Friday, May 9, 2014

नीलगिरी माउंटेन रेल का सुहाना सफर

एनएमआर के कोच में  अनादि अनत । 
हरियाली के बीच हौले हौले रास्ते बनाती ऊंचाई की ओर चढ़ती जाती है ये ट्रेन जिसका नाम है नीलगिरी माउंटेन रेल। प्यार से लोग इसे खिलौना ट्रेन भी कहते हैं। भारतीय रेलवे की अनूठी विरासत। जिसे भारतीय रेल ने एनएमआर यानी नीलगिरी माउंटेन रेल के तौर पर संजो कर रखा है। तमिलनाडु के कोयंबटूर के पास के शहर मेट्टुपालियम से इस ट्रेन का सफर शुरू होता है। 
मेट्टुपालियम जो समुद्र तल 320 मीटर की ऊंचाई पर है। उदगमंदलम यानी ऊटी तक 46 किलोमीटर का सफर आप इस खिलौना ट्रेन से तकरीबन पांच घंटे में करते हैं। लेकिन ये कुछ घंटे बन जाते हैं आपके जीवन की स्मृतियों के आंगन में कभी न भूलाए जाने वाले क्षण।

अगर नीलगिरी रेल का सफर करना चाहते हैं तो आदर्श तरीका है कि आप रात में चेन्नई से ब्लू माउंटेन एक्सप्रेस से आएं। ये ट्रेन सुबह मेट्टुपालियम पहुंचती है। इस ट्रेन के पहुंचने के बाद ही ऊटी जाने वाली ट्रेन खुलती है।
नीलगिरी माउंटेन रेल काफी हद तक कालका शिमला रेल और सिलिगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच चलने वाली डीएचआर से मिलती जुलती है। लेकिन कई मायने में अलग भी है। दूरी के लिहाज से छोटी है लेकिन तकनीक कुछ अलग है। अपनी अदभुत तकनीक के कारण ये बाकी सभी रेलमार्ग से अलग है।

इतिहास – 1820 के बाद उदगमंडलम का इलाका ब्रिटिश शासन में आ चुका था। कई ब्रिटिश लोगों ने उटी के आसपास अपने समर हाउस बना लिए थे। यहां तक की मद्रास की राजधानी भी गर्मियों में ऊटी को चली जाती थी। दक्षिण भारत के एकमात्र हिल स्टेशन ऊटी को रेलमार्ग से जोड़ने का ख्याल पहली बार 1854 के आसपास आया। पर इस ख्याल को जमीन पर लाने में 45 साल लग गए। ब्रिटिश सरकार कन्नूर शहर से खच्चरों को हटाना चाहती थी। कई साल तक योजना आगे बढ़ी। 

1882 में रिग्गी रैक रेलवे के आविष्कारक स्विटजरलैंड निवासी एम रिगेनबैक ने रैक रेलवे का प्रस्ताव दिया जो स्वीकार हो गया। 1885 में में नीलगिरी रिग्गी रैक रेलवे कंपनी का गठन हुआ। 1891 में मेट्टुपालियम से ऊटी को जोड़ने के लिए रेल लाइन बनाने पर काम आरंभ हुआ। कई जगह पहाड़ों को काटकर ढेर सारे पुल पुलिया बनाकर ये रेल लाइन बनानी शुरू की गई। 

1899 में मेट्टूपालियम से कन्नूर तक ट्रेन का सफर आरंभ हुआ। जून 1908 इस मार्ग का विस्तार उदगमंडलम तक किया गया। तब कन्नूर से ऊटी तक के लाइन विस्तार में 24 लाख 40 हजार रुपये का खर्च आया था। शुरुआत में इस रेल मार्ग पर ट्रेन मद्रास रेलवे कंपनी की ओर से चलाई जा रही थी। कई कंपनियों से होकर गुजरते हुए देश की आजादी के बाद 1951 में ये रेलमार्ग दक्षिण रेलवे का हिस्सा बना। सौ साल से ज्यादा वक्त गुजर चुका है और इस खिलौना ट्रेन का सुहाना सफर जारी है। 
- vidyutp@gmail.com

( NILGIRI MOUNTAIN RAILWAY, MITER GAUGE, OOTY, METTUPALAYAM, TAMILNADU ) 

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