Tuesday, January 1, 2013

अनूठा है बेंगलुरू का विधान सौदा

देश अलग अलग राज्यों के विधान सभा भवन हैं उनमें अगर सबसे शानदार भवन की बात की जाए तो कर्नाटक का नाम सबसे पहले आएगा। कर्नाटक के विधानसभा भवन का नाम कन्नड में विधान सौदा कहा जाता है। यह भारत की आजादी के बाद बने देश के चंद शानदार भवनों में से एक है।

अगर आप बेंगलुरु पहुंचे हैं तो विधान सौदा जरूर देखने जाएं। यह राज्य सचिवालय होने के साथ-साथ ईंट और पत्थर से बने एक उत्कृष्ट निर्माण का नमूना है। करीब 46 मीटर ऊंचा यह भवन बेंगलुरु शहर के सबसे ऊंचा भवनों में भी शुमार है।

सजायाफ्ता मुजरिमों को काम पर लगाया -  इस भवन की आधारशिला 1951 में पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने रखी थी। इसका वास्तविक धरातल पर काम 1952 में आरंभ हुआ। इसका निर्माण 1956 में पूरा हुआ। इसके निर्माण में बड़ी संख्या में ऐसे अकुशल श्रमिकों को शामिल किया गया जो सजायाफ्ता थे। पर निर्माण कार्य पूरा होने पर उनकी सजा माफ कर दी गई। निर्माण के दौरान इसके चीफ इंजीनियर बी आर मनिक्कम थे। उन्हें इस भवन के वास्तुकार होने का भी श्रेय दिया जाता है।

ब्रिटेन के हाउस ऑफ कामन्स से तुलना -  इसका विस्तार 700 फीट गुणा 350 फीट में है। यह 60 एकड़ के भूखंड में विस्तारित है। 1951 से 1956 तक मैसूर के मुख्यमंत्री रहे के हनुमंथैया के दिमाग की उपज थी इतनी शानदार विधानसभा का निर्माण। वे चाहते थे कन्नड़ भाषी राज्य का विधानसभा भवन ब्रिटेन के हाउस ऑफ कामन्स की तरह शानदार हो।
हुआ भी ऐसा ही। यह किसी भी राज्य के विधान सभा भवन से आकार में बड़ा है। यह भवन तकरीबन 1.84 करोड़ में बनकर तैयार हुआ था। भवन के अंदर विधानसभा और विधान परिषद के लिए दो विशाल हॉल बने हैं। इस भवन के रखरखाव में आजकल सालाना दो करोड़ रुपये का खर्च आता है। अपने सौंदर्य में यह आस्ट्रिया, अमेरिका और कनाडा के शानदार भवनों का मुकाबला करता है।


सरकार का काम ईश्वर का काम - विधान सौध राज्य के सचिवालय के साथ राज्य की विधान सभा के रूप में उपयोग में लाया जाता है। विधान सभा भवन के ऊपर लिखा गया है – गवर्नमेंट वर्क इज गॉड वर्क। (GOVERNMENT WORK IS GOD'S WORK )  यानी सरकार का काम ईश्वर का काम है। इस बात का द्योतक है कि सरकार को पूरी निष्पक्षता से जनता की सेवा में काम करना चाहिए।

नव द्रविड़ियन शैली में बेंगलोर ग्रेनाइट से बना यह भारतीय स्थापत्य शानदार उदाहरण है। इसकी वास्तुशिल्प शैली में परंपरागत द्रविड शैली के साथ-साथ आधुनिक शैली का भी मिश्रण देखने को मिलता है। इसमें ब्रिटिश और इस्लामिक वास्तुकला का भी इस्तेमाल किया गया है। इसके आसपास दूर तक फैले हरे-भरे मैदान है। विधानसभा भवन के बाहर गांधी जी बैठी हुई विशाल प्रतिमा लगाई गई है। जो काफी आकर्षक है। वहीं विधानसभा के परिसर में सुंदर झांकियां बनाई गई हैं जो आजादी के आंदोलन की दास्तां सुनाती हैं। साथ ही कई झांकियों में देश के तकनीकी प्रगति की कहानी भी सुनाई दे जाती है।


रात में रोशनी में जगमगाता है - विधान सौदा हर रोज शाम 6 से 8.30 बजे तक रोशनी से जगमगाता रहता है। खास तौर पर सार्वजनिक छुट्टी के दिन और रविवार के दिन इसे रंगबिरंगी रोशनी से सजाया जाता है, जिससे यह और भी खूबसूरत हो उठता है। इसलिए इसे रविवार रात्रि के समय और बाकी की रातों में भी रंगबिरंगे पप्रकाश में देखना और भी सुखद अनुभव हो सकता है।

कैसे पहुंचे - बेंगलुरू शहर के किसी भी स्थान से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। बेंगलुरु सिटी जंक्शन से यह सिर्फ 9 किलोमीटर की दूरी पर है। कब्बन पार्क के पास स्थित है।

अब विधानसभा के पास से मेट्रो की लाइन भी गुजर रही है। बेंगलुरु के पर्पल लाइन मेट्रो पर विधान सौदा नामक रेलवे स्टेशन है, जो 30 अप्रैल 2016 से संचालन में आया है। 
मेट्रो स्टेशन का नाम डॉक्टर बीआर अंबेडकर विधान सौदा मेट्रो स्टेशन है। यह अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन है। इसका अगला स्टेशन कब्बन पार्क है तो पिछला स्टेशन एम विश्वैशरैया है। यह सिटी रेलवे स्टेशन से ह्रावइट फील्ड की ओर जाने वाली मेट्रो लाइन पर है। बेंगलुरु शहर का मुख्य बाजार मैजेस्टिक से दो स्टेशन बाद विधान सौदा स्टेशन आता है। 



कुछ ऐसा है कर्नाटक का विधान सौदा

- 60 एकड़ क्षेत्रफल में हुआ है विधान सौदा का परिसर।
- 1.84 करोड़ आई थी लागात, चार साल में पूरा हुआ निर्माण
-  46 मीटर है ऊंचाई, 700 मीटर लंबाई, 350 मीटर चौड़ाई
- 05 लाख 5 हजार 505 वर्ग फीट है कुल एरिया 
- 02 करोड़ हर साल खर्च होता है इस भवन के रखरखाव में 

- विद्युत प्रकाश मौर्य 

(VIDHAN SOUDHA, BANGLURU, KARNATKA  ) 

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