Monday, December 24, 2012

चलो देखें मैसूर का दशहरा

सयाजी राव रोड से गुजरती दशहरे की झांकी। - विद्युत 
गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के राजपथ पर आपने झांकियां देखी होंगी। लेकिन इसी तरह की झांकिया निकाली जाती हैं मैसूर के दशहरे में जहां राज्य का विकास और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। मैसूर के दशहरे की झांकी को देखने के लिए हर साल लाखों लोग जुटते हैं। विजयादशमी के दिन मैसूर की मुख्य सड़क जिस पर झांकियां निकाली जाती हैं सुबह होने से पहले लोग जगह कब्जा करना शुरू कर देते हैं। मैसूर पैलेस  से निकलने वाली झांकी पांच किलमीटर से लंबा सफर करती है। 


झांकी देखने के लिए पेड़ पर चढ़े लोग। - विद्युत 
दुनिया भर में प्रसिद्ध मैसूर दशहरा उत्सव करीब 400 साल पुराना है। हर साल नवरात्रों के बाद आयोजित होने वाले इस उत्सव को कर्नाटक में राज्य उत्सव दर्जा हासिल है। इसके आयोजन का सारा खर्चा राज्य सरकार उठती है। मैसूर दशहरा उत्सव सन 1610 में आरंभ हुआ था।
यूं तो दशहरा पूर देश में मनाया जाता है लेकिन मैसूर में इसका विशेष महत्व है। किसी जमाने में मैसूर के दशहरे में हाती पर सवार होकर राजा झांकी में निकलते थे। लेकिन अब देश आजाद होने के बाद हाथियों के हौदे पर माता चामुंडेश्वरी की प्रतिकृति को विराजमान किया जाता है। अब वही राजा की प्रतीक हैं। दस दिनों तक चलने वाला यह उत्सव चामुंडेश्वरी द्वारा महिषासुर के वध का प्रतीक है। इसमें बुराई पर अच्छाई की जीत माना जाता है। 

इस पूरे महीने मैसूर महल को रोशनी से सजाया जाता है। इस दौरान अनेक सांस्कृतिक, धार्मिक और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उत्सव के अंतिम दिन बैंड बाजे के साथ सजे हुए हाथी देवी की प्रतिमा को पारंपरिक विधि के अनुसार शहर के बाहर बन्नी मंडप तक पहुंचाते है। करीब पांच किलोमीटर लंबी इस यात्रा के बाद रात को शानदार आतिशबाजी का कार्यक्रम होता है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी उत्साह के साथ निभाई जाती है। वीआईपी गैलरी में इस आतिशबाजी को देखने के लिए टिकट खरीदना पड़ता है जिसकी एडवांस बुकिंग काफी पहले हो जाती है।
-    ---- विद्युत प्रकाश मौर्य

( ( MYSORE, DASHARA, KARNATKA ) 

No comments:

Post a Comment