो इस तरह हुआ रात का भोजन होटल ऊटी सरवना में। अब हम चार्ज हो चुके थे सो टहलते हुए रात के नौ बजे तक होटल पहुंच गए। पर ये ऊटी की रुमानी शाम यादगार रहेगी।




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