Tuesday, December 25, 2012

मैसूर का महाराजा पैलेस

दशहरे पर रोशनी में नहाया मैसूर पैलेस। 

मैसूर शहर के बिल्कुल केंद्र में स्थित है मैसूर का महाराजा पैलेस। यह महल मैसूर में आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र है। मिर्जा रोड पर स्थित यह महल भारत के सबसे बड़े महलों में से एक है। इस किले में सात दरवाजे हैं। इसका निर्माण मैसूर राज्य के वाडियार महाराजाओं ने कराया था। पहली बार यहां लकड़ी का महल बनवाया गया था। जब लकड़ी का महल जल गया था, तब इस महल का निर्माण कराया गया।

 वर्तमान महल 1912 में बना है। इस महल का नक्शा ब्रिटिश आर्किटैक्ट हेनरी इर्विन ने बनाया था। कल्याण मंडप की कांच से बनी छत, दीवारों पर लगी तस्वीरें और स्वर्णिम सिंहासन इस महल की खासियत है। बहुमूल्य रत्‍नों से सजे इस सिंहासन को दशहरे के दौरान जनता के देखने के लिए रखा जाता है।

महल में सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक जाया जा सकता है। कैमरा ले जाना मना है। मैसूर महल की रविवार, राष्ट्रीय अवकाश के दिन शाम सात से आठ बजे तक और दशहर के दौरान शाम सात बजे-रात नौ बजे तक रोशनी की जाती है। तब महल सौन्दर्य देखते ही बनता है।
मोहम्मद हसन के साथ तांगे पर मैसूर की सैर। 
चांदनी रात में  तांगे पर बैठकर मैसूर महल देखने का मजा और बढ़ जाता है। हमने भी एक तांगा किराये पर लिया महल देखने के लिए। दशहरे से एक दिन पहले महल जगमगा रहा था। लेकिन तांगा चलाने वाले मोहम्मद हसन निराश थे। बताया 40 साल से यहां तांगा चला रहा हूं। लेकिन इस बार दशहरे पर सैलानी कम आए हैं।
वे कहते हैं कि कावेरी नदी जल विवाद के कारण तमिलनाडु के लोग इस बार दशहरा देखने नहीं आए। हमारी कर्नाटक सरकार तमिलनाडु को पानी देने से रोक रही है। तो तमिलनाडु भी हमें बिजली नहीं देगा।
जगन मोहन पैलेस मैसूर का दूसरा प्रमुख महल है। इस महल का निर्माण महाराज कृष्णराज वोडेयार ने 1861 में करवाया था। 1915 में इस महल को श्री जयचमाराजेंद्र आर्ट गैलरी का रूप दे दिया गया जहां मैसूर और तंजौर शैली की पेंटिंग, मूर्तियां और दुर्लभ वाद्ययंत्र रखे गए हैं। यहां त्रावणकोर के शासक और प्रसित्र चित्रकार राजा रवि वर्मा और रूसी चित्रकार रोएरिच के बनाए गए चित्र देखे जा सकते हैं। कला प्रेमियों को जरूर यहां जाना चाहिए। किले में फोटोग्राफी वर्जित है।
-    -------विद्युत प्रकाश मौर्य

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