Wednesday, December 5, 2012

यहां से हनुमानजी ने लगाई लंका के लिए छलांग

रामझरोखा से रामेश्वरम का नजारा। फोटो - विद्युत 
रामेश्वरम में रामनाथ स्वामी मंदिर और कलाम हाउस के अलावा कई और दर्शनीय स्थल हैं। इन स्थलों को घुमाने का काम यहां के आटो रिक्शा वाले करते हैं। वे ही यहां के टूरिस्ट गाइड हैं। आटो वालों की जेब में सभी टूरिस्ट प्लेस का मैप होता है। सभी जगह घुमाने का वे 300 रुपये मांगते हैं। ये टूर दो ढाई घंटे का है। कोई मोल भाव नहीं करते। आम तौर पर फिक्स रेट। मंदिर के आसपास से शुरू आपका सफर वहीं आकर खत्म हो जाता है। 

राम झरोखा मंदिर - सबसे पहले बात करते हैं राम झरोखा मंदिर की। मुख्य मंदिर से ढाई किलोमीटर आगे गंधमदान पर्वत पर ऊंचाई पर बने राम झरोखा मंदिर में राम जी की चरण पादुका है। कहते हैं हनुमान जी ने यहीं से श्रीलंका जाने के लिए सीधी छलांग लगाई थी। यहां से समंदर लांघ कर वे सीधे पहुंच गए सीता मैय्या की खोज खबर लेने रावण की लंका में। वैसे यहां से रामेश्वरम शहर और समंदर का बड़ा ही सुंदर नजारा दिखाई देता है। शायद इसलिए मंदिर को राम झरोखा कहा जाता है। ये रामेश्वरम टापू की सबसे ऊंची चोटी है।

जब मेरा चप्पल हुआ चोरी – राम झरोखा मंदिर में जाने से पहले हमने अपना चप्पल मंदिर की सीढ़ियों पर बैठे एक साधु बाबा के सामने उतार दिया। लौट कर आने पर माधवी और अनादि की जोड़ियां सलामत थी मेरी चप्पले गायब। काफी ढूंढने पर भी चप्पले नहीं मिलीं। यानी चरण पादुका में मेरी पादुका गायब। शायद ईश्वर यही चाहते थे कि आगे के मंदिरों के दर्शन मैं नंगे पांव ही करूं। आगे का सारा सफर नंगे पांव करना पड़ा। रामेश्वरम दर्शन खत्म करने के बाद जब मैं मंदिर लौटा तब मंदिर के सामने एक दुकान से नई चप्पल खरीदी।

चप्पल की दुकान पर जो अम्मा थी उनकी दार्शनिक बातों ने मेरे चप्पल चोरी होने के दुख को थोड़ा कम कर दिया। ओ माई सन..योर प्राब्लम साल्व्ड न...नो टेंसन...इसलिए टूरिस्ट कैब या बसों में सफर करने वालों को मेरी सलाह है कि वे अपने चप्पल जूतों को अपनी आरक्षित की हुई गाड़ी में उतार कर ही मंदिरों में प्रवेश करें। इससे चप्पल जूता शुल्क के रुप में दी जाने वाली राशि की भी बचत होगी। 
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---विद्युत प्रकाश ( RAMESHWARAM, HANUMAN, CHAPPAL ) 

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