Thursday, December 20, 2012

आ अब लौट चलें – वोल्वो का सफर


ऊटी घूमने के बाद अब लौटने की बारी थी। आए तो थे कोयंबटूर की तरफ से जाना था मैसूर। सो रात को होटल में बैठकर बस का विकल्प ढूंढा अपने लैपटॉप पर। पता चला कि बस स्टैंड से कर्नाटक रोडवेज की वोल्वो बस मिल रही है। बस खुलने से 10 घंटे पहले ऑनलाइन आरक्षण करा लिया। मोबाइल फोन पर ईटिकट एसएमएस के रुप में आ गया। क्या हाईटेक सुविधा है। लिखा था बस ऊटी बस स्टेशन से 14 नंबर प्लेटफार्म पर मिलेगी।
बस बिल्कुल उसी प्लेटफार्म पर खुलने के समय से आधे घंटे पहले आ गई। बस का कंडक्टर सफेद वर्दी में था। उसने अपनी जेब से कंप्यूटर शीट निकाली। सभी यात्रियों के टिकट चेक कर प्रवेश देना शुरू किया। सबके लगेज लगेज वैन में डाले गए। बिल्कुल फ्लाइट्स की तरह। और बस समय से चल पड़ी। 
सभी यात्रियों को मिनरल वाटर की एक एक बाटल दी गई। और ये क्या एक एक पॉलीथीन भी।बेटे ने पूछा पापा ये पॉलीथीन क्यों दे रहे हैं। मैने कहा शायद कचरा रखने के लिए...पर मतलब थोड़ी देर बाद समझ में आया। बस ऊटी से निकलने के बाद जब घूमावदार रास्तों से चलने लगी तो कई लोग उल्टी करने लगे। अपनी अपनी उल्टी अपने पॉलीथीन में। थोड़ी देर बाद माधवी का भी मिजाज खराब होने लगा। उसने उल्टी की और मेरे राजकुमार वंश भी उल्टी करने लगे। सबको देखकर मेरा भी जी मिचलाने लगे।
थोड़ी देर में मैं भी उल्टी करने लगा। अब ये सफर काफी मुश्किल और भयावह लगने लगा। आग्रह करके वातानूकुलित बस का छत की खिड़की खोलवाई। थोड़ी प्राकृतिक हवा आए। घुटन कम हो। पर सब बेअसर। सबकी तबीयत खराब। हसीन वादियों का सफर दुखद बन गया था। 
गुंडलपेट पहुंचने के बाद अनादि और माधवी। 

बस इंतजार था कब मंजिल आएगी। हमारे साथ मुंबई के फ्री लांस पत्रकार अनील जागीरदार सफर कर रहे थे। उन्होंने सलाह दी कभी भी पहाड़ों पर बस का सफऱ करने के तुरंत पहले कुछ नहीं खाएं। हमलोग होटल से नास्ता करके तुरंत चल पड़े थे। मैं लौंग लेना भी भूल गया था। लौंग चबाने से पहाड़ी घूमावदार सफर में राहत मिलती है। ये उत्तर काशी जाते समय आजमाया था। ऊटी से मैसूर के रास्ते में कुल 36 हेयर पिन बैंड आते हैं। ये काफी तीखे मोड़ हैं इसलिए इन्हें हेयरपिन बैंड कहते हैं।
खैर राम जी का नाम लेते लेते हमारी बस गुंडलपेट पहुंचे तो राहत मिली। हमलोग 101 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। यहां से मैसूर तकरीबन 60 किलोमीटर रह गया है। पर अब रास्ता काफी सीधा है। जंगल पहाड़ खत्म हो चुके हैं। पर बस का आधे घंटे का ठहराव था। सामने एक रिजार्ट है। हम सबके चेहरे उतरे हुए थे। माधवी को तो लगा मानो मौत के मुंह से वापसी हुई हो। मेरे बेटे अनादि कहते हैं पापा अब जिंदगी में कभी वोल्वो का सफर नहीं। और इस सफर को तो कभी याद भी मत दिलाना। 

ऊटी से मैसूर बस का मार्ग - ऊटी से पायकरा लेक ( 25 किमी) - गुडालूर टाउन 25 किमी। थेपाकाकाडू (मदुमलाई) - 17 किमी पर। बांदीपुर नेशनल पार्क - 12 किमी पर। गुंडलपेट 22 किमी पर। नानजानगुड 37 किमी पर। मैसूर सिटी 22 किमी पर। 
दरअसल ऊटी से मैसूर के दो रास्ते हैं एक मसानगुडी होकर (125 किमी) का है जिसमें रास्ते में 36 हेयर पिन बैंड आते हैं। दूसरा रास्ता वाया गुडालूर होकर है जो 160 किलोमीटर का है। गुंडलपेट से एक रास्ता केरल के कोझिकोड के लिए जाता है तो दूसरा रास्ता कोयंबटूर के लिए जाता है।

आपको दोस्ताना सलाह -  अगर आपको पहाड़ी रास्तों से परेशानी है तो बेहतर होगा कि इन रास्तों पर छोटी बसें, नॉन एसी बसें या टैक्सी में सफऱ करें। इनमें हेयरपिन बैंड का असर कम होगा। ऊटी में निजी आपरेटर छोटी बसों का संचालन करते हैं।     

-    - विद्युत प्रकाश मौर्य  

   ( VOLVO, BUS, KSRTC, HAIR PIN BAND, MADUMALAI, BANDIPUR GUNDLUPET, NANJANGUD ) 

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