Tuesday, November 13, 2012

कन्याकुमारी- चरणों को धोता सागर का सम्राट


 कन्याकुमारी शहर का नाम पड़ा है कन्याकुमारी के मंदिर के नाम पर। कन्याकुमारी देवी पार्वती का दूसरा स्वरूप है। देवी कन्याकुमारी की कहानी है। उन्होंने दुष्टों का संहार किया था। मंदिर के आसपास आपको कन्याकुमारी का रुप धरे बालिकाएं मिल जाएंगी जो दुकानदारों से मंदिर के लिए दान मांगती हैं। कन्याकुमारी मंदिर में भी दर्शन के लिए ड्रेस कोड है। कमर से उपर नग्न होकर ही पुरुष मंदिर में जा सकते हैं। यहां निःशुल्क सर्व दर्शन के अलावा आप 20 रुपये का दर्शन टोकन ले सकते हैं। पूरा मंदिर पत्थरों का बना है। मंदिर में कैमरा, मोबाइल का प्रयोग वर्जित है। मंदिर के आसपास मोतियों, शंख, कौड़ियों मशालों, ड्राई फ्रूट्स की दुकानें हैं। मंदिर का एक द्वार समंदर की तरफ है।

समंदर का अदभुत नजारा 

कन्याकुमारी के समंदर को देखते हुए कवि प्रदीप की पंक्तियां याद आती हैं- दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है....गीत आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं की ये पंक्तियां यहां बार बार याद आती हैं। कन्याकुमारी मंदिर के बाहर तीन तरफ आप समंदर का नजारा देख सकते हैं।

बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर की धाराएं कन्याकुमारी में एक साथ मिलती हैं। कन्याकुमारी में सागर तट पर बैठकर घंटों अपलक समंदर को निहारना बड़ा ही मनोहारी अनुभव है। यहां के समंदर का पानी अपेक्षाकृत साफ भी नजर आता है। बिल्कुल सफेद लहरें उठती और गिरती हैं।

 कई बार समंदर से आने वाली लहरें आपको भिगो देती हैं। हालांकि यहां समंदर में नहाने के लिए कोवलम जैसा खूबसूरत तटीय किनारा नहीं है। लेकिन कन्याकुमारी के समंदर में भी स्नान करना एक न भूलने वाली अनुभूति है। काफी लोग यहां धार्मिक भावना से भी नहाते हैं। और नहाने के बाद पूजा पाठ।
कुमारी अमान मंदिर के समुद्र तट के सामने नजर आता है विवेकानंद रॉक मेमोरियल और संत तिरुवल्लुर की बड़ी सी प्रतिमा। मंदिर के बगल में ही कांची शंकरचार्य का मठ और उसके बगल में गांधी मंडप है। वहीं दूसरी तरफ एक पुराना चर्च भी है। ये सब कुछ घूमने के लिए आधा दिन का वक्त काफी है। लेकिन आपकी मर्जी है आपका जी नहीं भरे तो देर तक नजारा कर सकते हैं।
-   -  विद्युत प्रकाश मौर्य

((KANYAKUMARI, CAPE, TAMILNADU, SEA )  



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