Monday, October 29, 2012

केरल यानी ईश्वर का अपना देश


मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस (12618) में हमारी दूसरी सुबह हुई तो हमारी ट्रेन गोवा और कर्नाटक के तटीय इलाकोंं को पार करके केरल में प्रवेश कर चुकी थी। सुबह में कोझिकोड (कालीकट) पहला बड़ा स्टेशन आया। ट्रेन हल्की सी लेट है। यहां राजेश चौधरी और उनके साथी एनआईटी कालीकट जाने के लिए उतर गए। ट्रेन तकरीबन दस मिनट रुकी तो हमने यहां हल्का नास्ता लिया रेलवे स्टेशन के कैंटीन से। इसके बाद रास्ते में मंगला फेरोक, पारापनगड्डी, तिरुर, कुट्टीपुरम, पाट्टम्बी में रुकी। इसके बाद आया शोरानूर जंक्शन। यह बड़ा रेलवे स्टेशन है। इसके बाद ट्रेन त्रिशूर में रुकी। अगला स्टेशन अलुवा है। यह कोचीन शहर का बाहरी इलाका है।

दिन के 11 बज चुके हैं और हमलोग पहुंच चुके हैं एर्नाकुलम साउथ रेलवे स्टेशन। यानी कोच्चि या फिर कोचीन। कोचीन में कई रेलवे स्टेशन हैं पर उनमें एर्नाकुलम साउथ सबसे बड़ा स्टेशन है। मंगला लक्षदीप के साथ 52 घंटे का सफर याद रहेगा। इसमें ट्रेन बीच के 46 रेलवे स्टेशनों पर रुकती है। ऐसा लग रहा है जैसे रेलगाड़ी ही घर बन गई है। एकबारगी तो ट्रेन से उतरने की इच्छा ही नहीं हो रही है। पर हम कोचीन में पहुंच चुके हैं जहां कभी वास्कोडिगामा का कारवां पहुंचा था। 

केरल टूरिज्म की टैगलाइन है। केरल- गॉड्स ओन कंट्री...सचमुच ईश्वर केरल पर बहुत मेहरबान है। केरल में ट्रेन के प्रवेश करते ही आपको दोनों तरफ हरियाली और ऊंचे-ऊंचे नारियल के पेड़ नजर आते हैं। नारियल ऐसा फल जिसके कई इस्तेमाल हैं। नारियल का तेल, नारियल का पानी, नारियल की मिठाई, पूजा में चढ़ाए जाने के लिए नारियल का खोपरा।
Kochi - Lunch in Arya Bhawan. 
अतीत से साक्षात्कार यानी फोर्ट कोच्चि। कोचीन यानी एरनाकुलम। केरल का सबसे बड़ा शहर। अब यहां मेट्रो रेल दौडा़ने की तैयारी हो रही है।एर्नाकुलम देश का पहला जिले जिसे सबसे पहले सौ फीसदी साक्षर घोषित किया गया। एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन है तो कोचीन बंदरगाह। हिन्दुस्तान में अंग्रेजों से पहले पहुंचने वाले जेविस और पुर्तगालियों की स्मृति चिन्ह है कोचीन शहर में। 

एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही कोचीन में कई मध्यम स्तर के होटलों को ठिकाना बना सकते हैं। वैसे कोचीन में महंगे होटलों की भरमार है। हमारा ठिकाना बना चित्तूर रोड पर होटल संगीता। होटल गनम का हिस्सा। होटल के ठीक सामने दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा का दफ्तर है। होटल का साफ सुथरा अच्छा व्यवहार है। हमारे सफर में किसी होटल में ये पहला ठहराव है। हमने यहां फोन करके मौखिक बुकिंग कराई थी। रिसेप्सन पर मौजूद महिला ने रजिस्टर में मेरा नाम लिख रखा था। 

KOCHI- IN A AUTO RICKSHAW
होटल में पहुंचकर जमकर नहाए और 52 घंटे के रेल के सफर की थकान दूर करने की कोशिश की। इसके खाने के लिए होटल की तलाश में निकले। हमने दोपहर का खाना पास के ही आर्य भवन में खाया। चावल की थाली यानी दोपहर का मिल्स । कुल 50 रुपये में अनलिमिटेड खाना। आप सब कुछ दोबारा ले सकते हैं। 
पीने के लिए केरला आर्युवेदिक वाटर यहां के होटलों में दिखाई दिया। यह एक किस्म का रंगीन पानी होता है जो गर्म करके पेश किया जाता है। खाने के बाद थोड़ी देर आराम। उसके बाद शाम होने से पहले हमलोग चल पड़े फोर्ट कोच्चि की ओर। आटोरिक्शा बुक किया मरीन ड्राईव के लिए। यहां सारे आटोरिक्शा वाले मीटर चलते हैं। कोई मोलभाव नहीं। यह बड़ा सुखकर है। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com

( होटल संगीता,   Near Junction Railway Station, Chittoor Rd, KOCHI - 682016 Tel. 04842376123  दूसरे होटल - होटल गनम, चित्तूर रोड, होटल पॉलसन पार्क, रेलवे स्टेशन के सामने )  ( KERALA, KOCHI ) 




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